Explained: क्या इजराइल के अंत की शुरूआत हो गई है? जिद्दी प्रधानमंत्री देश को विनाश में झोंकने वाला है?

Israel News: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू 'हत्या' को युद्ध का एक हथियार और देश के अस्तित्व की रक्षा के लिए एक आवश्यक तत्व मानते हैं।

करीब एक साल पहले तक इस सवाल का मजाक उड़ाया जाता था, लेकिन गाजा में पिछले कई महीनों से चल रहे युद्ध ने ऑब्जर्वर्स को इस सवाल को मानने के लिए मजबूर किया है। इजराइल के जिद्दी प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, हमास को हराने और बंधकों को रिहा करने के असंभव दोहरे लक्ष्य को लेकर अड़े हुए हैं, और अपने जिद को शांत करने के लिए ऐसे ऐसे फैसले ले रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध अवश्यंभावी लगने लगा है।

Israel News

लेकिन, दिक्कत ये है कि इजराइल में अंदरूनी कलह भी चल रहा है और अगर इन दोनों को मिला दें, तो एक घातक कॉकटेल तैयार होता है, जो इस आशंका को जन्म देने की क्षमता रखता है, कि कहीं ये इजराइल के अस्तित्व को ही खत्म ना कर दे।

क्या नेतन्याहू बन जाएंगे इजराइल के विनाश का कारण?

अवार्ड विनर यहूदी लेखक हॉवर्ड जैकबसन ने बेंजामिन नेतन्याहू को "लगातार युद्ध में लगा रहने वाला एक शैतानी बच्चा कहा है, जो एक हताश स्थिति में है, और जो न्याय और बदले के बीच का अंतर नहीं जानता है और हताशा में आकर तर्कहीन चीजें करता है।"

उन्होंने उदाहरण के तौर पर हमास के पॉलिटिकल विंग के नेता इस्माइल हानिया की हत्या का जिक्र किया है, जिसे मारने का आरोप इजराइल पर लगा है और सोमवार को ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने फिर से धमकी दी है, कि ईरान इस हत्या का मजबूती से जवाब देगा। यानि, ईरान फिर से प्रतिक्रिया देने वाला है, जिसमें लेबनान में मौजूद हिज़्बुल्लाह, यमन में हूती विद्रोही और इराक और सीरिया में मौजूद अलग अलग मिलिशिया समूह समर्थन कर सकते हैं। जो पूरे क्षेत्र को एक भयावह युद्ध में खींच सकता है और जिसके बेहद खतरनाक परिणाम हो सकते हैं।

दूसरी तरफ, इस्माइल हानिया, हमास के कट्टर नेताओं की तुलना में उदारवादी और व्यावहारिक नेता था। और गाजा में युद्ध विराम को संभव बनाने के लिए कूटनीतिक कोशिशों में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो गई थी, लेकिन अब उसकी मौत के बाद शांति को लेकर वार्ता होना ही काफी मुश्किल हो गई है।

Israel News

कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने कहा है, कि "जब एक पक्ष, दूसरे पक्ष के वार्ताकार की हत्या कर देता है तो मध्यस्थता कैसे सफल हो सकती है।"?

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के तहानी मुस्तफा ने सहमति जताई और कहा, कि "वह केवल एक राजनयिक नहीं थे, बल्कि वह व्यक्ति थे, जो इस बात पर विचार करने के लिए तैयार थे कि इजरायल के साथ सुलह और कूटनीति ही सही रास्ता है। जितना ज्यादा आप उदारवादियों की हत्या करते हैं, या उनसे छुटकारा पाते हैं, उतने ही ज्यादा कट्टरपंथी सामने आते हैं, या आप उदारवादियों को कट्टरपंथी में बदल देते हैं। यह सोचना कि ऐसा कुछ हमास को घुटने टेकने पर मजबूर कर देगा, या फिर आंदोलन को उदार बना देगा, एक गंभीर गलतफहमी है"।

