Bhagwan Vishnu Chalisa : एकादशी पर करें विष्णु चालीसा का पाठ, खुलेंगे भाग्य के द्वार
Bhagwan Vishnu Chalisa : भगवान विष्णु की उपासना सनातन धर्म में अत्यंत शुभ मानी जाती है। विष्णु चालीसा का पाठ करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आने की मान्यता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार हैं और वे अपने भक्तों की सभी बाधाओं को दूर करते हैं।

॥ दोहा॥
- विष्णु सुनिए विनय
- सेवक की चितलाय ।
- कीरत कुछ वर्णन करूं
- दीजै ज्ञान बताय ॥
चौपाई
- नमो विष्णु भगवान खरारी,
- कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
- प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी,
- त्रिभुवन फैल रही उजियारी ॥
- सुन्दर रूप मनोहर सूरत,
- सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
- तन पर पीताम्बर अति सोहत,
- बैजन्ती माला मन मोहत ॥
- शंख चक्र कर गदा विराजे,
- देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
- सत्य धर्म मद लोभ न गाजे,
- काम क्रोध मद लोभ न छाजे ॥
- सन्तभक्त सज्जन मनरंजन,
- दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
- सुख उपजाय कष्ट सब भंजन,
- दोष मिटाय करत जन सज्जन ॥
- पाप काट भव सिन्धु उतारण,
- कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
- करत अनेक रूप प्रभु धारण,
- केवल आप भक्ति के कारण ॥
- धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा,
- तब तुम रूप राम का धारा ।
- भार उतार असुर दल मारा,
- रावण आदिक को संहारा ॥
- आप वाराह रूप बनाया,
- हिरण्याक्ष को मार गिराया ।
- धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया,
- चौदह रतनन को निकलाया ॥
- अमिलख असुरन द्वन्द मचाया,
- रूप मोहनी आप दिखाया ।
- देवन को अमृत पान कराया,
- असुरन को छवि से बहलाया ॥
- कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया,
- मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
- शंकर का तुम फन्द छुड़ाया,
- भस्मासुर को रूप दिखाया ॥
- वेदन को जब असुर डुबाया,
- कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
- मोहित बनकर खलहि नचाया,
- उसही कर से भस्म कराया ॥
- असुर जलन्धर अति बलदाई,
- शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।
- हार पार शिव सकल बनाई,
- कीन सती से छल खल जाई ॥
- सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी,
- बतलाई सब विपत कहानी ।
- तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी,
- वृन्दा की सब सुरति भुलानी ॥
- देखत तीन दनुज शैतानी,
- वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।
- हो स्पर्श धर्म क्षति मानी,
- हना असुर उर शिव शैतानी ॥
- तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे,
- हिरणाकुश आदिक खल मारे ।
- गणिका और अजामिल तारे,
- बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे ॥
- हरहु सकल संताप हमारे,
- कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।
- देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे,
- दीन बन्धु भक्तन हितकारे ॥
- चाहता आपका सेवक दर्शन,
- करहु दया अपनी मधुसूदन ।
- जानूं नहीं योग्य जब पूजन,
- होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ॥
- शीलदया सन्तोष सुलक्षण,
- विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।
- करहुं आपका किस विधि पूजन,
- कुमति विलोक होत दुख भीषण ॥
- करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण,
- कौन भांति मैं करहु समर्पण ।
- सुर मुनि करत सदा सेवकाई,
- हर्षित रहत परम गति पाई ॥
- दीन दुखिन पर सदा सहाई,
- निज जन जान लेव अपनाई ।
- पाप दोष संताप नशाओ,
- भव बन्धन से मुक्त कराओ ॥
- सुत सम्पति दे सुख उपजाओ,
- निज चरनन का दास बनाओ ।
- निगम सदा ये विनय सुनावै,
- पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै ॥
- ॥ इति श्री विष्णु चालीसा ॥
विष्णु चालीसा पढ़ने से क्या लाभ होते हैं?
विष्णु चालीसा का पाठ करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। मानसिक तनाव और भय दूर होता है।आर्थिक परेशानियों से राहत मिलने की मान्यता है।दांपत्य जीवन में मधुरता आती है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए भी विष्णु उपासना लाभकारी मानी जाती है। विशेष रूप से गुरुवार, एकादशी और वैकुंठ एकादशी के दिन विष्णु चालीसा का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है।
विष्णु चालीसा पाठ विधि
प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ पीले या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।घी का दीपक जलाकर धूप-अगरबत्ती अर्पित करें। तुलसी दल, पीले फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।
विष्णु चालीसा FAQ
विष्णु चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?
गुरुवार, एकादशी और सुबह ब्रह्म मुहूर्त में पाठ करना सबसे शुभ माना जाता है।
क्या महिलाएं विष्णु चालीसा का पाठ कर सकती हैं?
हां, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धा से इसका पाठ कर सकते हैं।
विष्णु चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?
प्रतिदिन एक बार या गुरुवार को विशेष रूप से पाठ करना लाभकारी माना जाता है।
विष्णु चालीसा पढ़ने से क्या फल मिलता है?
मान्यता है कि इससे सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
क्या विष्णु चालीसा के साथ विष्णु मंत्र जप करना जरूरी है?
जरूरी नहीं, लेकिन "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करने से पूजा अधिक फलदायी मानी जाती है।
विष्णु चालीसा में तुलसी का क्या महत्व है?
तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती है, इसलिए पूजा में तुलसी दल अर्पित करना शुभ होता है।














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