ईरान में इब्राहिम रईसी के राष्ट्रपति चुने जाने से इसराइल की बढ़ी टेंशन

इसराइल ने ईरान के निर्वाचित नए राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को तेहरान का कसाई कहा है. इसराइल के विदेश मंत्रालय ने ये टिप्पणी 1988 में हज़ारों राजनीतिक क़ैदियों की हत्याओं के संदर्भ में की है.

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इसराइल ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ईरान के नए राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के चुनाव पर गहरी चिंता करनी चाहिए. इसराइल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लियोर हाइयात ने कहा है कि रईसी अब तक ईरान के सबसे कट्टरपंथी राष्ट्रपति हैं. उन्होंने चेतावनी दी की नए नेता ईरान की परमाणु गतिविधियों को बढ़ावा देंगे. इब्राहिम रईसी को शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति चुनाव में विजेता घोषित किया गया है. कई लोगों का मानना है कि ईरानी चुनावों की दौड़ को इस तरह डिजाइन किया गया था कि उन्हें बढ़त हासिल थी. रईसी अगस्त में ईरान के राष्ट्रपति का पद संभालेंगे. वो ईरान के शीर्ष जज हैं और अति रूढ़िवादी विचारों के हैं. वो राजनीतिक क़ैदियों को मौत की सज़ा दिए जाने के फ़ैसलों से जुड़े रहे हैं और उन पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हैं. ईरान के सरकारी मीडिया में प्रसारित एक बयान में रईसी ने कहा है, 'मैं एक ईमानदार, मेहनती, क्रांतिकारी और भ्रष्टाचार विरोधी सरकार बनाऊंगा.' वहीं ट्विटर पर आलोचनात्मक टिप्पणी में लियोर हाइयात ने कहा है कि वो एक कट्टरपंथी व्यक्ति हैं जो ईरान के सैन्य परमाणु कार्यक्रम को तेज़ी से बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

ईरान की धमकी, नतांज़ परमाणु संयंत्र पर 'इसराइल' के हमले का बदला लिया जाएगा

https://twitter.com/LiorHaiat/status/1406304578912636928

ईरान और इसराइल के बीच लंबे समय से छद्म युद्ध चल रहा है. इसमें दोनों ही देशों ने एक दूसरे के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाइयां की हैं, लेकिन अभी तक दोनों ही देश पूर्णकालिक युद्ध से बचते रहे हैं. हालांकि, हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच तनाव बेहद बढ़ा हुआ है. दोनों देशों के बीच परिस्थिति बेहद जटिल है लेकिन तनाव की एक बड़ी वजह ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी है. ईरान ने पिछले साल हुई अपने शीर्ष परमाणु वैज्ञनिक की हत्या और इस साल अप्रैल में परमाणु संयंत्र पर हुए हादसे के लिए इसराइल को ज़िम्मेदार माना है.

वहीं इसराइल का मानना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए नहीं है. इसराइल मानता है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मक़सद परमाणु हथियार बनाना है. ईरान और पश्चिमी देशों के बीच 2015 में एक परमाणु समझौता हुआ था, जिसके बाद ईरान पर लगे सख़्त प्रतिबंध हटा लिए गए थे. हालांकि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2018 में अमेरिका को इस सौदे से बाहर कर लिया था और ईरान पर फिर से आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे. नए राष्ट्रपति जो बाइडन की सरकार अब फिर से समझौते में शामिल होने का रास्ता निकाल रही है.

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प्रतिबंध सख़्त किए जाने के बाद ईरान ने भी अपना परमाणु कार्यक्रम तेज़ कर दिया है. ईरान इस समय अपने अब तक के सर्वोच्च स्तर पर यूरेनियम संवर्धन कर रहा है. हालांकि ईरान अब भी परमाणु बम बनाने की क्षमता हासिल नहीं कर पाया है. ईरान के चुनावों पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका ने कहा है कि उसे अफ़सोस है कि ईरान के लोगों को अभी भी लोकतांत्रिक और निष्पक्ष तरीक़े से अपना नेता नहीं चुनने दिया जा रहा है.

ईरान के चुनावों में इस बार मतदान प्रतिशत बेहद कम रहा है. कुल पंजीकृत मतदादातों में से 50 फ़ीसदी से भी कम ने अपने वोट देने के अधिकार का प्रयोग किया.

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इससे पहले 2017 के चुनावों में 70 फ़ीसदी से अधिक मतदान हुआ था.

बहुत से लोगों ने चुनावों का बहिष्कार किया क्योंकि उनका मानना था कि चुनाव प्रक्रिया को रईसी को फ़ायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया है. रईसी ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह ख़ामेनई के बेहद क़रीबी हैं. रईसी जिस दिन ईरान के राष्ट्रपति बने, वियना में ईरान के परमाणु समझौते को बचाने के लिए बातचीत जारी थी. यूरोपीय संघ का कहना है कि रविवार को ईरान और दुनिया के 6 शक्तिशाली देशों के प्रतिनिधियों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर फिर से बातचीत होगी. ये ईरान और अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर छठी वार्ता है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक वार्ता में शामिल नेताओं का कहना है कि कुछ मुद्दों पर गतिरोध बरकरार है.

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तेहरान का कसाई

अपनी ट्विटर टिप्पणियों में हाइयात ने रईसी को तेहरान का कसाई कहा है. उन्होंने ये बयान 1988 में हज़ारों राजनीतिक क़ैदियों की हत्याओं के संदर्भ में दिया है. एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि रईसी उन चार जजों में शामिल थे, जिन्होंने पाँच हज़ार से अधिक राजनीतिक बंदियों को मौत की सज़ा दी थी. वहीं हाइयात ने अपने ट्वीट में दावा किया है कि इस दौरान तीस हज़ार लोग मारे गए थे. ईरान के मानवाधिकार कार्यकर्ता भी ये संख्या इतनी ही बताते हैं.

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दुनिया भर से कैसी प्रतिक्रिया मिल रही है?

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इब्राहिम रईसी को मुबारकबाद भेजा है. दोनों देशों के बीच पारंपरिक तौर पर अच्छे रिश्ते हैं. पुतिन ने मुबारकबाद में इन्हीं रिश्तों का उल्लेख किया है. सीरिया, इराक़, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं ने भी मुबारकबाद के संदेश भेजे हैं. ग़ज़ा में शासन चला रहे फ़लस्तीनी कट्टरपंथी समूह हमास के एक प्रवक्ता ने भी ईरान की संपन्नता की दुआ की है और रईसी को मुबारकबाद भेजा है. हालांकि मानवाधिकार समूहों का कहना है कि रईसी ने जो अत्याचार किए हैं उनकी जाँच होनी चाहिए. ह्यूमन राइट्स वॉच से जुड़े माइकल पेज ने कहा, ''ईरान की रूढ़िवादी न्यायपालिका के प्रमुख के तौर पर रईसी की देखरेख में ही ईरान के हालिया इतिहास के सबसे घृणित अपराध हुए हैं. उनकी जांच होनी चाहिए और ज़िम्मेदारी तय की जानी चाहिए ना कि उन्हें ऊंचे पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए.''

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