GBU-57 क्या है, 'बंकर-बस्टर' बम जिसका इस्तेमाल अमेरिका ने ईरान की एयर स्ट्राइक में किया
Israel Iran War Update: इजरायल और ईरान के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों- फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर हवाई हमला किया है। आपको बता दें कि शनिवार, 21 जून को अमेरिका ने अपने अत्याधुनिक बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बमवर्षक विमानों को प्रशांत महासागर के गुआम द्वीप की ओर रवाना किया था, तभी लग रहा था कि कुछ बड़ा घटित होने वाला है और सुबह होते होते ही ट्रंप ने बड़ी सूचना दुनिया को दी।

बी-2 और GBU-57: ईरान के लिए खतरा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बमवर्षक अमेरिका का सबसे घातक और गुप्त हथियार माना जाता है, जो 30,000 पाउंड (13,600 किलोग्राम) वजनी GBU-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (MOP) बम ले जाने में सक्षम है। यह 'बंकर बस्टर' बम 200 फीट (61 मीटर) तक जमीन के नीचे घुसकर विस्फोट करने की क्षमता रखता है, जिसे विशेष रूप से गहरे भूमिगत लक्ष्यों, जैसे ईरान के फोर्डो परमाणु संयंत्र, को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि फोर्डो, जो कोम शहर के पास एक पहाड़ के नीचे 80-90 मीटर की गहराई में बना है, को नष्ट करने के लिए GBU-57 ही एकमात्र गैर-परमाणु हथियार है।
गुआम में तैनाती: रणनीतिक कदम या युद्ध की तैयारी?
रॉयटर्स के अनुसार, बी-2 बमवर्षक मिसूरी के व्हाइटमैन एयर फोर्स बेस से गुआम के लिए रवाना हुए हैं, साथ में चार बोइंग KC-46 पेगासस रिफ्यूलिंग विमान भी हैं। यह तैनाती मध्य पूर्व के तनाव से सीधे जुड़ी है या नहीं, इस पर अमेरिकी अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। एक अधिकारी ने कहा, 'अभी तक बमवर्षकों को गुआम से आगे ले जाने का कोई आदेश नहीं है।' हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि गुआम से डिएगो गार्सिया (हिंद महासागर में यूके-यूएस सैन्य अड्डा) की दूरी केवल 3,500 किलोमीटर है,जो मध्य पूर्व में ऑपरेशन के लिए आदर्श है।
पिछले महीने तक डिएगो गार्सिया पर छह बी-2 बमवर्षक तैनात थे, जिन्हें बाद में बी-52 बमवर्षकों से बदल दिया गया। गुआम की तैनाती को कई विश्लेषकों ने एक रणनीतिक संदेश के रूप में देखा है, खासकर तब जब इजरायल ने फोर्डो को निशाना बनाने की अपनी सीमाओं को स्वीकार किया है।
इजरायल-ईरान युद्ध: फोर्डो पर निशाना
इजरायल ने 13 जून से ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन राइजिंग लायन' शुरू किया, जिसमें ईरान के नतांज और इस्फहान जैसे परमाणु स्थलों पर हमले किए गए। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने बताया कि नतांज में सतह पर भारी नुकसान हुआ, लेकिन फोर्डो पर कोई क्षति नहीं हुई। फोर्डो की गहराई और मजबूती इसे इजरायल के मौजूदा हथियारों, जैसे GBU-28 या BLU-109, के लिए अभेद्य बनाती है।
इजरायल का दावा है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कगार पर है, जबकि ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फोर्डो को नष्ट करने को अपनी प्राथमिकता बताया है, लेकिन इसके लिए अमेरिकी सहायता जरूरी है।
ट्रंप का दो सप्ताह का अल्टीमेटम
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह दो सप्ताह के भीतर यह तय करेंगे कि क्या अमेरिका इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला करेगा। ट्रंप ने G7 समिट में कहा, 'ईरान इस जंग में जीत नहीं सकता। उसे बातचीत की मेज पर लौटना चाहिए।' हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर ईरान ने परमाणु हथियार बनाने की कोशिश की, तो वह 'ऐसा बमबारी देखेगा जैसा पहले कभी नहीं देखा।'
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने सोमवार को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के साथ फोर्डो पर हमले की संभावनाओं पर चर्चा की। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि सेना ट्रम्प के किसी भी फैसले को लागू करने के लिए तैयार है।
क्या है जोखिम और चुनौतियां?
विशेषज्ञों का कहना है कि GBU-57 फोर्डो को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन एक ही हमले से इसे पूरी तरह नष्ट करना मुश्किल है। कई हमले जरूरी हो सकते हैं, जिसमें एक ही स्थान पर कई बम गिराए जाएं। इसके अलावा, हमले से परमाणु रिसाव का खतरा भी है, जिसके बारे में IAEA ने चेतावनी दी है। राफेल ग्रॉसी ने कहा, 'परमाणु सुविधाओं पर हमला गंभीर परिणाम भुगत सकता है।'
आगे क्या होने वाला है?
बी-2 बमवर्षकों की गुआम तैनाती ने मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है। अगर ये विमान डिएगो गार्सिया या मध्य पूर्व के करीब किसी अड्डे पर जाते हैं, तो यह अमेरिका के युद्ध में शामिल होने का संकेत हो सकता है। हालांकि, ट्रंप की अनिश्चितता और कूटनीतिक समाधान की उम्मीद अभी बाकी है। क्या यह तैनाती केवल एक रणनीतिक संदेश है, या वास्तव में फोर्डो पर हमले की तैयारी? अगले दो सप्ताह इस सवाल का जवाब दे सकते हैं।
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