Iran weapons 2026: फत्ताह से लेकर खैबर शिकन तक, इन घातक हथियारों के साथ ईरान कहर बनकर टूटेगा इजरायल पर
Iran weapons 2026: अमेरिका और इजरायल के ईरान पर शुरू किए गए बड़े पैमाने के हमलों के बाद मध्य पूर्व में युद्ध की आग भड़क गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे 'मेजर कॉम्बैट ऑपरेशन बताया है। इजरायल ने इसे 'सुरक्षा के लिए पहले किया हमला' करार दिया। तेहरान में विस्फोटों की गूंज सुनाई दे रही है, धुआं उठ रहा है, और इजरायल में सायरन बज रहे हैं। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में उत्तरी इजरायल की ओर मिसाइल और ड्रोन लॉन्च किए हैं, जिससे क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ गया है।
इस संघर्ष में ईरान के उन्नत हथियार प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं, जो इजरायल के आयरन डोम, एरो और अमेरिका के पैट्रियट सिस्टम को चुनौती दे सकते हैं। ईरान के पास भी घातक हथियारों का पूरा जखीरा है और यही वजह है कि अमेरिका भी ईरान को हल्के में नहीं लेते हैं।

Iran weapons 2026: ईरान के पास है विस्फोटक हथियारों का जखीरा
फत्ताह-2 हाइपरसोनिक मिसाइल: यह ईरान की सबसे एडवांस्ड मिसाइल है, जो मैक 15 की रफ्तार से चलती है और हवा में रास्ता बदल सकती है। इसे मिसाइल सिटी में छिपाया गया है, जिस वजह से इसे ट्रैक करना लगभग असंभव है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह इजरायली एयरबेस या अमेरिकी जहाजों पर मिनटों में हमला कर सकती है।
खैबर शिकन बैलिस्टिक मिसाइल: यह 1,450 किमी की रेंज वाली है, जो तेल अवीव तक पहुंच सकती है। इसकी तेज लॉन्च क्षमता और सटीकता से सैचुरेशन अटैक संभव हैं, जो इजरायली इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकती है।
शाहेद-136 कामिकेज ड्रोन: यह कम लागत वाला 'स्वार्म' हथियार है, जो झुंड में लॉन्च होकर डिफेंस सिस्टम को भ्रमित करता है। यूक्रेन युद्ध में इसका इस्तेमाल हो चुका है और अब ईरान इसे फारस की खाड़ी में तैनात कर रहा है।
खोर्रमशहर-4 मिसाइल: यह 2,000 किमी की रेंज और 1,500 किलो वॉरहेड वाली है। मिड-कोर्स में रडार से बचने की क्षमता इसे और खतरनाक बनाती है, जो यूरोप के किनारे या अमेरिकी बेस तक पहुंच सकती है।
मोहाजेर-10 ड्रोन: यह अमेरिकी रीपर जैसा है, जो 24 घंटे उड़ान भर सकता है और 300 किलो पेलोड ले जा सकता है। इसकी 2,000 किमी रेंज पूरे इजरायल को कवर करती है, जिससे लगातार निगरानी और हमले संभव हैं।
Israel Iran War का पड़ेगा वैश्विक असर
अमेरिका-इजरायल की एयर सुपीरियरिटी और साइबर क्षमता लॉन्च को बाधित कर सकती है। ट्रंप ने ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को खत्म करने की कसम खाई है। अगर ईरान ने पूरा जोर लगाया तो युद्ध लंबा और विनाशकारी हो सकता है। मिडिल ईस्ट में तनाव का असर वैश्विक स्तर पर पड़ सकता है। तेल की कीमतें पहले से 23% बढ़ चुकी हैं। तेल की कीमतों के बाद अब सोने की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है।
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