इजराइल ने 14 नेताओं को उतारा मौत के घाट

इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक, इजराइल ने लेबनान, सीरिया, गाजा और अब ईरान में कम से कम 14 अरब सैन्य और नागरिक नेताओं की हत्या की है, जो बेंजामिन नेतन्याहू की सिर काटने की नीति को दर्शाता है।

इन हत्याओं ने इस क्षेत्र को एक बड़े युद्ध की तरफ धकेल दिया है, एक ऐसा युद्ध जिसे इजराइल अंततः जीत नहीं सकता। ईरान में इस्लामवादी कट्टरपंथी और अरब दुनिया भर के सैन्य समूह अब इस बात को लेकर सहमत होने लगे हैं, इजराइल राज्य एक ऐसा खतरा है, जिसे हर कीमत पर नष्ट किया जाना चाहिए। हालांकि, उनके पास इजराइल से टकराने की ताकत नहीं है, लेकिन कम से कम वो इरादा तो रखते ही हैं।

लेकिन अपनी नौकरी बचाने और भ्रष्टाचार के लिए जेल जाने से बचने के लिए संघर्ष कर रहे नेतन्याहू चीजों को अलग तरह से देखते हैं।

तीन बार इजरायल के प्रधानमंत्री रहे नेतन्याहू हत्याओं को युद्ध का हथियार मानते हैं और देश के अस्तित्व के लिए इसे जरूरी मानते हैं। उनका तर्क है, कि किसी भी समस्या का जवाब चरम हिंसा है, उन्होंने दावा किया कि उग्रवादियों और नागरिकों, दोनों पर बड़े पैमाने पर बमबारी "हमारे दुश्मनों को यह स्पष्ट कर देती है कि ऐसी कोई जगह नहीं है जहां इजराइल के लंबे हाथ नहीं पहुंच सकते हैं।"

बेंजामिन नेतन्याहू, बाइडेन की युद्धविराम की अपील को भी ठुकरा चुके हैं।

Israel News

हालांकि उन्हें अमेरिका का "पूरी तरह से ठोस" समर्थन प्राप्त है, लेकिन वास्तव में नेतन्याहू का भविष्य पूरी तरह से उनके मंत्रिमंडल के दो अति-रूढ़िवादी दक्षिणपंथी मंत्रियों, इटमार बेन-ग्वीर और बेजालेई स्मोट्रिच पर निर्भर है। उनके समर्थन के बिना, नेतन्याहू की सरकार गिर जाएगी।

बेन ग्वीर (राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री) और स्मोट्रिच (वित्त मंत्री) इजराइल के वेस्ट बैंक में रहते हैं, एक ऐसा क्षेत्र जो "दो-राज्य समाधान" के मुताबिक पूरी तरह से फिलिस्तीनी क्षेत्र होना चाहिए, लेकिन अब उस क्षेत्र में 7 लाख यहूदी रहते हैं।

बेन-ग्वीर और स्मोट्रिच दोनों का मानना ​​है कि वेस्ट बैंक में रहने वाले फिलिस्तीनियों को जॉर्डन और गाजा में रहने वालों को मिस्र भेज दिया जाना चाहिए, ताकि जातीय सफाई की कार्रवाई की जा सके, जिससे "ग्रेटर इजराइल" में सिर्फ इज़राइली यहूदी ही रह सकें। सोमवार को इजरायली समाचार पत्र हारेत्ज़ ने कट्टरपंथी स्मोत्रिच के हवाले से खबर दी, कि गाजा में दो मिलियन से ज्यादा फिलिस्तीनियों को भूखा मारना तब तक सही और नैतिक बात हो सकती है, जब तक हमास द्वारा बंधक बनाए गए सभी इजरायली बंधकों को छुड़ा नहीं लिया जाता।

स्मोट्रिच और बेन-ग्विर इस सिद्धांत को पुष्ट करते हैं, कि इजरायल के भीतर आंतरिक विभाजन देश के पतन का कारण बन सकते हैं।

