Iran Israel War: मौत के डर से बंकर में छिपे Khamenei! बेटे को कहां भेजा? उत्तराधिकारी की दौड़ में कौन-कौन?
Iran Israel War: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कथित तौर पर बंकर में छिपने की खबरें सामने आई हैं। इजरायल से मिल रही हत्या की धमकियों के बीच 86 वर्षीय अली खामेनेई (Ali Khamenei) ने अपने बेटे मोजतबा खामेनेई को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया है और तीन मौलवियों को अपने संभावित उत्तराधिकारी के रूप में नामित किया है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब इजरायल-ईरान युद्ध अपने दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। आखिर क्या है पूरा मामला और कौन हैं उत्तराधिकारी की दौड़ में शामिल नाम?

खामेनेई की बंकर में शरण, बेटा मोजतबा बाहर
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, तीन ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया कि खामेनेई, जो 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता हैं, इजरायल या अमेरिका द्वारा हत्या की आशंका से सतर्क हो गए हैं। इजरायल के हमलों में ईरान के कई शीर्ष सैन्य कमांडरों के मारे जाने के बाद खामेनेई ने अपनी सुरक्षा बढ़ा दी है।
ईरानी खुफिया मंत्रालय ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों और सैन्य कमांडरों को भूमिगत रहने और मोबाइल फोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक संचार साधनों का उपयोग बंद करने का आदेश दिया है। खामेनेई अब केवल एक विश्वसनीय सहयोगी के माध्यम से अपने कमांडरों से संपर्क कर रहे हैं।
कहां भेजा बेटे मोजतबा को?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, खामेनेई ने अपने बेटे मोजतबा को एक सुरक्षित स्थान पर भेज दिया है। पहले माना जा रहा था कि मोजतबा, जो रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के करीबी माने जाते हैं, खामेनेई के उत्तराधिकारी हो सकते हैं। हालांकि, नई जानकारी के अनुसार, मोजतबा को तीन संभावित उत्तराधिकारियों की सूची में शामिल नहीं किया गया है।
उत्तराधिकारी की दौड़ में तीन मौलवी
खामेनेई ने विशेषज्ञों की सभा (Assembly of Experts), जो ईरान के अगले सर्वोच्च नेता का चयन करती है, को तीन मौलवियों में से एक को उत्तराधिकारी चुनने का निर्देश दिया है। सामान्य परिस्थितियों में यह प्रक्रिया महीनों तक चलती है, जिसमें कई उम्मीदवारों पर विचार-विमर्श होता है। लेकिन युद्ध की स्थिति को देखते हुए खामेनेई एक त्वरित और नियंत्रित सत्ता हस्तांतरण चाहते हैं, ताकि इस्लामिक गणराज्य और उनकी विरासत सुरक्षित रहे।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के ईरान विशेषज्ञ प्रोफेसर वली नस्र के हवाले से कहा कि सर्वोच्च प्राथमिकता राज्य का संरक्षण है। यह सब गणनात्मक और व्यावहारिक है। हालांकि, रिपोर्ट में तीन मौलवियों के नामों का खुलासा नहीं किया गया है।
इजरायल-ईरान युद्ध का दूसरा सप्ताह
इजरायल-ईरान युद्ध अपने दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस्फहान के पास ईरानी परमाणु अनुसंधान केंद्र पर इजरायल के ताजा हमलों ने तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल पर 470 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें और करीब 1,000 ड्रोन दागे हैं, जिनमें 24 लोगों की मौत और हजारों घायल हुए हैं। इजरायल के शुरुआती हमलों में ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स, सशस्त्र बलों, और आपातकालीन कमांड के शीर्ष कमांडर मारे गए।
21 जून 2025 को इजरायल रक्षा बल (आईडीएफ) ने दावा किया कि उसने रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के फिलिस्तीनी डिवीजन के प्रमुख को मार गिराया, जो 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले का मुख्य साजिशकर्ता था।
खामेनेई को हत्या की धमकी
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 19 जून को कहा था कि उनका लक्ष्य ईरान की परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह ईरान में 'शासन परिवर्तन' के लिए परिस्थितियां बना सकते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब खामेनेई को निशाना बनाना है, तो उन्होंने कहा, 'कोई भी इससे अछूता नहीं है।'
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई की हत्या के विचार को वीटो कर दिया। ट्रंप ने 17 जून को कहा था कि उन्हें खामेनेई के ठिकाने का पता है, लेकिन उन्होंने अभी उन्हें निशाना बनाने से इनकार किया है। ट्रंप अगले दो सप्ताह में यह तय करेंगे कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर इजरायल के हमलों में अमेरिका शामिल होगा या नहीं।
ईरान में एकजुटता, लेकिन सुरक्षा उल्लंघन
ईरान के संसदीय अध्यक्ष के सलाहकार महदी मोहम्मदी ने इजरायल के हमलों का विश्लेषण करते हुए कहा कि हमारे पास एक बड़ा सुरक्षा और खुफिया उल्लंघन था। हमारे सभी वरिष्ठ कमांडरों की एक घंटे के भीतर हत्या कर दी गई। इसके बावजूद, सुधारवादी नेता मोहम्मद अली अबताही ने कहा कि इजरायल के हमलों ने ईरान में विभिन्न ताकतों को एकजुट कर दिया है। उन्होंने कहा, 'युद्ध ने हमारे बीच के मतभेदों को कम कर दिया है।'
क्या चाहते हैं खामेनेई?
86 वर्षीय खामेनेई अपनी हत्या की आशंका को 'शहादत' मानते हैं, लेकिन वह चाहते हैं कि उनकी मृत्यु के बाद सत्ता का हस्तांतरण सुचारू हो। युद्ध की स्थिति में उत्तराधिकार की गड़बड़ी से बचने के लिए उन्होंने त्वरित चयन प्रक्रिया शुरू की है।
20 जून की वार्ता विफल
20 जून यानी शुक्रवार को जिनेवा में यूरोपीय विदेश मंत्रियों और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रही। अराघची ने कहा कि वह बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन इजरायल के लगातार हमलों के बीच यह संभव नहीं है।
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