तालिबान की सरकार बनने से पहले काबुल पहुंचे ISI चीफ, भारत के लिए बड़ा खतरा, इस्लामाबाद से चलेगी सरकार?

अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने से पहले आईएसआई चीफ फैज हमीद काबुल पहुंचे हैं। ऐसी रिपोर्ट है कि, तालिबान के अंदर सरकार बनाने को लेकर काफी मतभेद शुरू हो गये हैं।

काबुल, सितंबर 04: तालिबान की सरकार का ऐलान कभी भी हो सकता है और सरकार बनाने की तैयारियों के बीच पाकिस्तान खुफिया एजेंसी आईएसआई चीफ जनरल फैज हामिद काबुल पहुंचे हैं। उनके साथ पाकिस्तान सरकार के कई खुफिया अधिकारी और सरकार के अधिकारी हैं। काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद ये पहला मौका है, जब किसी देश का बड़ा अधिकारी अफगानिस्तान पहुंचा हो। इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भी काबुल के दौरे पर जाने वाले थे, लेकिन बाद में उनका दौरा टल गया था। इन सबके बीच सवाल ये उठ रहा है कि क्या आईएसआई चीफ का दौरा भारत के लिए खतरे की घंटी है और दूसरा सवाल ये है कि क्या काबुल की तालिबान सरकार इस्लामाबाद से चलने वाली है?

काबुल पहुंचे आईएसआई चीफ

काबुल पहुंचे आईएसआई चीफ

पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, तालिबान शूरा के बुलावे पर पाकिस्तान आईएसआई चीफ फैज हामिद अन्य अधिकारियों के साथ काबुल पहुंचे हैं। माना जा रहा है कि तालिबान की सरकार के अभी तक निर्माण नहीं होने के पीछे भी पाकिस्तान का हाथ है और पाकिस्तान अपने करीबी आतंकियों को अफगानिस्तान में बनने वाली सरकार में बड़े ओहदे पर बिठाना चाहता है, वहीं तालिबान के अंदर भी कई खेमे बन गये हैं और अंदरूनी रस्साकस्सी की वजह से तालिबान की सरकार का गठन नहीं हो पा रहा है। वहीं, आईएसआई चीफ के काबुल दौरे से सवाल उठ रहे हैं कि क्या तालिबान के अंदर मची कलह को शांत करनाने के लिए फैज हामिद काबुल के दौरे पर पहुंते हैं?

तालिबान में सरकार को लेकर मतभेद

तालिबान में सरकार को लेकर मतभेद

नई अफगान सरकार की घोषणा को लेकर तालिबान में मतभेद काफी गहरा चुका है। जिसते बाद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद आज काबुल पहुंचे हैं। उनका ये यात्रा काफी सीक्रेट रखा गया था, लेकिन तस्वीरें सामने आने के बाद खुलासा हो गया है। आईएसआई चीफ फैज हामिद की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है, जिसमें फैज हामिद को कुछ अधिकारियों के साथ चाय पीता हुआ देखा जा रहा है। हालांकि, तस्वीर में कोई तालिबान का अधिकारी नजर नहीं आ रहा है। काबुल पर नजर रखने वालों का कहना है कि जनरल फैज हमीद तालिबान नेतृत्व को अपने मतभेदों को दूर करने और जल्द ही सरकार की घोषणा करने में मदद करेंगे।

अफगान अशांति के पीछे चीन-पाकिस्तान

अफगान अशांति के पीछे चीन-पाकिस्तान

देखा जाए तो अफगानिस्तान में जो भी कलह मचा हुआ है, उसके पीछे चीन और पाकिस्तान ही है और अफगानिस्तान में इस अशांति का अगर सबसे ज्यादा फायदा कोई उठाने वाला है, वो चीन ही होगा। चीन इससे पहले म्यांमार में भी सत्ता को पलट चुका है और वहां पर भी सैन्य तानाशाह चुनी सरकार को इसी साल एक फरवरी को बेदखल कर चुका है। चीन को म्यांमार में भी सैन्य फायदा हो रहा है। वहीं, दुनिया के लोकतांत्रिक देश अभी भी उम्मीद कर रहे हैं कि अफगानिस्तान में सुन्नी इस्लामी समूह एक समावेसी सरकार बनाएगा। जबकि, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के काबुल दौरे के बाद साफ हो गया है कि तालिबान की सरकार का रिमोट कंट्रोल पाकिस्तान में और रिमोट को चलाने वाला हाथ बीजिंग में होगा।

भारत के लिए गंभीर खतरा

भारत के लिए गंभीर खतरा

आईएसआई चीफ का काबुल पहुंचना निश्चित तौर पर भारत के लिए बहुत बड़ा खतरा है। क्योंकि इसकी पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं पर चीन समर्थक देशों का शासन है। कश्मीर और भीतरी इलाकों में आंतरिक परेशानी पैदा करने की कोशिश कर रहे तालिबान संबंधित ग्रुप्स की वैध चिंताओं के अलावा, चीन अफगानिस्तान और मध्य एशिया में ईरान और रूस की मदद से पैर पसार रहा है। वहीं, तालिबान एक दिन पहले ही कहा है कि उसे कश्मीरी मुसलमानों को लेकर आवाज उठाने का हक है। भारत को हमेशा से तालिबान से लेकर जिस बात की आपत्ति रही है, तालिबान ने भारत के खिलाफ वही चाल चलने की कोशिश की है। हालांकि, पहले तालिबान लगातार कश्मीर में हस्तक्षेप की बात से इनकार कर रहा था, लेकिन अब जब तालिबान की सरकार बनने जा रही है, तो उसने कश्मीर को लेकर जहरीला बयान दे दिया है।

अफगानिस्तान में तालिबान के साथ चीन

अफगानिस्तान में तालिबान के साथ चीन

अब यह बिल्कुल स्पष्ट है कि चीन अपनी बेल्ट रोड योजना का विस्तार अफगानिस्तान तक करेगा और सीपीईसी को पसंद करके बुनियादी ढांचे के विकास के बदले में अफगानिस्तान में लिथियम और कॉपर संसाधनों का दोहन करेगा। इससे चीन न केवल बलूचिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से बल्कि काराकोरम राजमार्ग के जरिए भी अफगान खनिजों को बाहर निकाल सकेगा। यह ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर, आईईडी प्रूफ ऑल-टेरेन व्हीकल, टैक्टिकल ड्रोन, एरिया हथियार और रिवर्स इंजीनियरिंग के लिए बॉडी आर्मर सहित छोड़े गये अमेरिकी सैन्य उपकरणों पर भी कड़ी नजर रखेगा।

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