ना कोई ऐलान-ना ही शोर शराबा! 14 साल की बच्ची ने की डिमांड, CM विजय ने चुपचाप बदल दी सालों पुरानी सरकारी परंपरा
CM Vijay: अभिनेता से राजनीति में आए थलपति विजय एक बार फिर चर्चा में हैं। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद से उनके कई फैसले लोगों का ध्यान खींच रहे हैं, लेकिन इस बार वजह कोई बड़ा राजनीतिक ऐलान नहीं बल्कि एक छोटी सी चीज है। विजय ने अपनी वीआईपी कुर्सी के पीछे लगा सफेद तौलिया हटवा दिया है।
आमतौर पर सरकारी दफ्तरों और बड़े अधिकारियों की कुर्सियों पर सफेद तौलिया लगा देखा जाता है, जिसे लोग वीआईपी संस्कृति का हिस्सा मानते हैं। खास बात यह है कि विजय ने यह बदलाव किसी अभियान या प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए नहीं किया, बल्कि एक 14 साल की बच्ची की अपील सुनने के बाद चुपचाप यह कदम उठाया। अब सोशल मीडिया पर लोग इसे सादगी और नई राजनीति की मिसाल बता रहे हैं।

14 साल की बच्ची की अपील बनी वजह
14 साल की क्लाइमेट एक्टिविस्ट लिसिप्रिया कंगुजम ने हाल ही में एक्स पर विजय को टैग करते हुए एक पोस्ट शेयर किया था। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि क्या भारत में वीआईपी कुर्सियों पर तौलिया लगाने की परंपरा खत्म की जा सकती है। उन्होंने कहा कि लोग पहले से जानते हैं कि मुख्यमंत्री और बड़े अधिकारी खास पदों पर होते हैं, ऐसे में इस तरह की चीजें वीआईपी संस्कृति को और बढ़ावा देती हैं।
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कंगुजम ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि मंत्री, अफसर और छोटे अधिकारी तक इस परंपरा को अपनाते हैं। उन्होंने विजय से अपील करते हुए कहा कि वह लोगों के लिए प्रेरणा हैं और अगर वह शुरुआत करेंगे तो बड़ा बदलाव आ सकता है।
विजय ने बिना शोर किए लिया फैसला
बताया जा रहा है कि पोस्ट सामने आने के करीब 24 घंटे के अंदर ही विजय ने अपनी कुर्सी से सफेद तौलिया हटवा दिया। सबसे खास बात यह रही कि इसे लेकर सरकार या मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। विजय ने बिना प्रचार किए चुपचाप यह बदलाव किया।
इसके बाद लिसिप्रिया कंगुजम ने फिर एक पोस्ट कर मुख्यमंत्री विजय का धन्यवाद किया। उन्होंने लिखा कि यह कदम दिखाता है कि मुख्यमंत्री आम लोगों की बात सुन रहे हैं और बदलाव की शुरुआत हो रही है।
सोशल मीडिया पर मिल रही तारीफ
विजय के इस कदम की सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है। कई यूजर्स ने इसे वीआईपी संस्कृति से दूरी बनाने वाला फैसला बताया है। कुछ लोगों का कहना है कि छोटी-छोटी चीजों से ही प्रशासन में सादगी का संदेश जाता है। वहीं कुछ यूजर्स का मानना है कि अगर नेता और अधिकारी ऐसे प्रतीकों से दूरी बनाएंगे तो आम लोगों के बीच बेहतर संदेश जाएगा। हालांकि सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह मामला अब तमिलनाडु की राजनीति और सोशल मीडिया दोनों जगह चर्चा का विषय बना हुआ है।












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