ईरान: मोरैलिटी पुलिस को 'ख़त्म' करने पर दुनिया के अख़बार क्या कह रहे हैं

ईरान प्रदर्शन
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ईरान में सितंबर से चल रहे भीषण विरोध प्रदर्शनों के बाद आख़िरकार ईरान की सरकार ने 'मोरैलिटी पुलिस'-जिसका काम देश में इस्लामिक ड्रेस कोड को लागू करना है, उसे ख़त्म करने का फ़ैसला लिया है.

ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद जफ़र मोंताज़ेरी ने रविवार को ये बयान दिया है. हालांकि उनके अलावा अभी तक ईरानी हुकूमत की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.

इस साल सितंबर में ईरान में 22 साल की महसा अमीनी नाम की महिला की पुलिस की हिरासत में मौत के बाद शुरू हुए प्रदर्शन अब तक जारी हैं.

मोंताज़ेरी एक धार्मिक आयोजन में शिरकत कर रहे थे जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान की मोरैलिटी पुलिस को भंग किया गया है? इसके जवाब में उन्होंने कहा, "मोरैलिटी पुलिस का न्यायपालिका से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें जिसने शुरू किया था उन्होंने ही 'शट-डाउन यानी ख़त्म' कर दिया है."

दरअसल ये पूरा विवाद इस साल सितंबर से शुरू हुआ, जब ईरान की मोरैलिटी पुलिस ने 22 साल की महसा अमीनी को हिजाब 'ठीक से ना' पहनने के आरोप में हिरासत में लिया. जब अमीनी को हिरासत में लिया गया तो वह अपने भाई के साथ थीं.

पुलिस हिरासत में ही 16 सितंबर को अमीनी की मौत हो गई और आरोप है कि उनकी मौत मोरैलिटी पुलिस की प्रताड़ना के कारण हुई. अमीनी की मौत के तीन दिन के बाद बड़ी तादाद में ईरानी महिलाएं सड़कों पर उतर आईं और तब से हो रहा प्रदर्शन अब तक जारी है. इस देशव्यापी प्रदर्शन में अब तक सैकड़ों लोग मारे गए हैं.

लगभग तीन महीने से चल रहे इस प्रदर्शन के कारण मोरैलिटी पुलिस का भंग होना इन प्रदर्शनकारियों की बड़ी जीत मानी जा रही है. ईरान से आ रही इस ख़बर को दुनिया भर के अख़बारों, मीडिया चैनलों पर प्रमुखता से जगह दी जा रही है. आपको बताते हैं कि दुनिया के नामचीन अख़बार और चैनल इस ख़बर को कैसे देख रहे हैं.

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'मोरैलिटी पुलिस ख़त्म भी हो जाए तो हिजाब ड्रेस-कोड जारी रहेगा'

क़तर के अल जज़ीरा ने इस पर एक लेख लिखा है. इसमें कहा गया है, "हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि मोरैलिटी पुलिस ईरान में अनिवार्य रूप से हिजाब पहनने के नियम को लागू कराए जाने का एक ज़रिया भर है. लेकिन साल 1979 में इस्लामिक क्रांति के चार साल बाद से ही ईरान में ड्रेस-कोड को लेकर नियम बनाए गए और हिजाब पहनना उसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है."

अपने लेख में अल जज़ीरा लिखता है- 'अब तक ईरान के किसी भी वरिष्ठ अधिकारी ने ये नहीं कहा है कि हिजाब से जुड़े नियम में कोई बदलाव होने वाला है, बल्कि ईरान के उच्च अधिकारी कई साल से इस बात को दोहराते रहे हैं कि ये मुद्दा एक "रेड-लाइन" है जिस पर बात नहीं होगी.'

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क्या ये ईरान सरकार का आधिकारिक फ़ैसला है?- न्यूयॉर्क टाइम्स

अमेरिकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स लिखता है कि महीनों के प्रदर्शन के बाद ईरान में मोरैलिटी पुलिस को ख़त्म करने का फ़ैसला लिया गया है.

हालांकि, ये साफ़ नहीं है कि ये धर्मशासित देश का आधिकारिक फ़ैसला है या नहीं, क्योंकि इसे लेकर एक अधिकारी का ही बयान अब तक सामने आया है. ईरान की सरकार ने अब तक ना ही इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी किया है और ना ही अपने अटॉर्नी जनरल के बयान को ख़ारिज किया है.

अख़बार के मुताबिक़, अगर मोरैलिटी पुलिस को भंग भी कर दिया गया है तो भी ये प्रदर्शन शायद ख़त्म ना हों क्योंकि प्रदर्शनकारियों और दूसरे सुरक्षा बलों के बीच झड़प अभी भी जारी है और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी इस्लामिक रिपब्लिक के ख़ात्मे की बात कर रहे हैं.

