Iran Political Crisis: ईरान में तख्तापलट की आहट? राष्ट्रपति-विदेश मंत्री के बीच 'जंग', आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

Iran Political Crisis: ईरान की राजनीति में इस समय जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। एक ओर अमेरिका के साथ तनाव चरम पर है, वहीं दूसरी ओर ईरान की सरकार के भीतर ही बड़ी फूट की खबरें आ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ विदेश मंत्री अब्बास अराघची की कार्यशैली से बेहद नाराज हैं।

अराघची पर आरोप है कि वे सरकार के बजाय रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के इशारों पर काम कर रहे हैं। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन अराघची की कुर्सी खतरे में नजर आ रही है।

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IRGC vs Pezeshkian: विदेश मंत्री पर मनमानी के आरोप

ब्रिटिश मीडिया आउटलेट 'ईरान इंटरनेशनल' की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर आरोप है कि वे मंत्रालय को राष्ट्रपति कार्यालय के प्रति जवाबदेह बनाने के बजाय स्वतंत्र रूप से चला रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि वे कैबिनेट की नीतियों को नजरअंदाज कर सीधे रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के निर्देशों का पालन कर रहे हैं। इस स्वायत्त कार्यशैली ने राष्ट्रपति पेजेशकियान को नाराज कर दिया है, क्योंकि विदेश नीति पर सरकार का नियंत्रण कमजोर होता दिख रहा है।

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Abbas Araghchi Vs Pezeshkian: राष्ट्रपति और सेना के बीच खींचतान

राष्ट्रपति पेजेशकियान का मानना है कि महत्वपूर्ण कूटनीतिक चर्चाओं के दौरान अराघची ने चुनी हुई सरकार के बजाय सेना (IRGC) का पक्ष लिया है। सूत्रों का कहना है कि अराघची कमांडर अहमद वाहिदी के 'करीबी' के तौर पर काम कर रहे हैं और राष्ट्रपति को अंधेरे में रखकर सैन्य रणनीतियां लागू कर रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि राष्ट्रपति ने साफ कर दिया है कि यदि अराघची ने अपना रवैया नहीं बदला, तो उन्हें पद से हटा दिया जाएगा।

संसद अध्यक्ष और सरकार में दरार

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ और सरकार के बीच भी मतभेद गहरे हो गए हैं। गालिबाफ ने बातचीत करने वाली टीम के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि जब उन्होंने परमाणु ऊर्जा से जुड़े मुद्दों को बातचीत में शामिल करने की कोशिश की, तो उन्हें कड़ी फटकार लगाई गई। स्पीकर के हटने के बाद विदेश मंत्री अराघची ने खुद कमान संभाली और इस्लामाबाद जाकर एक प्रस्ताव रखा, जिसे अमेरिका ने पूरी तरह खारिज कर दिया।

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नियुक्ति अधिकारों पर छिड़ा विवाद

रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला दावा यह भी किया गया है कि राष्ट्रपति पेजेशकियान से उनके कुछ अहम प्रशासनिक अधिकार छीन लिए गए हैं। विशेष रूप से जंग या संघर्ष में मारे गए सरकारी अधिकारियों की जगह नई नियुक्तियां करने का अधिकार अब राष्ट्रपति के पास नहीं रहा। इससे संकेत मिलते हैं कि ईरान के भीतर सत्ता के अलग-अलग केंद्रों में वर्चस्व की जंग चल रही है। तख्तापलट जैसी इन खबरों ने तेहरान की राजनीति में भारी हलचल पैदा कर दी है।

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