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क्या पाकिस्तान फिर तख़्तापलट की राह पर है?

By Bbc Hindi
पाकिस्तान, पाकिस्तान चुनाव, नवाज़ शरीफ़, इमरान ख़ान
AFP
पाकिस्तान, पाकिस्तान चुनाव, नवाज़ शरीफ़, इमरान ख़ान

पाकिस्तान में चुनाव अभियान के दौरान हिंसा और नतीजों को प्रभावित करने की तमाम कोशिशों के बाद चुनाव हो रहे हैं.

पाकिस्तान की संसद को चुनने के लिए हो रहे चुनाव में वोट डालने के लिए लगभग 10 करोड़ 60 लाख मतदाता पंजीकृत हैं.

पूर्व क्रिकेटर इमरान खान की पार्टी पीटीआई को उम्मीद है कि वो नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पीएमएल-(एन) को पछाड़ देगी.

अपने 70 सालों के इतिहास में पाकिस्तान एक अर्ध-लोकतंत्र और पूर्ण सैन्य शासन के बीच झूलता रहा है.

इस दौरान यह अंतरराष्ट्रीय विवादों में उलझा और इस्लामिक चरमपंथ के लिए एक आधार में भी बदल गया.

पिछले कुछ दशकों के दौरान पाकिस्तान में लोकतंत्र अब तक के सबसे ज़्यादा मजबूत रूप में रहा है, लेकिन जैसा कहा जा रहा है कि 'लोकतांत्रिक तख़्तापलट' के चलते अब इस पर ख़तरा मंडरा रहा है.

वहीं, पिछले कुछ समय में हुए इस राजनीतिक हेरफेर के पीछे पाकिस्तान की ताक़तवर सेना को प्रमुख कारण बताया जा रहा है.

इससे पहले भी पाकिस्तान की सेना का सरकार पर प्रभाव दिखता रहा है. इसके लिए सीधा तख़्तापलट होता है या विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर चुनी गई मौजूदा सरकार को हटाया जाता है और ये सुनिश्चित किया जाता है कि वो दोबारा सत्ता में न आ सके.

साल 2008 में इन ​विशेष शक्तियों का प्रभाव कम हो गया था जिसके चलते साल 2013 में एक लोकतांत्रित सरकार ने अपना कार्यकाल पूरा ​किया.

लेकिन जब से हवाओं का रुख़ बदला है, आलोचकों का कहना है कि अब फिर से दबदबा क़ायम करने के लिए पुरानी रणनीति अपनाई जा रही है.

पाकिस्तान, पाकिस्तान चुनाव, नवाज शरीफ, इमरान खान
AFP
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वापसी की कोशिशें

इसके लिए ये तीन तरीक़े अपनाए गए हैं -

1. कुछ क़ानून विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत ने मौजूदा सरकार के पर कतरने के लिए कुछ ख़ास क़ानूनों का इस्तेमाल किया. इससे सरकार के विरोधियों को फ़ायदा मिला.

इस्लामाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शौक़त अज़ीज़ सिद्दीक़ी ने रविवार को कहा था कि 'ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई न्यायपालिका में दख़ल दे रही है और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को चुनाव से पहले न छोड़ने का दबाव डाल रही है.'

नवाज़ शरीफ़ को भ्रष्टाचार के एक मामले में प्रधानमंत्री पद के लिए अयोग्य करार ​दे दिया गया था और उन्हें 10 साल की सज़ा सुनाई गई है.

इस फ़ैसले को एक क़ानून विशेषज्ञ ने अपने समुदाय के लिए शर्मनाक बताया था.


पाकिस्तान, पाकिस्तान चुनाव, नवाज शरीफ, इमरान खान
AFP
पाकिस्तान, पाकिस्तान चुनाव, नवाज शरीफ, इमरान खान

'डॉन' अख़बार के मुताबिक़ जस्टिस सिद्दीक़ी ने रावलपिंडी बार एसोसिएशन को कहा था कि उन्हें ताक़तवर आईएसआई के ख़िलाफ़ बोलने में डर नहीं लगता चाहे उनकी हत्या ही क्यों न कर दी जाए.

2. प्रतिबंधित चरमपंथी समूह चुनावी प्रक्रिया में शामिल हो चुके हैं, ऐसे में प्राधिकरण ने या तो एक दूसरे रास्ते की तलाश की है या फिर ऐसा करने में उसकी सहायता की है.

3. सेना को चुनाव के दिन मतदान प्र​क्रिया संभालने में ख़ुले तौर पर बहुत बड़ी भूमिका दी गई है.

अब के चुनावों में पहले दो तरीक़े और उनके नतीजे भी सबके सामने हैं.


