India Vs Turkiye: भारत-इजरायल-फ्रांस की तिकड़ी से घबराया तुर्किये, धमकी देने पर उतरे एर्दोगन, क्या है वजह?
India Vs Turkiye: तुर्किये के पास वाले समुंदर यानी पूर्वी भूमध्य सागर (Eastern Mediterranean) में इन भारत, इजरायल और फ्रांस मिलकर कुछ ऐसा कर रहे हैं जिससे तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोगन का ब्लड प्रेशन हर बीतते पल के साथ बढ़ रहा है। चिंगारी इस हद तक लग चुकी है कि तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन को खुलकर चेतावनी देनी पड़ी है।
अंकारा में अपनी पार्टी की संसदीय बैठक को संबोधित करते हुए एर्दोगन ने कहा कि तुर्किये अपनी संप्रभुता और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि साइप्रस क्षेत्र में जानबूझकर तनाव पैदा करने की कोशिश की जा रही है और तुर्किये ऐसे किसी भी कदम को स्वीकार नहीं करेगा।

साइप्रस को लेकर तुर्किये क्यों हुआ नाराज?
राष्ट्रपति एर्दोगन का कहना है कि कुछ देश मिलकर साइप्रस के मुद्दे को लेकर तुर्किये पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि तुर्किये साइप्रस में रहने वाले तुर्क समुदाय के अधिकारों की रक्षा करेगा और उसकी सेना क्षेत्र में होने वाली हर गतिविधि पर करीबी नजर रख रही है। तुर्किये लंबे समय से उत्तरी साइप्रस को अपना इफेक्टिव एरिया मानता है। ऐसे में किसी भी नए सैन्य या कूटनीतिक गठबंधन को वह अपने हितों के खिलाफ मान रहा है।
भारत की नई रणनीति ने बढ़ाई तुर्किये की परेशानी
पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान और तुर्किये के रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं। दोनों देश रक्षा और कूटनीतिक मामलों में लगातार एक-दूसरे का समर्थन करते रहे हैं। इसी के जवाब में भारत ने भी अपनी रणनीति बदल दी है। नई दिल्ली ने ग्रीस, साइप्रस और आर्मेनिया के साथ अपने संबंधों को तेजी से मजबूत किया है। इस नई साझेदारी को कई विश्लेषक भारत की "रणनीतिक घेराबंदी नीति" के रूप में देख रहे हैं। तुर्किये को सबसे ज्यादा चिंता इसी बात की है कि उसके पारंपरिक विरोधी देशों के साथ भारत का सहयोग लगातार बढ़ रहा है। साथ ही, तुर्किये को ये डर भी सता रहा है कि कहीं वो ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान का साथ और भारत की खिलाफत करने की कीमत तो नहीं चुकाएगा?
ब्रह्मोस मिसाइल बनी तुर्किये की सबसे बड़ी चिंता
आर्मेनिया पहले ही भारत से पिनाका मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और कई आधुनिक सैन्य रडार खरीद चुका है। अब ग्रीस, साइप्रस और आर्मेनिया ने भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस खरीदने में भी इंटरस्ट दिखाई है। अगर इन देशों को ब्रह्मोस मिलती है तो तुर्किये के लिए सैन्य चुनौती काफी बढ़ सकती है। ब्रह्मोस को दुनिया की सबसे तेज और सटीक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है।
साइप्रस की भारत यात्रा ने बढ़ाई हलचल
पिछले महीने साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर आए थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और साइप्रस नेतृत्व के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति बनी। रिपोर्ट्स के मुताबिक साइप्रस न सिर्फ ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहा है, बल्कि भारत के नागास्त्र-1 और स्काईस्ट्राइकर जैसे आधुनिक आत्मघाती ड्रोन में भी रुचि रखता है। यह डिफेंस इंटरस्ट तुर्किये के लिए चिंता का विषय बन गया है।
तुर्किये के डिफेंस एक्सपर्ट्स क्या बोले?
तुर्किये के जाने-माने डिफेंस एक्सपर्ट रऊफ कोसे ने इस पूरे मामले पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा-
"भारत और इजरायल मिलकर साइप्रस को हथियार देकर तुर्किये को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। इसके जवाब में तुर्किये को पाकिस्तान के साथ अपने सहयोग को और बढ़ाना चाहिए ताकि इस गठबंधन का मुकाबला किया जा सके।"उनकी यह टिप्पणी तुर्किये में बढ़ती बेचैनी को साफ दिखाती है।
इजरायल की गतिविधियों से भी बढ़ा तनाव
तुर्किये सिर्फ भारत को लेकर ही चिंतित नहीं है। इजरायल की बढ़ती सैन्य गतिविधियां भी अंकारा को परेशान कर रही हैं। लेबनान में इजरायली सैनिकों की मौजूदगी और सीरिया के पास उनकी बढ़ती सैन्य सक्रियता को तुर्किये अपनी सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में देख रहा है। एर्दोगन ने कहा कि दमिश्क, अलेप्पो और बेरूत जैसे शहर ऐतिहासिक रूप से तुर्किये से जुड़े रहे हैं। इसलिए तुर्किये इन क्षेत्रों में होने वाले घटनाक्रमों को नजरअंदाज नहीं कर सकता।
फ्रांस-साइप्रस रक्षा समझौते से भड़का अंकारा
तुर्किये की नाराजगी की एक और वजह फ्रांस और साइप्रस के बीच हुआ नया सुरक्षा बलों की स्थिति समझौता (SOFA) है। इस समझौते के तहत फ्रांसीसी सैन्य बलों को साइप्रस के सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करने की इजाजत मिल गई है। तुर्किये का कहना है कि यह कदम इलाके के पावर बैलेंस को बिगाड़ सकता है और पूर्वी भूमध्य सागर में तनाव को और बढ़ा सकता है।
इंटरनेशनल लॉ की दुहाई दे रहा तुर्किये
तुर्किये के रक्षा मंत्रालय ने इस समझौते को 1960 की ऐतिहासिक संधियों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। अंकारा का मानना है कि यूरोपीय देशों की बढ़ती सैन्य मौजूदगी से क्षेत्र में अस्थिरता पैदा हो सकती है और इसके दूरगामी रणनीतिक परिणाम सामने आ सकते हैं।
साइप्रस विवाद का पुराना इतिहास
तुर्किये और साइप्रस के बीच विवाद नया नहीं है। साल 1974 में तुर्किये ने साइप्रस के लगभग एक-तिहाई हिस्से पर कब्जा कर लिया था। तुर्किये इस क्षेत्र को "उत्तरी साइप्रस" कहता है, जबकि अधिकांश देश इसे अलग राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं देते। यही विवाद आज भी दोनों देशों के बीच तनाव की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है।
भारत का बढ़ता प्रभाव और तुर्किये की चिंता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साइप्रस यात्रा और भारत की बढ़ती क्षेत्रीय सक्रियता ने इस पूरे मामले को मजबूती से आगे बढ़ाया है। भारत, फ्रांस और इजरायल की बढ़ती साझेदारी ने तुर्किये को कूटनीतिक रूप से दबाव में ला दिया है। इसके जवाब में तुर्किये पाकिस्तान के साथ अपने रक्षा और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि पूर्वी भूमध्य सागर में बन रहा यह नया शक्ति संतुलन क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा पर कितना बड़ा प्रभाव डालता है।
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