Iran Vs America: ईरान ने भेजा शांति का पैगाम, लेकिन ट्रंप ने क्यों कहा- 'अभी कीमत चुकानी बाकी है'
Iran Vs America: ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव एक नए मोड़ पर आ गया है। ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से डोनाल्ड ट्रंप सरकार को 14 बिंदुओं वाला एक शांति प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, ट्रंप ने इस पर ठंडी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ईरान ने अपने किए की 'पर्याप्त कीमत' अभी नहीं चुकाई है।
इसके जवाब में ईरान ने सख्त लहजे में कहा है कि उन्होंने शांति की पहल कर दी है और अब गेंद अमेरिका के पाले में है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह बातचीत और युद्ध, दोनों स्थितियों के लिए पूरी तरह तैयार है।

ईरान की 14 सूत्रीय शर्तें
ईरान के इस नए प्रस्ताव में मुख्य रूप से समुद्री प्रतिबंधों को हटाने और सुरक्षा गारंटियों पर जोर दिया गया है। ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके समुद्री इलाकों से अपनी सेना वापस बुलाए और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी खत्म करे। इसके अलावा, ईरान ने अपनी जब्त संपत्तियों को छोड़ने, युद्ध के नुकसान का मुआवजा देने और लेबनान समेत सभी मोर्चों पर संघर्ष विराम की मांग की है। ईरान का कहना है कि इन शर्तों के बाद ही परमाणु जैसे अन्य मुद्दों पर बात होगी।
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ट्रंप का कड़ा रुख और संदेह
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए इस प्रस्ताव पर अपनी नाखुशी जाहिर की है। उनका मानना है कि ईरान का यह प्रस्ताव अमेरिका के लिए स्वीकार्य नहीं है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान के वर्तमान शासन ने पिछले 47 वर्षों में जो किया है, उसका हिसाब अभी पूरा नहीं हुआ है। अमेरिका की मुख्य चिंता ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने की है। ट्रंप के इस रुख से साफ है कि वे फिलहाल किसी भी आसान समझौते के मूड में नहीं हैं।
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पाकिस्तान की मध्यस्थता और टकराव
ईरान ने इस बार पाकिस्तान को संदेशवाहक के रूप में चुना है, ताकि अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत का रास्ता खुल सके। हालांकि, पहले दौर की बातचीत सफल नहीं रही क्योंकि दोनों देश अपनी मांगों पर अड़े हैं। जहां अमेरिका ईरान की परमाणु क्षमताओं पर लगाम चाहता है, वहीं ईरान सबसे पहले अपनी आर्थिक और समुद्री नाकेबंदी हटाना चाहता है। इस बीच अमेरिका ने शिपिंग कंपनियों को भी चेतावनी दी है कि वे होर्मुज क्षेत्र में ईरान को किसी भी तरह का भुगतान न करें।
'गेंद अब वॉशिंगटन के पाले में'
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबदी ने तेवर दिखाते हुए कहा है कि तेहरान ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है। अब यह अमेरिका को तय करना है कि वह कूटनीति का रास्ता अपनाएगा या टकराव का। ईरान का यह बयान दर्शाता है कि वह झुकने को तैयार नहीं है। अगर ट्रंप इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज करते हैं, तो खाड़ी क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ सकता है। दुनिया की नजरें अब व्हाइट हाउस के अगले आधिकारिक कदम पर टिकी हैं।












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