Israel-Iran War: ट्रंप ने इजरायल को भेजे 6500 टन हथियार, ईरान पर दोबारा हमले की तैयारी! क्या कहती रिपोर्ट?
Israel-Iran War: Israel के रक्षा मंत्री Israel Katz ने चेतावनी दी है कि अगर जरूरत पड़ी तो वेस्ट जेरूसलम को ईरान पर दोबारा हमले शुरू करने के लिए तैयार रहना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब इज़रायल ने कहा है कि पिछले 24 घंटों में अमेरिका ने उसे 6,500 टन गोला-बारूद और कई दूसरे मिलिट्री सामान भेजे हैं। इस मदद के पहुचने से ही दोबारा ईरान पर हमले के कयास तेज होने लगे हैं।
कौन-कौन से हथियार पहुंचे इजरायल?
इज़रायल के रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि देश के Ashdod Port और Haifa Port पर दो मालवाहक जहाज पहुंचे हैं। इन जहाजों में भारी मात्रा में सैन्य सामान लाया गया। इन जहाजों में हजारों हवाई और जमीनी गोला-बारूद, सैन्य ट्रक, Joint Light Tactical Vehicle (JLTVs) और दूसरे अहम सैन्य उपकरण शामिल थे। इज़रायल का कहना है कि इससे उसकी सैन्य क्षमता और मजबूत होगी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इन हथियारों और इक्विपमेंट्स को सैकड़ों ट्रकों पर लादकर पूरे देश में मौजूद Israel Defense Forces (IDF) के ठिकानों तक पहुंचाया गया।

फरवरी से अब तक कितना सामान मिला?
इज़रायल ने दावा किया कि 28 फरवरी को अमेरिका-इज़रायल द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद से अब तक उसे 403 एयरलिफ्ट और 10 सीलिफ्ट के जरिए कुल 115,600 टन से ज्यादा सैन्य इक्विपमेंट मिल चुके हैं। यह आंकड़ा अमेरिकी समर्थन के स्तर को दिखाता है।
दोबारा हमले की आहट!
इज़रायल का ये ऐलान उन मीडिया रिपोर्ट्स से मेल खाती है जिनमें दावा किया गया कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख Brad Cooper ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करने की योजना के बारे में जानकारी दी है।
ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस योजना का मकसद ईरान पर दबाव बढ़ाना है ताकि तेहरान एक ऐसा शांति समझौता मान ले जो अमेरिका और इज़रायल के लिए ज्यादा आसान हो। यानी सैन्य दबाव को कूटनीतिक सौदेबाजी के टूल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
लास्ट अटैक
Fox News के मुताबिक, ब्रैड कूपर ने इस योजना को तेहरान के खिलाफ "Last Attack" (अंतिम प्रहार) बताया है। इसमें ईरान की बची हुई सैन्य संपत्तियों, टॉप लीडरशिप और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने के लिए छोटे लेकिन बेहद शक्तिशाली हमलों की लहर शामिल हो सकती है।
लक्ष्य क्या होगा?
अगर यह योजना लागू होती है, तो मकसद ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना या पूरी तरह खत्म करना हो सकता है। इसका मतलब है कि एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड सेंटर, हथियार भंडार और सैन्य ठिकाने प्रमुख निशाने बन सकते हैं।
बातचीत वाला रास्ता कहां गया?
United States और Iran के बीच संकट का कूटनीतिक समाधान निकालने की कोशिशें अब तक सफल नहीं हो पाई हैं। बातचीत जारी है, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। इसीलिए बातचीत के रास्ते के अब मिल नहीं रहे। साथ ही, दोनों पक्षों के बीच सबसे बड़े विवाद Strait of Hormuz का कंट्रोल और ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम बने हुए हैं। यही दो मुद्दे समाधान में सबसे बड़ी रुकावट माने जा रहे हैं।
मार्च में इंटरसेप्टर की कमी, IDF ने क्या बताया था?
मार्च के मध्य में Semafor ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट किया था कि ईरान के जवाबी हमलों के बीच इज़रायल के एयर डिफेंस इंटरसेप्टर तेजी से कम हो रहे थे। हालांकि Israel Defense Forces ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया था और कहा था कि उसकी रक्षा क्षमता कमजोर नहीं हुई है।
कूटनीति का समर्थन, लेकिन सैन्य चेतावनी भी
रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज़ ने गुरुवार को कहा कि वेस्ट जेरूसलम, वाशिंगटन के कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करता है। लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि ईरान फिर खतरा न बने, जल्द दोबारा कार्रवाई करनी पड़ सकती है।
ईरान ने भी दिया सख्त जवाब
उसी दिन Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की एयरोस्पेस फोर्स के ब्रिगेडियर जनरल Seyed Majid Mousavi ने जवाबी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर फिर हमला हुआ तो तेहरान दर्दनाक, लंबे और दूरगामी हमलों से जवाब देगा।
पश्चिम एशिया में फिर बढ़ सकता है तनाव
दोनों तरफ से आई इन चेतावनियों ने साफ कर दिया है कि युद्धविराम के बावजूद हालात पूरी तरह शांत नहीं हैं। अगर बातचीत नाकाम रही, तो पश्चिम एशिया में फिर बड़ा सैन्य तनाव देखने को मिल सकता है।
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