Israel Hezbollah War: इजराइल का हिजबुल्लाह पर बड़ा प्रहार, 3 आतंकी ढेर, ईरान ने अमेरिका को कहा 'समुद्री डकैत'

Israel Hezbollah War: इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच बढ़ती जंग ने मध्य पूर्व में भारी अस्थिरता पैदा कर दी है। एक तरफ जहां इजराइली सेना लेबनान में हवाई हमले तेज कर रही है, वहीं दूसरी तरफ ईरान और अमेरिका के बीच समुद्री विवाद गहरा गया है।

तेल बाजार में यूएई (UAE) के बड़े फैसले और लाल सागर में बढ़ते तनाव ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। हजारों की संख्या में हो रही मौतों और विस्थापन ने इस संघर्ष को एक गंभीर मानवीय संकट में बदल दिया है, जिसका असर अब सिर्फ इस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा।

Israel Hezbollah War

इजराइल की हिजबुल्लाह पर बड़ी कार्रवाई

इजराइली सेना (IDF) ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के तीन आतंकियों को मार गिराया है, जो इजराइली सैनिकों पर हमला करने की फिराक में थे। इस कार्रवाई के बाद इजराइल ने कई लेबनानी गांवों को खाली करने का आदेश दिया है, क्योंकि उसका दावा है कि हिजबुल्लाह इन रिहायशी इलाकों का इस्तेमाल हमलों के लिए कर रहा है। सीमा पर लगातार बढ़ती गोलीबारी और हवाई हमलों ने लेबनान में आम लोगों के लिए जीवन बेहद मुश्किल बना दिया है।

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ईरान ने अमेरिका पर लगाया 'पायरेसी' का आरोप

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में अमेरिका की कड़ी निंदा की है। ईरानी राजदूत अमीर सईद इरावानी ने अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी जहाजों को जब्त किए जाने को 'समुद्री डकैती' या 'पायरेसी' करार दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका अपने घरेलू कानूनों का हवाला देकर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अवैध कार्रवाई कर रहा है। वहीं कतर ने भी चेतावनी दी है कि समुद्री रास्तों को राजनीतिक सौदेबाजी के लिए इस्तेमाल करना वैश्विक व्यापार के लिए खतरनाक है।

जंग की भारी मानवीय कीमत

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक 2,500 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और हजारों घायल हैं। इस युद्ध की चपेट में सिर्फ लड़ाके ही नहीं, बल्कि इजराइली सैनिक, आम नागरिक और संयुक्त राष्ट्र के शांतिदूत (Peacekeepers) भी आ रहे हैं। मौतों का यह बढ़ता आंकड़ा इस क्षेत्र में भीषण मानवीय संकट की ओर इशारा कर रहा है। अगर युद्ध जल्द नहीं रुका, तो विस्थापन और तबाही का मंजर और भयावह हो सकता है।

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तेल बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर

ऊर्जा की दुनिया से एक चौंकाने वाली खबर आई है कि यूएई (UAE) 1 मई को तेल उत्पादक देशों के संगठन 'ओपेक' (OPEC) से अलग हो जाएगा। यूएई अब स्वतंत्र रूप से तेल उत्पादन करना चाहता है। जानकारों का मानना है कि ओपेक के कमजोर होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आ सकता है। 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में तनाव और यूएई के इस फैसले ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है।

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