पहली बार तालिबान-भारत के विदेश मंत्रियों की होगी द्विपक्षीय बैठक! मोदी सरकार का बड़ा डिप्लोमेटिक फैसला
तालिबान के विदेश मंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अफगानिस्तान में निवेश की अपील की है।
ताशकंद, जुलाई 29: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहली बार उज़्बेकिस्तान के ताशकंद में अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी के साथ द्विपक्षीय बैठक कर सकते हैं। द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, उज्बेकिस्तान में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन के विदेश मंत्रियो की बैठक के दौरान भारत और तालिबान के विदेश मंत्रियों की बैठक हो सकती है।

तालिबान के विदेश मंत्री से मुलाकात
राजनयिक सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि, हालांकि दोनों तरफ से अभी तक बैठक को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जब से भारत ने इस साल जून में काबुल में अपना दूतावास फिर से खोलने का फैसला किया है, तब से अफगानिस्तान का तालिबान शासन जयशंकर के साथ बैठक का अनुरोध कर रहा है। अगर ऐसी कोई बैठक होती है, तो जयशंकर और मुत्ताकी के बीच यह पहली आमने-सामने की बातचीत होगी। शीर्ष स्तर के सूत्रों ने कहा कि, प्रस्तावित बैठक पूरी तरह से मानवीय सहायता और अफगान लोगों के लिए सहायता से संबंधित मुद्दों पर केंद्रित होगी। जयशंकर एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए उज्बेकिस्तान के दो दिवसीय दौरे पर गुरुवार को रवाना हुए हैं, जहां उनके मुख्य कार्यक्रम के इतर कई द्विपक्षीय बैठकें करने की उम्मीद है, जिसमें चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बैठक भी शामिल है।

अफगानिस्तान के लिए हो सकते हैं ऐलान
रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि, तालिबान के विदेश मंत्री के साथ अनुमानित बैठक के दौरान भारत से अफगानिस्तान को दी जाने वाली मानवीय सहायता का जायजा भारतीय विदेश मंत्री ले सकते हैं, वहीं अफगान पक्ष नई दिल्ली के लिए कुछ मेगा भारतीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम फिर से शुरू करने का प्रस्ताव दे सकता है, जो तालिबान के अफगानिस्तान अधिग्रहण के बाद भारत ने रोक जी थी। दूसरी ओर, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के इस तथ्य पर "दृढ़ता से जोर देने" की संभावना है कि, नई दिल्ली अफगान धरती पर आतंकवाद में वृद्धि को बर्दाश्त नहीं करेगी, जिससे भारत ने पिछले साल अगस्त में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पारित यूएनएससी प्रस्ताव 2593 के तहत भारत की अध्यक्षता के दौरान अपना रुख दोहराया। भारत तालिबान के साथ तब से पर्दे के पीछे से बात कर रहा है, जब से तालिबान ने पिछले साल अगस्त में काबुल में सत्ता संभाली है। लेकिन इस साल जून में नई दिल्ली ने अफगानिस्तान में अपना दूतावास फिर से खोलने का फैसला किया और वहां एक "तकनीकी टीम" भेजी है।

तालिबान से बातचीत करता भारत
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) में संयुक्त सचिव (पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान डिवीजन) जेपी सिंह के नेतृत्व में एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल काबुल भेजा था, जिन्होंने मुत्ताकी के साथ एक बैठक भी की थी। जेपी सिंह एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए ताशकंद में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का भी हिस्सा हैं। इस बीच, मुत्ताकी इस सप्ताह की शुरुआत से ही ताशकंद में हैं, क्योंकि उन्हें उज़्बेक सरकार द्वारा आयोजित अफगानिस्तान पर एक विशेष बैठक में भी भाग लेना था। बैठक में भारत सहित 30 से अधिक देशों ने भाग लिया है। उज़्बेक विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि, "इस आयोजन का मुख्य लक्ष्य अफगानिस्तान में स्थिरता, सुरक्षा, संघर्ष के बाद के पुनर्निर्माण और क्षेत्रीय सहयोग में इसके एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए विश्व समुदाय के दृष्टिकोण के लिए उपायों और प्रस्तावों का एक सेट विकसित करना है।

तालिबान को लेकर भारत का रूख?
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार को एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि, भारत ने "उस कार्यक्रम में (आधिकारिक स्तर पर) भाग लिया"। बागची ने कहा कि, "यह अफगानिस्तान से संबंधित मुद्दों पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ जुड़ने के हमारे प्रयासों की निरंतरता में था। इस सम्मेलन के दौरान, भारत ने इस कठिन समय में अफगान लोगों की सहायता करने और मानवीय सहायता प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। हमने UNSC 2593 (बैठक में) को भी दोहराया'। वहीं, उज़्बेक विदेश मंत्री व्लादिमीर नोरोव की अध्यक्षता में अफगानिस्तान पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में, तालिबान के विदेश मंत्री ने सभी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभागियों को आश्वासन दिया है, कि काबुल में सरकार देश के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित करते हुए, अफगानिस्तान को सुरक्षित बनाने के लिए हर दिन काम कर रही है। इसलिए अफगानिस्तान व्यापार के लिए खुला है'।

अफगानिस्तान में निवेश का आह्वान
मुत्ताकी ने कहा कि, "हमारे सत्ता में आने से पहले, हर कोई अफगानिस्तान में हिंसा को समाप्त करने का आह्वान करता था। देखिए, हम अपने देश के पुनर्निर्माण और इसकी अर्थव्यवस्था को विकसित करने पर चर्चा कर रहे हैं...हम निवेश चाहते हैं"। गुरुवार को, मुत्ताकी ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी के साथ भी एक बैठक की, जिसके दौरान दोनों ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच "राजनीतिक, आर्थिक और मानवीय सहयोग" पर चर्चा की।












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