तोशाखाना केस में इमरान खान की जमानत याचिका रद्द, गिरफ्तारी से कब तक बचेंगे पूर्व प्रधानमंत्री?
इमरान खान ने जेल भरो आंदोलन का आह्वान किया है, लेकिन जब पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची, तो वो खुद दीवार फांदकर पड़ोसी के घर छिप गये।

Pakistan News: इस्लामाबाद की एक जिला अदालत ने तोशखाना मामले में पेश न होने पर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ पिछले हफ्ते जारी गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट को वापस लेने से इनकार कर दिया है, जिसके बाद अब सवाल ये उठ रहे हैं, कि आखिर इमरान खान कब तक अपनी गिरफ्तारी टाल पाएंगे? दो दिन पहले पड़ोसी के घर में छिपकर गिरफ्तार होने से बचने वाले इमरान खान का गिरफ्तार होना तय माना जा रहा है और कानून का शिकंजा उनके ऊपर कसता जा रहा है, लिहाजा भारी संख्या में समर्थकों को सामने कर इमरान खान अब तक पुलिस से बचते आए हैं, लेकिन कितने दिन बचेंगे, ये कहा नहीं जा सकता है।

इमरान खान की गिरफ्तारी तय
70 साल के हो चुके पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान तोशाखान मामले में बुरी तरह से फंसे हुए हैं। उनके ऊपर इल्जाम हैं, कि प्रधानमंत्री रहने के दौरान उन्हें अलग अलग देशों से जो उपहार मिले, उसे उन्होंने बेच दिए और उन पैसों का निजी इस्तेमाल किया। जबकि, ऐसा करना कानूनन जुर्म है। भारत में भी तोशाखान कानून है। इमरान खान पर आरोप है, कि उन्होंने गिफ्ट में मिली महंगी ग्रेफ कलाई घड़ी समेत कई सामान बेचे हैं और पाकिस्तानी इलेक्शन कमीशन इन्हीं आरोपों में उनके चुनाव लड़ने पर भी प्रतिबंध लगा चुका है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के प्रमुख इमरान खान ने 28 फरवरी को जारी वारंट के खिलाफ इस्लामाबाद जिला और सत्र अदालत में एक आवेदन दायर किया था, जिसके बाद इमरान खान मामले में कई सुनवाई में शामिल नहीं हुए थे। जिसके बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जफर इकबाल ने इमरान खान की याचिका खारिज करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री की अर्जी पर दलीलें सुनने के बाद उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।

अदालत की इमरान पर सख्त टिप्पणी
न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, कि "आरोपी 28 फरवरी को विभिन्न माननीय अदालतों में पेश होने के बाद इस अदालत में पेश होने की स्थिति में था, लेकिन वह जानबूझकर इस अदालत में पेश होने से बचा।" यानि, कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है, कि इमरान खान ने अदालती आदेश का उल्लंघन किया है और कोर्ट ने ये भी कहा है, कि आरोपी के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। न्यायाधीश ने आगे कहा, कि अभियुक्त ने अभी तक अदालत के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया है और उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति (आज के लिए) के लिए कोई आवेदन रिकॉर्ड के साथ संलग्न भी नहीं किया गया है। अदालत के आदेश के मुताबिक, "आरोपी भविष्य में भी मुकदमे में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अदालत में पेश नहीं हुआ है, इसलिए आवेदन खारिज कर दिया गया है।" आपको बता दें, कि 28 फरवरी को, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जफर इकबाल ने तोशखाना मामले में अदालत के सामने लगातार पेश होने में विफल रहने के लिए इमराम खान के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।

इमरान के खिलाफ तोशाखाना मामला क्या है?
तोशेखान (तोशखाना) का अर्थ सरकारी खजाना होता है। ये विभाग कैबिनेट डिवीजन के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन आता है। पाकिस्तान में नेताओं के अलावा सरकारी पदों पर तैनात तमाम बड़े अधिकारियों को विदेशों से मिलने वाले किसी भी उपहार को सरकारी खजाने में जमा कराना होता है। तोशाखान नियमों के मुताबिक, जिन लोगों पर ये नियम लागू होते हैं, उन्हें मिलने वाले उपहारों की जानकारी कैबिनेट डिवीजन को दिया जाना जरूरी है। लेकिन इमरान खान ने किसी भी नियम का पालन नहीं किया।
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इमरान खान ने करोड़ों रुपये कमाए
प्रधानमंत्री चाहे किसी भी देश के हों, उन्हें विदेशी दौरे के दौरान काफी गिफ्ट मिलते हैं। इमरान खान साल 2018 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद वे अलग-अलग देशों की यात्रा पर गए। यूरोप और अरब देशों की यात्रा करने के दौरान उन्हें कई कीमती उपहार मिले थे। इन गिफ्ट्स में एक Graff घड़ी, कफलिंक का एक जोड़ा, एक महंगा पेन, एक अंगूठी और चार रोलेक्स घड़ियां सहित कई अन्य उपहार भी थे। इमरान खान ने इन उपहारों को तो तोशेखान में जमा करा दिया था, लेकिन बाद में इन्हें सस्ते दामों पर खुद खरीद लिया और उन्हें खूब मुनाफे में बेचा। इस पूरी प्रक्रिया के लिए उनकी सरकार ने बाकायदा कानूनी अनुमति दी थी। लेकिन, जब मामला प्रकाश में आया, और इमरान खान पर दबाव बढ़ा, तो उन्होंने कुबूल किया कि तोशाखान से इन सभी गिफ्ट्स को 2.15 करोड़ रुपए में खरीदा था, बेचने पर उन्हें 5.8 करोड़ रुपए मिले थे। बाद में खुलासा हुआ, कि इमरान खान ने ये गिफ्ट्स बेचकर 20 करोड़ से भी अधिक पाकिस्तानी रुपये कमाए थे।












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