Israel Election: 27 अक्टूबर को इजरायल में आम चुनाव, नेतन्याहू के करियर का सबसे कठिन इम्तिहान क्यों?

Israel General Election: इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को आम चुनाव होंगे और इसे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक करियर का सबसे कठिन चुनाव माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में गाजा, हमास, हिजबुल्लाह और ईरान के साथ जारी संघर्ष ने देश की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है।

एक तरफ नेतन्याहू खुद को राष्ट्रीय सुरक्षा का मजबूत नेता बता रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष और जनता का एक बड़ा वर्ग उनसे कई सवाल पूछ रहा है। सुरक्षा चूक, युद्ध की रणनीति, सेना में भर्ती, भ्रष्टाचार के मामले और गाजा का भविष्य ऐसे मुद्दे हैं, जो इस चुनाव में उनकी किस्मत तय कर सकते हैं।

Israel General Election

युद्ध की रणनीति पर जनता देगी फैसला

गाजा, हमास, हिजबुल्लाह और ईरान के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा होगी। नेतन्याहू इसे देश की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताते हैं, लेकिन आलोचकों का कहना है कि लंबे युद्ध से इजरायल को भारी नुकसान भी हुआ है। कई सर्वे बताते हैं कि युद्ध के बाद प्रधानमंत्री की लोकप्रियता में गिरावट आई है। ऐसे में मतदाता तय करेंगे कि उनकी सुरक्षा नीति सफल रही या नहीं।

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7 अक्टूबर की सुरक्षा चूक अब भी बड़ा सवाल

7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले को इजरायल के इतिहास की सबसे बड़ी सुरक्षा विफलताओं में गिना जाता है। विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि सरकार समय रहते खतरे को नहीं समझ सकी। इस घटना में बड़ी संख्या में लोगों की मौत और बंधक बनाए जाने से जनता में नाराजगी पैदा हुई। चुनाव के दौरान यह मुद्दा फिर से जोर पकड़ सकता है और विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल करेगा।

सेना में भर्ती को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद

इजरायल में लंबे समय से अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदियों को सेना में अनिवार्य सेवा से छूट मिलती रही है। अब लगातार युद्ध की वजह से सेना पर दबाव बढ़ा है और अधिक सैनिकों की जरूरत महसूस की जा रही है। सेना और समाज का एक बड़ा वर्ग चाहता है कि सभी नागरिकों के लिए समान नियम हों। वहीं नेतन्याहू के सहयोगी इस छूट को जारी रखने के पक्ष में हैं। यह विवाद चुनावी राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।

भ्रष्टाचार के आरोप और न्यायिक सुधार भी चुनौती

नेतन्याहू पहले से ही भ्रष्टाचार के कई मामलों का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा उनकी सरकार के न्यायिक सुधारों को लेकर भी देशभर में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए थे। विपक्ष का आरोप है कि सरकार अदालतों की शक्तियां कम करना चाहती है, जबकि सरकार इसे न्याय व्यवस्था में सुधार बताती है। चुनाव में यह मुद्दा फिर सामने आ सकता है और मतदाता तय करेंगे कि वे सरकार की दलीलों से सहमत हैं या नहीं।

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नेतन्याहू की राजनीतिक परीक्षा

युद्ध के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि गाजा का प्रशासन कौन चलाएगा और वहां स्थायी शांति कैसे स्थापित होगी। इस मुद्दे पर अब तक स्पष्ट समाधान सामने नहीं आया है। नेतन्याहू का कहना है कि नई सरकार इजरायल की सुरक्षा और क्षेत्रीय हितों को मजबूत करेगी। वहीं विपक्ष का मानना है कि केवल सैन्य कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसलिए 27 अक्टूबर का चुनाव नेतन्याहू के भविष्य के साथ-साथ इजरायल की आगे की रणनीति भी तय करेगा।

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