कनाडा विवाद के बीच ग्लोबल नॉर्थ पर जमकर बरसे जयशंकर, कहा- यह अभी भी डबल स्टैंडर्ड की दुनिया है...
S Jaishankar News: कनाडा से जारी विवाद के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने विकसित देशों पर करारा वार किया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है, कि यह अभी भी "डबल स्टैंडर्ड" की दुनिया है, और जो देश प्रभावशाली पदों पर हैं, वे परिवर्तन के दबाव का विरोध कर रहे हैं और ऐतिहासिक प्रभाव वाले लोगों ने, उन क्षमताओं को हथियार बना लिया है।
जयशंकर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन, संयुक्त राष्ट्र भारत और रिलायंस फाउंडेशन के सहयोग से ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित 'साउथ राइजिंग: पार्टनरशिप्स, इंस्टीट्यूशंस एंड आइडियाज' शीर्षक वाले एक कार्यक्रम में एक मंत्रिस्तरीय सत्र में बोल रहे थे।

उन्होंने शनिवार को यहां कहा, कि "मुझे लगता है कि बदलाव के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति से ज्यादा राजनीतिक दबाव है।"
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, कि विश्व भर में अब ये भावना बढ़ रही है और ग्लोबल साउथ, एक तरह से इसका प्रतीक है। उन्होंने कहा, लेकिन राजनीतिक प्रतिरोध भी हैं।
उन्होंने कहा, कि "जो लोग प्रभावशाली पदों पर बैठे हैं, हम इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सबसे अधिक देखते हैं, वे परिवर्तन के दबाव का विरोध कर रहे हैं।
जयशंकर ने कहा, "जो लोग आज आर्थिक रूप से प्रभावशाली हैं, वे अपनी उत्पादन क्षमताओं का लाभ उठा रहे हैं और जिनके पास संस्थागत प्रभाव या ऐतिहासिक प्रभाव है, उन्होंने वास्तव में उन क्षमताओं को भी हथियार बना लिया है।"
जयशंकर ने कहा, "वे अपने मुंह से तो हमेशा सही बात बोलेंगे, लेकिन वास्तविकता आज भी अलग है, यह बहुत ही डबल स्टैंडर्ड वाली दुनिया है।"
विदेश मंत्री को किन बातों पर आया गुस्सा?
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, कि "कोविड खुद इसका एक उदाहरण था, लेकिन मुझे लगता है, कि यह संपूर्ण परिवर्तन वास्तव में एक अर्थ में वैश्विक दक्षिण द्वारा अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली पर ज्यादा से ज्यादा दबाव डाला जाएगा। और, ग्लोबल नॉर्थ... ही इसका उत्तर नहीं है। वहां ये ऐसे हिस्से हैं जो शायद खुद को उत्तर में नहीं सोचते, लेकिन बदलाव के प्रति बहुत प्रतिरोधी हैं।"
जयशंकर ने कहा, कि सांस्कृतिक पुनर्संतुलन का वास्तव में मतलब, दुनिया की विविधता को पहचानना, दुनिया की विविधता का सम्मान करना और अन्य संस्कृतियों और अन्य परंपराओं को उनका उचित सम्मान देना है।
उन्होंने इस महीने की शुरुआत में दिल्ली में हुए जी20 शिखर सम्मेलन का जिक्र किया और मोटे अनाज का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, कि वैश्विक दक्षिण ऐतिहासिक रूप से कम गेहूं और ज्यादा बाजरा खाता है।
उन्होंने दर्शकों की हंसी के बीच कहा, "बाजार के नाम पर बहुत सारी चीजें की जाती हैं, जैसे आजादी के नाम पर बहुत सारी चीजें की जाती हैं।"
जयशंकर ने कहा, दूसरों की विरासत, परंपरा, संगीत, साहित्य और जीवन के तरीकों का सम्मान करना, यह सब उस बदलाव का हिस्सा है, जिसे ग्लोबल साउथ देखना चाहता है।
इस कार्यक्रम को संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज, रिलायंस फाउंडेशन के सीईओ जगन्नाथ कुमार, भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट समन्वयक शोम्बी शार्प और ओआरएफ के अध्यक्ष समीर सरन ने भी संबोधित किया।
इस कार्यक्रम में पैनल चर्चा में भाग लेने वाले पुर्तगाल के विदेश मामलों के मंत्री जोआओ गोम्स क्राविन्हो और विदेश मामलों और विदेश व्यापार, जमैका के मंत्री, कामिना जॉनसन स्मिथ थे।
कार्यक्रम में बोलते हुए जयशंकर ने आगे कहा, कि दिसंबर 2023 में ब्राजील के जी20 के प्रेसिडेंट बनने से पहले, भारत की जी20 अध्यक्षता के कुछ महीने बाकी हैं और "हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के सुधार पर कुछ प्रगति होगी।" सरन ने जयशंकर की इस टिप्पणी का जिक्र किया, कि "यूरोप की समस्याएं दुनिया की समस्याएं हैं लेकिन दुनिया की समस्याएं यूरोप की समस्याएं नहीं हैं" और कहा कि
कुछ लोगों को लगता है, कि जयशंकर यूरोप पर सख्त हैं, लेकिन यह उचित मूल्यांकन है।
आपको बता दें, कि ग्लोबल नॉर्थ का भूभाग के हिसाब से बंटवारा नहीं किया गया है, बल्कि ये एक काल्पनिक टर्म है, जिसमें विकसित देशों को, जिनमें अमेरिका के साथ विकसित अमेरिकी देश हैं, उन्हें ग्लोबल नॉर्थ कहा जाता है, जबकि विकसशील देशों, जिनमें भारत के अलावा इंडो-पैसिफिक और पैसिफिक देशों के ग्लोबल साउथ कहा जाता है। भारत की कोशिश, ग्लोबल साउथ का लीडर बनने की है।












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