'एक हाथ में कुरान उठाओ, दूसरे हाथ में एटम बम', पाकिस्तानी मौलाना की खतरनाक जिहादी धमकी

साद रिजवी का संगठन टीएलएपी 2021 में इमरान खान के शासनकाल के दौरान फ्रांसीसी राजदूत को पाकिस्तान से निकालने की मांग को लेकर खतरनाक प्रदर्शन कर चुका है, जिसमें दर्जनों पुलिसवालों को इसके समर्थकों ने मार डाला था।

Saad Rizvi

Pakistan News: पाकिस्तान में आर्थिक तबाही मची हुई है और देश के पास अब चंद दिनों का सामान खरीदने के लिए पैसा बचा है, लेकिन पाकिस्तान के मजहबी कट्टरपंथी पूरी दुनिया में जिहाद का बीज अभी भी बो रहे हैं। ये जिहादी कट्टरपंथी, जिस तरह से अपने समर्थकों को उसका रहे हैं, उससे पूरी दुनिया और मानवता के ऊपर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है, जिसमें कट्टरपंथी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के नेता साद रिजवी जहर उगलता हुआ दिख रहा है।

साद रिजवी की जहरीली चेतावनी

साद रिजवी की जहरीली चेतावनी

साद रिजवी का जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें वो अपने समर्थकों को संबोधित करता हुआ दिख रहा है। इस वीडियो में साद रिजवी, पाकिस्तान की सरकार को सलाह देता दिख रहा है, कि वह दूसरे देशों के सामने 'भीख' मांगना बंद करे और इसके बजाय उन्हें परमाणु हथियारों की धमकी दे। यानि, एटम बम दिखाकर पैसे की मांग करे। साद रिजवी अपने वीडियो में कहता दिख रहा है, कि "तुम सदर को सेकर, वजीर-ए-आजम (प्रधानमंत्री) को लेकर, मंत्रिमंडल को लेकर, जहाज भरकर पाकिस्तान की इकोनॉमी बचाने के लिए, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ को भी आगे लगाकर, दुनिया में जाकर हर एक दरवाजे पर भीख मांग रहे हो, कोई तुम्हें देता है, कोई तुम्हें नहीं देता है, कोई अपनी शर्तें मनवाता है, क्यों जा रहे हो?" इसके आगे बोलते हुए साद रिजवी कहता है, कि "पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था खतरे में है... इसके बजाय मैं उन्हें सलाह देता हूं, कि एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में एटम बम का सूटकेस लेकर कैबिनेट को स्वीडन ले जाएं और कहें कि हम कुरान की सुरक्षा के लिए आए हैं। अगर यह पूरी कायनात आपके पैरों के नीचे नहीं आती है, तो आप मेरा नाम बदल सकते हैं।"

'धमकी से डरा दो पूरी दुनिया को'

'धमकी से डरा दो पूरी दुनिया को'

साद रिजवी अपने वीडियो संबोधन में दुनिया को एटम बम का डर दिखाकर पैसे वसूलने के लिए कहता है। वो अपने संबोधन में कह रहा है, कि सरकार को राष्ट्रों के साथ बातचीत करने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि पाकिस्तान उन्हें धमकियों के माध्यम से पैसे देने के लिए मजबूर कर सकता है।" इसके अलावा साद रिजवी ने अपने भाषण के दौरान स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में कुरान जलाए जाने की घटना पर पाकिस्तान की छोटी सी प्रतिक्रिया की भी निंदा की। आपको बता दें, कि 21 जनवरी को स्टॉकहोम में दक्षिणपंथी नेता रासमस पलुदान ने तुर्की का विरोध करते हुए कुरान को जलाया था, जिसको लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिर्फ एक ट्वीट कर विरोध जताया था।

साद रिजवी ने निकाली थी रैली

आपको बता दें, कि साद रिजवी का संगठन टीएलएपी 2021 में इमरान खान के शासनकाल के दौरान फ्रांसीसी राजदूत को पाकिस्तान से निकालने की मांग को लेकर खतरनाक प्रदर्शन कर चुका है, जिसमें दर्जनों पुलिसवालों को इसके समर्थकों ने मार डाला था और करोड़ों की संपत्ति फूंक दी थी। वहीं, इस बार भी, जब पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट में फंसा हुआ है, उस वक्त स्वीडन के विरोध में टीएलएपी के सैकड़ों समर्थकों ने इस्लामिक किताब के अपमान के विरोध में सैकड़ों लोगों के साथ रैली निकाली थी। रैली के दौरान ट्रक पर बड़े-बड़े स्पीकर लगे हुए थे, जिनसे 'अल जिहाद' के नारे लगाए जा रहे थे। प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के लिए एक बड़ी पुलिस टुकड़ी को मानव श्रृंखला बनाते हुए भी देखा गया। इस रैली के दौरान टीएलपी नेता साद रिजवी ने सरकार से कहा था, कि वह स्वीडन और नीदरलैंड्स के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

पाकिस्तान का है खतरनाक संगठन

तहरीक-ए-लब्बैक को पाकिस्तान का एक खतरनाक इस्लामिक कट्टर संगठन माना जाता है, जो कई हिंसक विरोध प्रदर्शनों में शामिल रहा है। ये एक इस्लामिक चरमपंथी पार्टी है, जिसने पिछले साल पैगंबर मुहम्मद के बारे में कथित 'अपमानजनक' बयान देने पर भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा को मारने की धमकी भी दी थी। चार्ली हेब्दो द्वारा प्रकाशित पैगंबर मोहम्मद के कार्टून के जवाब में फ्रांस के राजदूत को पाकिस्तान से निकालने की मांग को लेकर साज रिजवी के संगठन ने पाकिस्तान को ही जलाना शुरू कर दिया था। 2021 में किए गये उस प्रदर्शन के वक्त टीएलपी के सदस्यों को हथियारों के साथ सड़कों पर सरकारी संपत्ति को तहस-नहस करते हुए देखा गया था, जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था और साद रिजवी को गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि, बाद में इमरान खान ने कट्टरपंथी इस्लामवादियों के दबाव के आगे घुटने टेक दिए और चरमपंथी समूह तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) पर प्रतिबंध हटाने की अनुमति दे दी। नतीजतन, संगठन को चौथी अनुसूची से हटा लिया गया, जो पाकिस्तान की आधिकारिक आतंकवादी निगरानी सूची है।

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