रेडियोएक्टिव पानी के डर से चीन ने जापानी सीफूड पर लगाया प्रतिबंध, जवाब में पीएम किशिदा ने खाई फुकुशिमा की मछली
जापान ने 24 अगस्त से प्रशांत महासागर में 12 सालों से जमा फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट का रेडियोएक्टिव पानी छोड़ना शुरू कर दिया है। इस पानी का इस्तेमाल जापान अपने न्यूक्लीयर पावर प्लांट में रिएक्टर्स को ठंडा रखने के लिए करता था।
इसके बाद चीन और हांगकांग जैसे देशों ने फुकुशिमा के सी फूड को असुरक्षित बताते हुए उस पर पाबंदियां लगा दी थीं। इसके अलावा दक्षिण कोरिया में भी जापान के इस कदम की आलोचना हो रही है।

पड़ोसी देशों की चिंताओं को दूर करने के लिए खुद जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने बुधवार को फुकुशिमा की मछली खाई है। किशिदा को फुकुशिमा मछली खाते हुए दिखाने वाला एक वीडियो क्लिप उनके कार्यालय द्वारा सोशल मीडिया पर प्रकाशित किया गया है।
इस वीडियो में जापानी पीएम किशिदा फुकुशिमा क्षेत्र से पकड़ी गई मछली साशिमी खा रहे हैं। खाने के दौरान वे इस मछली को बेहद स्वादिष्ट और सुरक्षित बता रहे हैं।
इस दौरान उनके साथ उनके ही कार्यालय के 3 मंत्री भी मछली खाते हुए दिखाई दे रहे हैं। दरअसल इस वीडियो के मार्फत जापानी पीएम यह साबित करना चाहते हैं कि रेडियोएक्टिव पानी का फुकुशिमा के सी फूड पर कोई बुरा असर नहीं पड़ा है।
आपको बतातें चलें कि जापान में साल 2011 में भीषण सुनामी आई थी। जिसमें फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट के तीन रिएक्टर बंद हो गए थे। सुनामी ने रिएक्टर्स के कूलिंग सिस्टम को खासा नुकसान पहुंचाया था।
इसके बाद न्यूक्लियर पावर प्लांट में रिएक्टर्स को ठंडा रखने के लिए पानी का इस्तेमाल किया जाने लगा। अब तक इस काम के लिए दस लाख टन से भी अधिक पानी का इस्तेमाल हो चुका है।
ये पानी न्यूक्लियर पावर प्लांट की साइट पर बने टैंक्स में स्टोर में है। पानी को स्टोर करने की जगह की कमी के कारण जापान ने इसे समुद्र में छोड़ने का फैसला किया गया।
साल 2019 में जापान के पर्यावरण मंत्री ने घोषणा की थी कि उनके पास इस पानी को समुद्र में छोड़ने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। पानी जरूरत से ज्यादा इकठ्ठा हो चुका है और भूकंप या फिर सुनामी की स्थिति में ये खतरनाक साबित हो सकता है।
हालांकि चीन के कदम का पड़ोसी देशों ने विरोध किया है। जापान लगातार इस बात का दावा कर रहा है कि वो जिस रेडियो एक्टिव पानी को प्रशांत महासागर में छोड़ रहा है उससे दुनिया को कोई खतरा नहीं है। जापान का कहना है कि समुद्र में रेडियोएक्टिव पानी रिलीज करने के प्लान को UN एजेंसी IAEA अप्रूव कर चुकी है।
जापान ने मांग की है कि चीन जो कि मछली के लिए उसका सबसे बड़ा बाजार है, समुद्री खाद्य आयात पर अपना प्रतिबंध हटा दे। इसके साथ ही जापान ने चेतावनी दी है कि अगर चीन ये प्रतिबंध नहीं हटाता है तो वह विश्व व्यापार संगठन से इसकी शिकायत करेगा।
समंदर में फुकुशिमा का पानी छोड़े जाने से पहले ही, जापान के मछली पकड़ने के उद्योग में कई लोग इस बात को लेकर चिंतित थे कि इससे घरेलू और विदेश में देश के समुद्री भोजन की प्रतिष्ठा पर क्या असर पड़ेगा। हालांकि अब पड़ोसी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को देखते हुए उनकी चिंता सही साबित हो रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक किशिदा सरकार मछली पकड़ने के उद्योग के लिए वित्तीय सहायता के पैकेज की भी योजना बना रही है, साथ ही नए निर्यात बाजार खोजने में भी मदद कर रही है।
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने बुधवार को फिर से दोहराया कि समंदर में छोड़ा जा रहा पानी संयुक्त राष्ट्र निगरानी संस्था के अनुसार सुरक्षित है।
जापान के प्रति समर्थन दिखाने के लिए, जापान में अमेरिकी राजदूत रहम एमानुएल ने फुकुशिमा क्षेत्र का दौरा करने और स्थानीय मछली खाने की बात कही है।












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