ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड को किया जा सकता है प्रतिबंधित, जर्मनी ला रहा प्रस्ताव, भारत किसका साथ देगा?
16 सितंबर को कुर्द-ईरानी कार्यकर्ता महसा अमिनी की कथित हिरासत में हत्या के बाद ईरान में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। मानवाधिकार परिषद (HRC) में जर्मनी की विदेश मंत्री एनालेना बारबॉक ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ईरान की चल रही कार्रवाई पर एचआरसी के एक विशेष सत्र की मांग की है। इस विशेष सत्र में जर्मनी और यूरोपीय संघ ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के खिलाफ कड़े कदम उठा सकता है। इस विशेष सत्र में भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

मानवाधिकार परिषद के एक सदस्य के रूप में भारत ने हालांकि अब तक निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा की निंदा करने से इनकार कर दिया है।द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय पक्ष का मानना है कि जर्मन मंत्री एनालेना बारबॉक की एचआरसी की विशेष बैठक की मांग से भारत की स्थिति असुविधाजनक हो गई है, क्योंकि यूनिवर्सल पीरियोडिक रिव्यू (यूपीआर) का सत्र 7 से 18 नवंबर के दौरान आयोजित किया जाएगा। भारत से, यूपीआर के सत्र में बहरीन, इक्वाडोर, ट्यूनीशिया, मोरक्को, इंडोनेशिया, फिनलैंड, यूनाइटेड किंगडम, अल्जीरिया, फिलीपींस, ब्राजील, पोलैंड, नीदरलैंड और दक्षिण अफ्रीका भी शामिल होंगे। सूत्रों ने संकेत दिया कि इस तथ्य को देखते हुए कि सत्र के दौरान 14 देश यूपीआर से गुजरेंगे, ईरान के मानवाधिकार परिदृश्य पर चर्चा करना बहुत मुश्किल है।
पश्चिमी गुट का समर्थन
जर्मनी को वैश्विक निकाय को बहस करने के लिए मजबूर करने के लिए एचआरसी में लगभग 17 देशों के समर्थन की आवश्यकता होगी। जर्मनी चूंकि एक प्रमुख शक्ति रहा है ऐसे में इस तरह के समर्थन को जुटाना उसके लिए बहुत मुश्किल नहीं है। एचआरसी में ईरान के खिलाफ पश्चिमी देशों के अभियान से भारत पर दबाव पड़ने की उम्मीद है। बीते महीने ब्रिटेन, तुर्की, अमेरिका और कुछ अन्य पश्चिमी देशों ने उइगुर मुसलमानों व अन्य अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे कथित शोषण पर अगले साल मार्च बहस का प्रस्ताव रखा था, लेकिन भारत ने इसमें वोटिंग न कर एक तरह से चीन का साथ दिया था।
उइगर मुद्दा
उइगर मुद्दे पर चीन को घेरने के अभियान के दौरान, विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि भारत मानवाधिकारों का सम्मान करता है। भारत ने इस मामले में वोट को लेकर जो फैसला किया वो लंबे वक्त से अपनाई गई नीति के अनुसार है जिसके तरह हम मानते हैं कि किसी मुल्क संबंधी प्रस्ताव अधिक कारगर नहीं होते। इस तरह के मुद्दों को सुलझाने के लिए भारत दोनों पक्षों में बातचीत का समर्थक है। यह समझा जाता है कि भारतीय पक्ष एक समान तर्क के साथ तैयार हो सकता है यदि ईरान को एचआरसी में घेर लिया जाता है। हालांकि ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ राज्य के नेतृत्व वाली हिंसा पर अपनी स्थिति बताने के लिए भारत की जरूरत पड़ सकती है। ईरान जो कि भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्तिकर्ता देश है। भारत, इस चीज का विशेष ध्यान रखेगा कि कहीं पश्चिमी देशों के अभियान में वह अपनी स्थिति खराब न करे।












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