US Vs America: पाकिस्तान में फिर आमने-सामने होंगे अमेरिका और ईरान, दूसरे दौर की बातचीत के लिए तारीख तय
US Iran Islamabad Talks: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए 24 अप्रैल को इस्लामाबाद में दूसरे दौर की बातचीत होने की उम्मीद है। पहले दौर की चर्चा बेनतीजा रहने के बाद, इस बार पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान पर टिकी हैं। रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस पर अमेरिकी C-17 ग्लोबमास्टर विमानों की लैंडिंग और इस्लामाबाद के वीआईपी होटलों को अचानक खाली कराए जाने से यह साफ है कि कोई बड़ी हलचल होने वाली है।
सुरक्षा के कड़े घेरे और कूटनीतिक सक्रियता के बीच पाकिस्तान इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी के लिए कमर कस चुका है।

एयरबेस पर बढ़ती सैन्य हलचल
रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस पर अमेरिकी वायुसेना के विशाल C-17 विमानों का आना एक बड़े मिशन की ओर इशारा करता है। इन विमानों का इस्तेमाल आमतौर पर भारी सुरक्षा साजो-सामान और उच्च अधिकारियों की गाड़ियों को लाने के लिए किया जाता है। पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने एयरपोर्ट के आसपास की निगरानी बढ़ा दी है। इतनी बड़ी सैन्य तैयारी दर्शाती है कि अमेरिका इस बैठक को लेकर बेहद गंभीर है और अपने प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा के लिए जमीन पर पुख्ता इंतजाम कर रहा है।
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इस्लामाबाद के होटलों में सन्नाटा
शहर के सबसे सुरक्षित और आलीशान होटलों, जैसे सेरेना और मैरियट, को आम जनता के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। वहां ठहरे मेहमानों को दूसरे स्थानों पर शिफ्ट किया गया है और नई बुकिंग रोक दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, इन होटलों के कमरों की गहन तलाशी ली गई है और सुरक्षा के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। यह साफ संकेत है कि अमेरिकी और ईरानी अधिकारी यहीं रुकेंगे, जिससे इस्लामाबाद का 'रेड ज़ोन' एक किले में तब्दील हो गया है।
दूसरे राउंड की अहमियत और चुनौती
पहले दौर की बातचीत में दोनों पक्ष किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाए थे, जिससे क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बना रहा। अब 24 अप्रैल की बैठक को 'आखिरी मौके' के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच भरोसे की भारी कमी है, जो इस वार्ता को और भी चुनौतीपूर्ण बनाती है। अगर इस बार भी बात नहीं बनी, तो पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है। इसलिए, दोनों देश कुछ समझौतों के साथ मेज पर बैठने की तैयारी में हैं।
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शांति की राह में पाकिस्तान का किरदार
पाकिस्तान इस समय एक न्यूट्रल होस्ट (तटस्थ मेजबान) की भूमिका निभा रहा है। अपनी भौगोलिक स्थिति और दोनों देशों के साथ संबंधों के कारण पाकिस्तान शांति का रास्ता बनाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के लिए यह बैठक केवल कूटनीति नहीं, बल्कि अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने का भी एक मौका है। सरकार और सेना दोनों मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि बातचीत के दौरान कोई सुरक्षा चूक न हो, ताकि पूरी दुनिया में पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना हो सके।












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