Gaza के बच्चों को अचानक क्या हुआ? क्यों 'पत्थर' बन गए मासूम, खो दी अपनी आवाज!

Gaza Children losing Speech: फिलिस्‍तीन के गाजा पट्टी पर बसे गाजा शहरी की ज़मीन पर जारी लगातार हमलों की गूंज अब सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मासूम बच्‍चों की जिंदगी में गहरे जख्म छोड़ रही है। हर धमाके के साथ उनका बचपन बिखर रहा है-कहीं खेलते हाथ खामोश हो गए हैं, तो कहीं बोलती आवाजें सिसकियों में बदल गई हैं। ये बच्चे सिर्फ युद्ध के दर्शक नहीं, बल्कि उसके सबसे नाजुक शिकार बन चुके हैं, जिनकी खामोशी दुनिया के लिए एक दर्दनाक सवाल बनकर खड़ी है।

गाजा के हमाद अस्पताल के डॉक्टरों ने ऐसी ही गंभीर समस्‍या का खुलासा किया है। गाजा में बच्चों में बोलने की शक्ति खोने के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। रातों-रात बोलने की शक्ति जाने वजह इजरायल और हमास के बीच जारी संघर्ष है।

Gaza Children losing Speech

डाक्‍टर ने दी चेतावनी

एचटी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गाजा के हमाद अस्पताल के स्पीच डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉ. मूसा अल-खोरती ने चेतावनी दी कि ये बच्‍चों में ये समस्‍या बस कुछ समय के लिए नही हैं कुछ बच्चे तो अपनी बोलने की क्षमता पूरी तरह से खो सकते हैं।

'पत्थर' बन गए मासूम, खो दी अपनी आवाज!

कई सालों से गाजा पट्टी पर चल रहे इस संघर्ष ने बड़ी संख्या में बच्चों को अपनी चपेट में लिया है। ये मासूम न केवल शारीरिक चोटों, बल्कि गहरे मानसिक आघात का भी शिकार हो रहे हैं, जिसके चलते वे बोल तक नहीं पा रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि गाजा में जारी हिंसा का सबसे दर्दनाक असर अब बच्चों की आवाज पर दिख रहा है। ऐसे मूक हो चुके बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इजरायल गाजा में हमास के लड़ाकों को निशाना बनाने का दावा करता है, लेकिन भारी बमबारी की चपेट में आम लोग भी आ रहे हैं, जिससे कई इलाके मलबे के ढेर में बदल गए हैं।

सदमे ने छीन ली बच्चों की आवाज

डॉक्टरों के मुताबिक, कई बच्चे अत्यधिक मानसिक आघात के चलते सेलेक्टिव म्यूटिज्म या हिस्टेरिकल एफोनिया जैसी स्थितियों का शिकार हो रहे हैं, जिनमें बिना किसी शारीरिक कारण के उनकी बोलने की क्षमता अचानक खत्म हो जाती है। अक्सर यह देखा गया है कि हिंसा, धमाकों या चोट के बाद बच्चे अचानक खामोश हो जाते हैं-मानो उनका मन ही बोलने से इंकार कर देता हो।

बच्‍चा सोकर उठा, तो उसकी आवाज हमेशा के लिए हुई खामोश

पांच साल के जाद का मामला इसी त्रासदी को बयां करता है। उसकी मां बताती हैं कि वह पहले सामान्य रूप से बोलता था, लेकिन घर के पास हुई बमबारी के बाद जब वह सोकर उठा, तो उसकी आवाज हमेशा के लिए खामोश हो चुकी थी। इसी तरह चार साल की लुसीन ताम्बोरा ने भी अपनी आवाज खो दी, जब एक हवाई हमले में क्षतिग्रस्त सीढ़ी से गिरकर वह गंभीर रूप से घायल हो गई। ये घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि मानसिक और शारीरिक दोनों तरह के झटके बच्चों पर गहरा असर डाल रहे हैं।

'खामोश पीड़ा' का बढ़ता दायरा

रिपोर्ट्स के अनुसार, लगातार बमबारी के कारण कई बच्चों को सिर की चोटों और ब्लास्ट ट्रॉमा जैसी शारीरिक समस्याएं भी झेलनी पड़ी हैं। 'डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' के साथ काम कर चुकी बाल मनोचिकित्सक कैट्रिन ग्लैट्ज ब्रुबैक इस स्थिति को "खामोश पीड़ा" बताती हैं-एक ऐसा दर्द जो दिखता नहीं, लेकिन भीतर से बच्चों को तोड़ देता है। उनके अनुसार, कई बच्चे इतने गहरे सदमे में होते हैं कि बिना किसी स्पष्ट मेडिकल कारण के बोलना बंद कर देते हैं।

ब्रुबैक बताती हैं कि जिन बच्चों ने अपने परिजनों को खोया, मौत को करीब से देखा या बार-बार हिंसा का सामना किया, उनके लिए यह चुप्पी एक तरह का बचाव बन जाती है। ऐसी स्थिति में शरीर 'फ्रीज रिस्पॉन्स' में चला जाता है-एक अचेतन रक्षा तंत्र, जिसमें बच्चा बाहरी दुनिया से लगभग कट जाता है।

डॉक्टरों की चेतावनी है कि यदि इन बच्चों को समय पर और लगातार मनोवैज्ञानिक सहायता नहीं मिली, तो इसका असर उनके मानसिक और भावनात्मक विकास पर लंबे समय तक पड़ सकता है। यह सिर्फ वर्तमान का संकट नहीं, बल्कि एक ऐसी खामोशी है जो आने वाले भविष्य को भी प्रभावित कर सकती है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+