Iran Vs America: ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान ने ट्रंप को सरेआम ललकारा, कहा- परमाणु कार्यक्रम हमारा अधिकार
Iran Vs America: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने सीधे तौर पर वाशिंगटन को चुनौती देते हुए परमाणु कार्यक्रम को देश का बुनियादी और तकनीकी अधिकार घोषित कर दिया है। पिछले आठ हफ्तों से जारी सैन्य संघर्ष और खाड़ी देशों में फैलती युद्ध की लपटों के बीच, पेजेशकियान का यह बयान आग में घी डालने का काम कर रहा है।
उन्होंने वैश्विक मंच पर सवाल उठाया है कि आखिर किस कानून के तहत ईरान को उसकी वैज्ञानिक प्रगति से रोका जा रहा है? यह कड़ा रुख संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में कूटनीति के रास्ते बंद हो सकते हैं।

परमाणु कार्यक्रम: ईरान का संप्रभु अधिकार
ईरानी राष्ट्रपति ने स्पष्ट रूप से कहा है कि परमाणु ऊर्जा और तकनीक का विकास उनके देश का कानूनी और संप्रभु अधिकार है। उन्होंने इसे बाहरी दखलअंदाजी करार देते हुए अमेरिका को आड़े हाथों लिया। पेजेशकियान के अनुसार, कोई भी बाहरी देश यह तय नहीं कर सकता कि ईरान अपनी वैज्ञानिक प्रगति को किस दिशा में ले जाए। यह बयान दिखाता है कि ईरान अब अंतरराष्ट्रीय दबाव के सामने झुकने के मूड में बिल्कुल नहीं है और अपनी जिद पर कायम है।
अमेरिका और ट्रंप की सख्त चेतावनी
एक तरफ ईरान अपने हक की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका ने दबाव और बढ़ा दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है। हालांकि, उन्होंने बातचीत को सकारात्मक बताया, लेकिन साथ ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर गंभीर संकेत भी दिए हैं। अमेरिका का मानना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है, जबकि ईरान इसे सिर्फ विकास से जोड़कर देख रहा है।
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हॉर्मुज की नाकेबंदी और युद्ध का खतरा
ईरान और अमेरिका के बीच पिछले दो महीनों से जारी संघर्ष अब खाड़ी के अन्य देशों तक फैल चुका है। मौजूदा सीजफायर की मियाद खत्म होने वाली है, जिससे तनाव और बढ़ गया है। इस बीच, ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज की फिर से नाकेबंदी कर दी है। यह रास्ता वैश्विक तेल व्यापार के लिए बहुत जरूरी है। इस नाकेबंदी ने न केवल अमेरिका को बल्कि पूरी दुनिया को आर्थिक और सैन्य मोर्चे पर चिंता में डाल दिया है।
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महायुद्ध की आहट और कूटनीतिक गतिरोध
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बातचीत बेनतीजा रही, तो यह तनाव एक बड़े महायुद्ध का रूप ले सकता है। ईरान का यह कहना कि वह अपने परमाणु अधिकारों से समझौता नहीं करेगा, कूटनीतिक रास्तों को बंद कर रहा है। सीजफायर टूटने की कगार पर है और जमीनी हालात बिगड़ते जा रहे हैं। राष्ट्रपति पेजेशकियान के कड़े तेवरों ने साफ कर दिया है कि ईरान अब आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और विस्फोटक हो सकती है।












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