Israel Iran War: पाक के इशारे पर US ने डुबोया ईरानी शिप? अमेरिका ने कितना गलत किया Navy एक्सपर्ट से जानिए
Israel Iran War: अमेरिका इजरायल बनाम ईरान की लड़ाई के बीच भारत से लौट रहे ईरानी वॉरशिप IRIS DENA को अमेरिकी सबमरीन ने हमला कर डुबो दिया। जिसमें कई सारे ईरानी नौसैनिक मारे गए जबकि कई को बचा लिया गया। अब सवाल उठ रहे हैं कि अमेरिका कैसे भारत के इतने नजदीक हमला कर सकता है? क्या है वॉर क्राइम नहीं है? क्या भारत को युद्ध में घसीटने की कोशिश है? ऐसे ही कई और सवाल हैं। इसीलिए हमने इसको लेकर बातचीत की समुद्री मामलों के जानकार और नेवी के एक्सपर्ट लेफ्टिनेंट कमांडर (रिटायर्ड) अविनाश कुमार से। जानेंगे कि भारत की भूमिका कैसी रही और जो आरोप लग रहे हैं वह किस हद तक सही हैं।
सवाल- क्या पाकिस्तान के कहने पर किया गया हमला?
जवाब- 'सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान के कहने पर अमेरिका ने IRIS DENA को निशाना बनाया है। इस पर लेफ्टिनेंट कमांडर अविनाश कुमार कहते हैं कि पाकिस्तान इस हैसियत का देश नहीं है कि अमेरिका को कुछ निर्देश दे सके। ये बिना सिर पैर की बातें है जिनका कोई आधार नहीं है। इस बात की संभावना भी शून्य है। क्योंकि अमेरिका कभी भारत से जबरदस्ती का तनाव नहीं लेना चाहेगा।'

सवाल- युद्ध में नैतिकता की क्या भूमिका?
जवाब- लेफ्टिनेंट कमांडर कुमार कहते हैं कि 'युद्ध में नैतिकता की कोई खास भूमिका नहीं होती है, खासकर तब जब आपके निशाने पर ईरान के रिहायशी इलाके होते हैं। जब आपके निशाने पर टॉप लीडर्स से लेकर इन्फ्रास्ट्रक्चर है तक सब है तो फिर आप किसी भी वॉरशिप को कैसे छोड़ सकते हैं। ये वॉरशिप इजरायल-ईरान युद्ध में हिस्सा लेने ही जा रहा था, अमेरिका को जानकारी मिली- मौका मिला तो उन्होंने हमला कर दिया। हां, अगर अेमेरिका शुरुआत ही IRIS DENA पर हमले के साथ करता तो फिर ये बहस का मुद्दा होता कि आपने सबसे पहले निहत्थे जहाज को निशाना बनाया।' फिर भी नैतिकता की बात तो होगी।'

सवाल- श्रीलंका ने क्यों भेजी पहली मदद?
जवाब- 'IRIS DENA भारतीय समुद्री क्षेत्र से बाहर था और श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र से भी बाहर था, तकरीबन 40 नॉटिकल मील पर। जिसे इंटरनेशनल वॉटर कहते हैं। चूंकि श्रीलंका सबसे पास था तो उसने मदद भेजी। ऐसी स्थिति में अगर अमेरिका की सबमरीन भी डूबती तब भी श्रीलंका ही जाता क्योंकि वो पास में था। बाद में जिस तरह भारत ने दो शिप भेजी रेस्क्यू के लिए वो असली नैतिकता है और वो हमारा फर्ज भी था जिसे हमने अदा किया।'
सवाल- भारत की भूमिका कैसी रही?
जवाब- 'इस मामले में भारत को जबरन घसीटा जा रहा है, वो भारत का मेहमान था लेकिन वो जा चुका था। इस तरह की बयानबाजी सिर्फ और सिर्फ उकसाने के लिए है। असल में भारत की मेहमान नवाजी उस वक्त खत्म हो जाती है जब वह भारत के टेरिटरी छोड़ देता है। हां, अगर वो मदद मांगते तो शायद नैतिकता का सवाल किया जा सकता, लेकिन उसमें भी सिर्फ तकनीकि मदद हो सकती थी, न कि ईरान की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया जाता। अभी जिस तरह IRINS LAVAN ने डॉक की इजाजत मांगी तो हमने उन्हें कोची में डॉक (बंदरगाह पर खड़ा करना) किया।'
सवाल- ईरान से कहां गलती हुई?