पाकिस्तान, पाकिस्तान चुनाव, नवाज शरीफ, इमरान खान
Getty Images
पाकिस्तान, पाकिस्तान चुनाव, नवाज शरीफ, इमरान खान

उम्मीदवारों पर दबाव

नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पीएमलएन-एन के कई उम्मीदवारों को पार्टी छोड़ने या क्रिकेटर से नेता बने इमरान ख़ान की तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी से जुड़ने के लिए लालच दिया जा रहा है. उनके पास तीसरा विकल्प चुनाव में स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर खड़े होने का है.

इस बात के प्रमाण हैं कि जो इसका विरोध कर रहे हैं उन्हें हिंसा का सामना करना पड़ा रहै. उनके कारोबार पर हमला हुआ है या उन्हें चुनाव के लिए अयोग्य करार दे दिया गया है.

इसके अलावा अन्य दल जैसे बिलावल भुट्टो की पाकिस्तान ​पीपुल्स पार्टी भी ख़तरे में है.

इसके कुछ नेताओं पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगा है. पार्टी के सदस्यों का ये भी आरोप था कि प्रशासन उनके चुनाव प्रचार में रुकावटें डाल रहा था.

वहीं, पीपीपी सहित अन्य धर्मनिरपेक्ष संगठनों पर भी चरमपंथी हमले का डर मंडरा रहा है.

लेफ़्ट विचारधारा वाली आवामी नेशनल पार्टी के मुख्य उम्मीदवार की पिछले हफ़्ते पेशावर में एक आत्मघाती हमले में हत्या कर दी गई थी.

इसी तरह के एक और हमले में दो और उम्मीदवार मारे गए जिनमें से एक पीटीआई के हैं.

पाकिस्तान, पाकिस्तान चुनाव, नवाज शरीफ, इमरान खान
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बलूचिस्तान में जहाँ एक धर्मनिरपेक्ष उम्मीदवार गज़न मार्री को यात्रा प्रतिबंधों और नज़रबंदी का सामना करना पड़ रहा है वहीं चरमपंथियों से संबंध रखने वाले एक उम्मीदवार शफ़ीक मेंगल खुलकर चुनाव लड़ रहे हैं.

गज़न मार्री को इसलिए रोका गया क्योंकि वो प्रांतीय अधिकारों के पैरोकार हैं जबकि सेना इसका विरोध करती है.

वहीं जून में पाकिस्तान ने लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े मौलाना मोहम्मद को चरमपंथियों की सूची से बाहर कर दिया था.

ज़ाहिर तौर पर ऐसा इसलिए किया गया ताकि वो अलग नाम से चुनाव लड़ रहे अपने संगठन का चुनाव प्रचार कर सकें.

संयुक्त राष्ट्र की चरमपंथियों की सूची में शामिल जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद को भी अलग पार्टी के बैनर तले उम्मीदवार खड़े करने की इजाज़त दे दी गई.

हाफ़िज़ सईद पर भारत में मुंबई हमले कराने का भी आरोप है.

इसके अलावा हरकातुल मुजाहिदीन चरमपंथी संगठन के संस्थापक फ़ज़लुर्रहमान ख़लील, इमरान ख़ान की पार्टी को समर्थन देने के लिए अचानक सक्रिय हो गए हैं.

फ़ज़लुर्रहमान का नाम भी अमरीका की चरमपंथियों की सूची में शामिल है.


पाकिस्तान, पाकिस्तान चुनाव, नवाज शरीफ, इमरान खान
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क्या वाक़ई लोकतांत्रिक चुनाव हैं

ये सभी घटनाएं एक साथ ऐसे माहौल की तरफ़ इशारा करती हैं जहाँ लेफ़्ट या लोकतंत्र समर्थक दलों को क़ानूनी या हिंसक तरीक़ों से दबाने की कोशिश की जा रही है.

इसका सबसे ज़्यादा फ़ायदा इमरान ख़ान की पार्टी पीटीआई और धार्मिक अतिवादियों को दिख रहा है.

इन पूरे हालातों के पीछे का मक़सद लगता है कि किसी भी पार्टी को बहुमत न मिल सके और इसका इस्तेमाल करके सेना होने वाला प्रधानमंत्री तय कर सके.

आम जनता इस पूरी स्थिति से अनजान रहे, इसके लिए मीडिया पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाया गया है. वह सिर्फ़ चुनिंदा कार्यक्रमों को ही कवर कर पा रहा है.

हालांकि, ऊपर से ये लग सकता है कि देश में लोकतांत्रिक तरीक़े से काम हो रहा है, लेकिन कई लोगों का कहना है कि जो हो रहा है वो वाक़ई लोकतांत्रिक नहीं है.

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English summary
Is Pakistan on the trail of the coup

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