पिछले महीने प्रकाशित एक लेख में, द ज्यूइश क्रॉनिकल के संपादक जेक वालिस सिमंस ने तर्क दिया, कि इजराइल अब अपने अति-रूढ़िवादी नागरिकों के साथ टकराव से बच नहीं सकता है, जिनकी संख्या साल दर साल बढ़ रही है।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इजराइल में बसने वाले रूढ़िवादी यहूदियों का छोटा सा अल्पसंख्यक वर्ग, अब बढ़कर दस लाख से ज्यादा हो गया है, जो इजरायल की आबादी का 13% है। इसके अलावा, अति-रूढ़िवादी लोगों के बीच प्रजनन दर वर्तमान में 6.6 है, जबकि धर्मनिरपेक्ष महिलाओं के बीच यह दर सिर्फ 2.0 है।

इस बदलती जनसांख्यिकी का मतलब सिर्फ ज्यादा से ज्यादा काली टोपियां, साइडकर्ल और फ्रॉक कोट का दिखना नहीं है, बल्कि इजराइली समाज में बढ़ती खाई है।

सिमंस का दावा है, रूढ़िवादी, आधुनिक राज्य के अस्तित्व का विरोध करती है, इसकी उम्मीदें यहूदी राज्य पर टिकी हैं, जिसके बारे में भविष्यवाणी की गई है, कि मसीहा के आने के बाद यह राज्य आएगा। इस बीच, कई अति-रूढ़िवादी यहूदी एक सीलबंद समाज के रूप में अस्तित्व में रहना चाहते हैं, जिसमें महिलाओं के आम तौर पर 10 से ज्यादा बच्चे होते हैं और पुरुष दिन में 15 घंटे ज्योतिष की पढ़ाई करते हैं। पुरुष बच्चों की देखभाल भी करते हैं, जबकि पत्नियां, जब बच्चे पैदा नहीं कर रही होती हैं, तो वे जितना भी पैसा कमा सकती हैं, कमाती हैं।

पिछले सप्ताह, इज़राइली रक्षा मंत्री गैलेंट ने घोषणा की थी, कि पिछले अक्टूबर में युद्ध की शुरुआत से अब तक 671 सैनिक मारे गए हैं और लगभग 4,000 घायल हुए हैं, जो आगे युद्ध नहीं लड़ सकते हैं।

उन्होंने इजराइल की संसद नेसेट को यह भी बताया, कि सेना में 10,000 सैनिक कम हैं। इसलिए इजराइल के उच्च न्यायालय ने नेशनल सर्विस से अति-रूढ़िवादी छूट को हटा दिया, जिससे रूढ़िवादी समुदाय में गुस्सा और विरोध भड़क उठा। अब, लगभग 70,000 या उससे ज्यादा युवा अति-रूढ़िवादी पुरुष भर्ती के लिए उपलब्ध हैं, भले ही उन्हें कोषेर भोजन की आवश्यकता होगी, महिलाओं के संपर्क में नहीं आ सकते हैं और उन्हें कठोर प्रार्थना कार्यक्रम का पालन करना होगा, ऐसी बाध्यताएँ जिनका उनके द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा।

तो, क्या यह इसराइल के अंत की शुरुआत है जैसा कि हम जानते हैं?

क्या नेतन्याहू का विदेशों में अपने दुश्मनों को खत्म करने का अभियान, इजराइल के लिए खतरनाक साबित होगा? और क्या इजराइल के दुश्मनों के एकजुट होने से एक फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना हो पाएगी?

क्या अति-रूढ़िवादी आबादी में वृद्धि, इजराइली समाज को इतना बदल देगी, कि राज्य उस तरह से काम नहीं कर पाएगा जैसा कि हम जानते हैं?

इनके उत्तर "शायद नहीं" है। कम से कम फिलहाल तो नहीं, लेकिन इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है जो बाहरी या आंतरिक दबावों के कारण समय के साथ गायब हो गए। बेंजामिन नेतन्याहू को अपने रवैये को बदलना होगा, अन्यथा इजराइल के अंत की शुरूआत उनका जिद करवा सकती है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+