भारत संग संबंध बिगाड़ने के लिए ऋषि सुनक पर दबाव बना रही एंटी इंडिया लॉबी, खालिस्तानी आतंकी का कर रहे इस्तेमाल

भारत में मौत की सजा का सामना कर रहे एक ब्रिटिश नागरिक का मामला लंदन और दिल्ली के बीच खटास की एक बड़ी वजह बनता जा रहा है। ब्रिटेन में भारत विरोधी लॉबी लंबे समय से दोनों देशों के बीच संबंधों में जहर घोलने के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल कर रहे हैं।

इस वजह से यूके पीएम ऋषि सुनक पर दबाव बन रहा है कि वे खालिस्तानी आंदोलन को हवा देने में लिप्त जगतार सिंह उर्फ जग्गी जोहल को भारत की कैद से आजाद कराएं। जून 2022 में ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने जोहल की गिरफ्तारी को 'मनमाना' बताया था।

Jagtar Singh Johal issue

हालांकि अभी तक के डेढ़ साल के कार्यकाल में ऋषि सुनक इस मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर कुछ भी बोलने से बचते रहे हैं। आपको बता दें कि जग्गी जोहल को खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (KLF) द्वारा की हत्याओं में कथित भूमिका के आरोप में जोहल को 4 नवंबर 2017 को जालंधर से गिरफ्तार किया गया था।

भारत में हुआ गिरफ्तार

जगतार सिंह जोहल शादी करने के लिए भारत आया हुआ था इस दौरान उसे पकड़ लिया गया था। जग्गी मौजूदा समय में जोहल तिहाड़ जेल में बंद है। उस पर आरएसएस नेता ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) जगदीश गगनेजा समेत कई नेताओं की टारगेट किलिंग में शामिल होने का आरोप है।

NIA कर रही 8 मामलों में जांच

जग्गी के खिलाफ कुल 11 मामले दर्ज हैं, जिनमें से आठ की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है। इसके अलावा 2 मामले की जांच दिल्ली पुलिस और एक की जांच पंजाब पुलिस कर रही है।

जग्गी पर साजिश (धारा 120 बी भारतीय दंड संहिता), हत्या (धारा 302 आईपीसी), आतंकवादी कृत्य (धारा 16 गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम), हथियारों का उपयोग (धारा 27 शस्त्र अधिनियम), और प्रमुख लोगों को मारने के लिए किए गए कृत्य सहित कई धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

नहीं मिला पाया कोई ठोक सबूत

जग्गी के पक्ष के वकीलों का कहना है कि जगतार के खिलाफ अभी तक कोई सबूत पेश नहीं किया जा सका है। उस पर केवल आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक वह दोषी साबित नहीं हो जाता उसे बेकसूर समझ जाना चाहिए।

द संडे गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों का कहना है कि जगतार सिंह का मुद्दा दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों और स्थानीय अदालतों द्वारा दोषी ठहराए जाने के बावजूद यूनाइटेड किंगडम में छिपे भारतीय भगोड़ों की स्वदेश वापसी सहित कई द्विपक्षीय मुद्दों को प्रभावित कर रहा है।

110 से अधिक बार उठाया गया मुद्दा

अधिकारियों का कहना है कि ब्रिटिश मंत्रियों और अधिकारियों ने इस मामले को आधिकारिक तौर पर विभिन्न मंचों पर भारत सरकार साथ लगभग 110 बार उठाया है। सितंबर 2023 में दिल्ली में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिटेन के प्रधान मंत्री ऋषि सुनक ने भी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से बात की थी।

इसके बाद में ब्रिटेन के शीर्ष अधिकारियों ने 13 नवंबर को भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की थी और उनकी स्वदेश वापसी की मांग की थी। फरवरी 1987 में स्कॉटलैंड के डम्बर्टन में जन्मे जोहल की रिहाई कब तक होगी इसके बारे में अब तक भारत सरकार की कोई मंशा जाहिर नहीं हो पाई है।

ब्रिटिश एजेंसी ने दी थी सूचना

दिलचस्प बात यह है कि जग्गी की गिरफ्तारी में सबसे बड़ा हाथ ब्रिटिश एजेंसियों का ही है। सबसे पहले ब्रिटिश खुफिया एजेंसियां, एमआई5 और सीक्रेट इंटेलिजेंस सर्विस (SIS), जिन्हें आमतौर पर एमआई6 के नाम से जाना जाता है, ने LLF के लिए कथित तौर पर काम करने वाले जोहल के बारे में जानकारी जुटाई थी और इसे भारत सरकार के साथ साझा की थी।

हालांकि जग्गी जोहल के परिवार के सदस्यों और उनके वकीलों ने दावा किया है कि ऐसा कोई अकाट्य सबूत मौजूद नहीं है जो यह साबित कर सके कि वह केएलएफ का संचालक था। आपको बता दें कि KLF को को दिसंबर 2019 में यूएपीए के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया था।

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