अख़बार लिखता है- ये बात समझना यहां अहम है कि ईरान में सेना और पुलिस न्यायपालिका के अंतर्गत नहीं बल्कि इंटीरियर मिनिस्ट्री यानी गृह मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं. और ये भी समझने वाली बात है कि अगर ईरान ने मोरैलिटी पुलिस को भंग कर दिया है तो भी देश में लागू इस्लामिक ड्रेस-कोड पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.

अख़बार लिखता है कि मोरैलिटी पुलिस ईरान पुलिस के अंतर्गत आती है ना कि अटॉर्नी जनरल के अंतर्गत, ऐसे में संभव है कि ईरानी सरकार अटॉर्नी जनरल मोंताज़ेरी के बयान को हल्का और ग़ैर-ज़रूरी बना कर पेश करने की कोशिश करे.

हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री होसैन अमीर अब्दुल्लाहियन ने अपने सर्बिया दौरे के दौरान पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा था, "ईरान में लोकतंत्र और आज़ादी के फ़्रेमवर्क में रहते हुए हम आगे की ओर बढ़ रहे हैं."

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'महिलाओं के नेतृत्व वाला प्रदर्शन जिसे सरकार ने दंगाई बताया था'

रियाद से निकलने वाले अख़बार अरब न्यूज़ ने इस ख़बर को प्रमुखता से छापा है.

अख़बार लिखता है कि ईरान ने दो महीने से अधिक समय से जारी प्रदर्शनों के बीच मोरैलिटी पुलिस को ख़त्म करने का फ़ैसला किया है.

महिलाओं के नेतृत्व में हो रहे इस प्रदर्शन को ईरान की सरकार और अधिकारियों ने 'दंगा' का नाम दिया है जो एक 22 साल की कुर्द लड़की महसा अमीनी की मौत के बाद से आग की तरह देश में फैल गया.

ये ईरान सरकार का फ़ैसला है या नहीं?

अमेरिका से निकलने वाला एक और अख़बार वॉल स्ट्रीट जनरल इस पर लिखता है, "ईरान ने मोरैलिटी पुलिस को ख़त्म किया है और हो सकता है कि देश अपने हिजाब नियमों में भी कुछ बदलाव करे."

अख़बार ने तेहरान की एक कार्यकर्ता अतेना दाएमी से बात की है और उनका कहना है कि हाल-फ़िलहाल में ईरान की सड़कों पर जब से प्रदर्शन शुरू हुए हैं मोरैलिटी पुलिस की गाड़ियां गश्त लगाती लगभग ना के बराबर नज़र आती हैं. वह कहती हैं कि अगर ये प्रदर्शन यहां ख़त्म हो गया तो ईरानी हुकूमत पुलिस और दूसरे तरीकों से महिलाओं पर हिजाब पहनने के नियम लागू करेगी.

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बयान को संदर्भ से अलग पेश किया जा रहा-ईरानी मीडिया

तेहरान से निकलने वाले अख़बारों में मोरैलिटी पुलिस को लेकर कवरेज ना के बराबर है. किसी भी चैनल की वेबसाइट और अख़बार के मुख्य पन्ने पर ये ख़बर नज़र नहीं आती.

लेकिन तेहरान से प्रसारित होने वाला प्रमुख चैनल अल-आलम कहता है कि अटॉर्नी जनरल मोंताज़ेरी के बयान को विदेशी मीडिया संदर्भ से अलग हटा कर देख रहा है.

चैनल अपनी वेबसाइट पर छपे एक लेख में लिखता है कि ईरान के अटॉर्नी जनरल ने अपने बयान से ये साफ़ कर दिया है कि मोरैलिटी पुलिस न्यायिक अधिकारियों के अंतर्गत नहीं आती और जिसने भी इसका गठन बनाया है वह ख़ुद इसकी पेट्रोलिंग को 'कैंसिल' कर चुके हैं.

अटॉर्नी जनरल का ये बयान ऐसे समय आया है जब ईरानी सरकार ने मोरैलिटी पुलिस के पेट्रोलिंग को लेकर कोई भी आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है.

चैनल कहता है कि अटॉर्नी जनरल मोहम्मद ज़फ़र मोंताज़ेरी के बयान का ज़्यादा से ज़्यादा यही मतलब निकाला जा सका है कि मोरैलिटी पुलिस की पेट्रोलिंग अपने गठन से ही कभी भी न्यायिक अधिकारियों के दायरे में नहीं रही है. अटॉर्नी जनरल ने ये साफ़ किया है कि न्यायपालिका कम्युनिटी के स्तर पर लोगों के काम और व्यवहार की निगरानी करेगी.

इसके अलावा तेहरान टाइम्स, इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी जैसे मुख्य ईरानी अख़बारों ने इसे कोई कवरेज नहीं की है.

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