Iran Vs America: मिडिल ईस्ट में मचेगी तबाही या ट्रंप का 'शांति दांव' लाएगा रंग? ईरान के आखिरी जवाब ने चौंकाया
Iran Vs America: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच ईरान ने युद्ध खत्म करने के अमेरिकी प्रस्ताव पर अपना जवाब भेज दिया है। जहां एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान की घेराबंदी कर सैन्य कार्रवाई की योजना बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कूटनीति के दरवाजे भी खुले नजर आ रहे हैं।
ईरान का दावा है कि ट्रंप समझौते के लिए बेताब हैं, जबकि व्हाइट हाउस परमाणु शर्तों पर अड़ा है। यह घटनाक्रम तय करेगा कि क्षेत्र में शांति होगी या संघर्ष और गहराएगा।

Donald Trump Iran Policy: परमाणु मुद्दे पर पेंच
ईरान चाहता था कि युद्ध खत्म करने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खोलने की बात पहले हो और परमाणु चर्चा बाद में। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि परमाणु मुद्दा समझौते का मुख्य हिस्सा होना चाहिए। अमेरिका ने शर्त रखी है कि ईरान अपने प्रभावित ठिकानों से संवर्धित यूरेनियम न हटाए और न ही वहां कोई नया काम शुरू करे। ट्रंप इस बात पर अड़े हैं कि बिना परमाणु नियंत्रण के कोई भी समझौता अधूरा है।
Middle East Peace Plan: ट्रंप का रुख और भ्रम
राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि ईरान वास्तव में समझौता करना चाहता है, लेकिन वहां के नेतृत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा कि वह जानते हैं कि पर्दे के पीछे क्या बातचीत चल रही है। हालांकि, वह ईरान की आंतरिक राजनीतिक स्थिति को लेकर थोड़े संशय में दिखे। उनके बयानों से लगता है कि वह दबाव बनाकर ईरान को अपनी शर्तों पर बातचीत की मेज पर लाना चाहते हैं।
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सिचुएशन रूम में बड़ी बैठक
व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में ट्रंप ने अपनी हाई-प्रोफाइल सुरक्षा टीम के साथ करीब 45 मिनट तक मंथन किया। इस बैठक में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ जैसे दिग्गज शामिल थे। सेना के बड़े अधिकारियों ने ट्रंप को ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य एक्शन के नए प्लान की जानकारी दी। यह बैठक दिखाती है कि अगर कूटनीति फेल होती है, तो अमेरिका युद्ध के लिए भी तैयार है।
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आगे क्या होगा?
फिलहाल गेंद ईरान के पाले में है। पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए संवाद जारी है, जो यह संकेत देता है कि बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। अगर ईरान परमाणु शर्तों को मान लेता है, तो 'महायुद्ध' टल सकता है। लेकिन यदि अमेरिकी नाकेबंदी और सैन्य दबाव बढ़ता है, तो मिडिल ईस्ट में स्थिति और विस्फोटक हो सकती है। आने वाले कुछ दिन वैश्विक शांति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।












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