बच्चा संकट से जापान के अस्तित्व पर उठे सवाल, प्रधानमंत्री के सलाहकार ने कहा, फिर गायब हो जाएगा देश
जापान की जनसंख्या इस सदी के मध्य में बुरी तरह से सिकुड़ जाने का अनुमान है और साल 2065 तक जापान की कुल 8 करोड़ 80 लाख की आबादी तक पहुंच जाएगी, यानि 30 प्रतिशत तक की कमी आ जाएगी।

Japan News: बच्चा संकट ने जापान की मुश्किलें काफी बढ़ाकर रख दी हैं और जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा की सलाहकार ने हाल ही में एक बयान में कहा है, कि अगर जापान बच्चों के जन्म दर में आने वाली गिरावट को धीमा नहीं कर सकता है, तो फिर जापान के अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। जापानी प्रधानमंत्री के सलाहकार का ये बयान सामाजिक सुरक्षा चक्र और अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने की चेतावनी की तरह है, जो काफी खतरनाक है। जापान में पिछले कुछ दशकों से बच्चों का जन्मदर बुरी तरह से गिरा है, लिहाजा आशंका जताई जा रही है, कि अगले कुछ सालों में जापान में काम करने वाली आबादी ही खत्म हो जाएगी, जिसके गंभीर असर कई क्षेत्रों पर पड़ेंगे।

जापान में गंभीर स्तर पर पहुंचा बच्चा संकट
जापानी संसद के उच्च सदन की सांसद और पूर्व मंत्री मासाको मोरी, जो अलग अलग मुद्दों पर जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा को सलाह देती हैं, उन्होंने राजधानी टोक्यो में ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू के दौरान बच्चा संकट को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, कि "यह वे लोग हैं, जिन्हें गायब होने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा, जिन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा। यह एक भयानक बीमारी है जो बच्चों को भी प्रभावित करेगी।" आपको बता दें, कि जापान ने पहले 28 फरवरी को घोषणा की थी, कि पिछले साल देश में पैदा हुए बच्चों की संख्या रिकॉर्ड कम हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि पिछले साल, पैदा हुए लोगों की तुलना में मोटे तौर पर दोगुने लोगों की मृत्यु हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि 8 लाख बच्चों का जन्म हुआ है, जबकि देश में करीब 15 लाख 80 हजार लोगों की मौत हुई है और ये आंकड़ा जापान के लिहाज से काफी गंभीर है।

सरकारी स्तर पर कई उपाय
जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने जनसंख्या दर को बढ़ाने के लिए कई तरह की योजनाएं चलाई हैं, जिसमें बच्चों के जन्म लेने बाद भारी आर्थिक सहायता भी शामिल है, फिर भी जापानी परिवारों पर इसका कोई असर पड़ता फिलहाल नहीं दिख रहा है। ब्लूमबर्ग ने बताया, कि जन्मदर में गिरावट की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। जापान की जनसंख्या, जो साल 2008 में 12 करोड़ 80 लाख के करीब थी, वो 2022 में थोड़ा घटकर 12 करोड़ 46 लाख के करीब हो गई है। यानि, 12 सालों में जापान की आबादी में इजाफा होने के बजाए कमी आई है, जो चिंता का विषय है। इस बीच जापान की चिंता इस बात से और भी ज्यादा बढ़ गई है, कि 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों का अनुपात पिछले वर्ष बढ़कर 29 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है। पीएम की सलाहकार मोरी ने कहा, कि "ये अनुपात धीरे धीरे नहीं गिर रहा है, बल्कि ये सीधे नीचे जा रहा है।"
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जापानी समाज पर गंभीर असर
जापानी प्रधानमंत्री की सलाहकार मोरी ने चिंता जताते हुए कहा, कि "जापान में अब जो बच्चे पैदा हो रहे हैं, वो एक ऐसे समाज में आ रहे हैं, जो विकृत हो रहा है, जो सिकुड़ रहा है और जो अपने काम करने की क्षमता को खो रहा है।" ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मोरी ने यह भी कहा, कि अगर कुछ नहीं किया जाता है, तो जापान की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी, औद्योगिक और आर्थिक ताकत गिर जाएगी और देश की रक्षा के लिए सिक्योरिटी फोर्स की भर्तियां बंद हो जाएंगी। जापान की जनसंख्या 2017 की जनगणना के अनुसार 12 करोड़ 80 लाख थी। रिपोर्ट का अनुमान था कि इस सदी के आखिर तक जापान की संख्या आधी रह जाएगी यानी करीब पांच करोड़ 30 लाख। जापान में 100 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की आबादी सबसे अधिक बताई जाती है। इस देश में मेहनत और श्रम करने वालों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। सरकारी अनुमान में बताया गया था कि 2040 तक यहां बुजुर्गों की संख्या 35 फीसदी से अधिक हो जाएगी।












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