पल भर शरीर से टपकने लगता है मांस, 850 डिग्री तक टेम्परेचर, Israel ने Lebanon पर छिड़का सफेद जहर!
Israel, Iran के अलावा Lebanon पर भी कहर बरपा रहा है। लेकिन युद्ध की आड़ में अब इजरायल पर अंतर्राष्ट्रीय नियमों की धज्जियां उड़ाने और Chemical Weapon (रसायनिक हथियार) का इस्तेमाल करने का आरोप लग रहा है। मानवाधिकार संगठन Human Rights Watch (HRW) ने अपनी नई रिपोर्ट में दावा किया है कि इस महीने की शुरुआत में Israel ने दक्षिणी Lebanon के रिहायशी इलाकों में सफेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया।
HRW के मुताबिक यह इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स लॉ का सीधा उल्लंघन है। सोमवार को जारी रिपोर्ट में संगठन ने 3 मार्च को Yohmor में एक रिहायशी इलाके पर दागे गए गोला-बारूद की सात तस्वीरों की पुष्टि की है। इन हमलों में कई घरों में आग लगने की घटनाएं भी सामने आईं।

HRW ने जताई गंभीर चिंता
HRW के लेबनान रिसर्चर Ramzi Kaiss ने कहा कि इजरायली सेना द्वारा रिहायशी इलाकों में सफेद फॉस्फोरस, जिसे आम भाषा में सफेद जहर भी कहा जाता है, उसका कथित अवैध इस्तेमाल बेहद खतरनाक है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के कैमिकल वेपन का नागरिकों पर बहुत गंभीर असर पड़ सकता है। उनके मुताबिक इसके ज्वलनशील प्रभाव से मौत या ऐसे खतरनाक जख्म हो सकते हैं, जिनसे पीड़ित लोगों को जीवन भर दर्द और परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
क्या होता है सफेद फॉस्फोरस?
सफेद फॉस्फोरस एक कैमिकल होता है। दिखने में यह सूखी मोम के जैसा होता है और कुछ हद तक इसकी बदबू जले हुए लहसुन जैसी लगती है। इसे कैमिकल के साथ प्रोटेक्ट करके रखा जाता है, लेकिन जैसे ही यह हवा के संपर्क में आता है तो आग पकड़ लेता है। कुछ ही पल में इसका तापमान 750 से 850 डिग्री तक पहुंच जाता है। वहीं, जो भी इसकी जद में आता है उसका मांस तक शरीर से टपकने लगता है। साथ ही इसके जलने में जो धुआं निकलता है अगर वह भी किसी मनुष्य या जानवर की नाक तक पहुंचा तो उसके फेंफड़ों को तुरंत खराब कर सकता है। यही कारण है कि लेबनान के कई घरों में अचानक आग लग गई।
योहमोर में नागरिक इलाकों पर हमले का दावा
HRW ने पाया कि योहमोर में ऐसे गोला-बारूद का इस्तेमाल उन इलाकों में किया गया जहां नागरिकों की मौजूदगी ज्यादा थी। इसके कारण कई घरों और नागरिक संपत्तियों में आग लग गई। संगठन ने 3 मार्च की सुबह लेबनानी मीडिया द्वारा ऑनलाइन पोस्ट की गई एक तस्वीर की भी पुष्टि की, जिसमें एक रिहायशी इलाके के ऊपर दो तोपखाने से दागे गए फॉस्फोरस गोले हवा में फटते दिखाई दे रहे थे।
अलग तोप के गोले की पहचान
रिपोर्ट में बताया गया कि इन विस्फोटों से उठने वाले धुएं का आकार M825-सीरीज़ के 155 मिमी तोपखाने के गोले से निकलने वाले सफेद फॉस्फोरस के धुएं जैसा था। HRW ने Islamic Health Committee की नागरिक सुरक्षा टीम द्वारा फेसबुक पर पोस्ट की गई तस्वीरों की भी पुष्टि की। इन तस्वीरों में कर्मचारी आग बुझाते हुए दिखाई दे रहे थे। HRW के मुताबिक यह आग संभवतः सफेद फॉस्फोरस से सने वेजेज की वजह से लगी थी, क्योंकि घटनास्थल के पास हवाई हमले हुए थे।
HRW ने की तत्काल रोक की मांग
रामज़ी कैस ने कहा कि इजरायल को तुरंत इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल बंद करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो देश इजरायल को सफेद फॉस्फोरस गोला-बारूद सहित हथियार मुहैया कराते हैं, उन्हें सैन्य सहायता और हथियारों की बिक्री तुरंत सस्पेंड करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह इजरायल पर रिहायशी इलाकों में ऐसे हथियारों का इस्तेमाल बंद करने के लिए दबाव बनाए।
लेबनान में बड़े पैमाने पर पलायन
रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल द्वारा जारी जबरन पलायन आदेशों के कारण लेबनान में 5 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। वहीं National News Agency ने सोमवार को बताया कि इजरायल ने Beirut के दक्षिणी छोटे शहरों वाले इलाकों में कई हवाई हमले किए। इनमें Ghobeiry, Haret Hreik के बीच का इलाका और Sfeir शामिल हैं। दूसरी तरफ इजरायल ने हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमला कर 394 लोगों की मौत का दावा किया है।
पहले भी हो चुका है ऐसा इस्तेमाल
संगठन ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि इजरायल ने अक्टूबर 2023 से मई 2024 के बीच दक्षिणी लेबनान के सीमावर्ती गांवों में भी सफेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया था। इस वजह से वहां रहने वाले नागरिकों को गंभीर स्वास्थ्य कारणों का सामना करना पड़ा और कई इलाकों में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई।
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