जवाब- 'युद्ध के माहौल में यदि आपका कोई वॉरशिप किसी दूसरे देशी की सीमा में है या फिर इंटरनेशनल वॉटर में है, तो अमूमन उसे लेने के लिए एक बड़ा बेड़ा जाता है। ताकि उसकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सकती, खासकर तब जब आपको पता है कि उसके पास लड़ने के लिए पर्याप्त हथियार नहीं है। नेवी की भाषा में इस तरह के बिना हथियार वाले शिप टारगेट को सिटिंग डक कहते हैं और IRINS DENA ठीक वैसी ही सिटिंग डक थी।'
सवाल- अमेरिका ने ठीक किया या नहीं?
जवाब- 'सभी देशों को पता होता है कि जब किसी देश का कोई वॉरशिप किसी दूसरे देश में एक्सरसाइज के लिए जाता है, तो वह युद्ध स्तर की तैयारी के साथ नहीं जाता है। उसके पास राशन ज्यादा होगा पर हथियार सिर्फ लिमिटेड होते हैं। ये बात संभवत: अमेरिका को भी पता होगी। बावजूद इसके अमेरिका जैसी सुपर पावर का एक निहत्थे शिप पर हमला अशोभनीय है। लेकिन अमेरिका एक युद्ध में है और ऐसे में शोभा से ज्यादा दुश्मन को कमजोर करने पर फोकस होता है।'
सवाल- हमें शोक क्यों मनाना चाहिए?
जवाब- इस सवाल के जवाब में लेफ्टिनेंट कमांडर कुमार कहते हैं कि 'कई सारे नेवी ऑफिसरों ने अमेरिका द्वारा किए गए हमले पर दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर स्टोरी, स्टेटस लगाए हैं या फिर पोस्ट किए हैं। उसका कारण है कि वह चार दिनों तक उनके साथ प्रैक्टिस कर रहे थे, बात कर रहे थे, डाइनिंग टेबल शेयर कर रहे थे। इसलिए जाहिर सी बात हैं कि बहुत अच्छी मेमोरी दोनों के बीच में रही हैं। हमें बस उन लोगों के लिए बुरा लग रहा है जो चार दिन पहले तक हमारे साथ थे और अब हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन युद्ध में इस तरह के नुकसान होते ही हैं।'
समुद्री कानून क्या कहता है?
समुद्री कानून को लेकर भी इस घटना के बाद चर्चा तेज हो गई है। जेएस सोढ़ी ने समझाया कि ऐसे हमलों को सीधे तौर पर रोकने वाली कोई सार्वभौमिक अंतरराष्ट्रीय संधि नहीं है। समुद्री नियमों के अनुसार किसी भी देश का प्रादेशिक जल तट से 12 समुद्री मील तक होता है। इसके बाद 200 समुद्री मील तक एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) होता है और उसके बाद का हिस्सा अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र माना जाता है, जहां सभी देशों को आने-जाने की स्वतंत्रता होती है।
सवाल- क्या भारत किसी भी एंगल गलत है?
जवाब- 'भारत की भूमका किसी भी एंगल से गलत नहीं है। न हम किसी के साथ हैं और न किसी के खिलाफ। हमारे प्रधानमंत्री इस जंग की आलोचना कर चुके हैं। वहीं जब ईरान का जहाज डूबा तो हमने रेस्क्यू के लिए दो शिप भेजे हैं। अगर, वहां ईरान की जगह अमेरिकी शिप होता तब भी भारत मदद भेजता। इस युद्ध को छोड़ दें और आम दिनों में भी जब समुद्री लुटेरों के हमले होते हैं तब भी भारत दूसरे देशों के कार्गो शिप को रेस्क्यू करता है। हम कभी नहीं चाहते कि युद्ध हो लेकिन हमारा काम युद्ध होने पर लड़ने के अलावा शांति स्थापित करना भी होता है।'
अभ्यास के बाद कब हुआ हमला?
IRIS DENA 16 से 25 फरवरी तक भारत में आयोजित 'MILAN' नौसैनिक अभ्यास में शामिल था। अभ्यास खत्म होने के बाद जहाज बिना किसी सहायता की मांग किए वापस रवाना हो गया। बताया जाता है कि 28 फरवरी को अपने जलक्षेत्र की ओर जाते समय उस पर हमला हुआ।
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