Islamabad Talks 2026: इस्लामाबाद पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi, ट्रंप से बातचीत की नई कोशिशें तेज
Islamabad Talks 2026: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण युद्ध को समाप्त करने और तेहरान-वॉशिंगटन के बीच रुकी हुई बातचीत को फिर से पटरी पर लाने के लिए कूटनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Iran Foreign Minister Abbas Araghchi ) एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल के साथ बीती रात पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे। इस दौरे को अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक बड़े 'डिप्लोमैटिक पुश' के रूप में देखा जा रहा है।

Iran-US War रोकने के लिए इस्लामाबाद बना कूटनीति का केंद्र, अमेरिका तक पहुंचेगा ईरान का संदेश
ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने साफ किया है कि फिलहाल ईरान और अमेरिका के बीच कोई सीधी बैठक तय नहीं है। उन्होंने कहा कि तेहरान अपने विचार और चिंताएं पाकिस्तान के माध्यम से वॉशिंगटन तक पहुंचाएगा। इससे साफ है कि पाकिस्तान इस पूरे कूटनीतिक प्रयास में एक अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
दूसरी ओर, अमेरिका भी कूटनीतिक पहल में पीछे नहीं है। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के भी इस्लामाबाद पहुंचने की संभावना है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि बातचीत सीधे तौर पर होगी। उन्होंने यह भी बताया कि उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस वॉशिंगटन से ही पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे और विदेश मंत्री मार्को रुबियो तथा राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ समन्वय बनाए रखेंगे।
Iran US War Peace Talks में मध्यस्थ की भूमिका में पाकिस्तान: सीधी बातचीत से इनकार
ईरानी प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई भी शामिल हैं। हालांकि, बकाई ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच किसी आमने-सामने की बैठक की योजना नहीं है। उन्होंने कहा-ईरान अपनी चिंताओं और विचारों को पाकिस्तान के माध्यम से वॉशिंगटन तक पहुंचाएगा। हमारा रुख स्पष्ट है और हम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए पाकिस्तान के साथ समन्वय कर रहे हैं।
Iran US War को रोकने के लिए ट्रंप की शर्तें: यूरेनियम और तेल शिपमेंट पर सख्त रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कल संकेत दिया कि ईरान अमेरिकी मांगों को पूरा करने के लिए एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है। हालांकि, ट्रंप ने अपनी शर्तें भी दोहराईं:
परमाणु कार्यक्रम: ईरान को अपना पूरा समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) छोड़ना होगा।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य: तेल शिपमेंट की मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करनी होगी।
सैन्य घेराबंदी: ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं होता, अमेरिकी सेना ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी (Blockade) जारी रखेगी।
ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व के भीतर आंतरिक मतभेदों पर भी सवाल उठाए, जिसे अमेरिकी अधिकारी तेहरान के सत्ता ढांचे में कमजोरी के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
पिछली वार्ता बेनतीजा, अब नई उम्मीद
यह नई कूटनीतिक पहल 11 अप्रैल को हुई पिछली बातचीत का अगला चरण है। उस समय उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चर्चा का नेतृत्व किया था, लेकिन परमाणु ईंधन संवर्धन कार्यक्रम पर ईरान से कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं मिल पाई थी। अब देखना यह है कि क्या कुश्नर और विटकॉफ की जोड़ी इस गतिरोध को तोड़ने में सफल होती है।
क्षेत्रीय सहयोग की तलाश में अराघची
तेहरान से रवाना होने से पहले अब्बास अराघची ने कहा कि उनकी यात्रा केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। वे द्विपक्षीय मामलों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा करने के लिए ओमान और रूस का भी दौरा करेंगे। अराघची का मुख्य फोकस ईरान-अमेरिका युद्ध की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर सहयोगियों के साथ तालमेल बिठाना है।
क्या 'लास्ट चांस' साबित होगी ये कूटनीति?
इस्लामाबाद में होने वाली ये संभावित बातचीत ऐसे समय में हो रही है, जब युद्ध और तनाव अपने चरम पर है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हैं, लेकिन बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच कूटनीतिक समाधान की कोशिशें तेज हो गई हैं। अब देखना होगा कि क्या पाकिस्तान की मध्यस्थता से कोई रास्ता निकल पाता है या हालात और ज्यादा बिगड़ते हैं।












Click it and Unblock the Notifications