मिडिल ईस्ट में बड़ा डिप्लोमेटिक डेवलपमेंट, सऊदी अरब के प्रिंस सलमान से मिले ईरान के विदेश मंत्री
Iran-Saudi Arab News: मिडिल ईस्ट में बहुत बड़ा डिप्लोमेटिक डेलवपमेंट हुआ है और ईरान के विदेश मंत्री ने जेद्दा में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की है, जो दोनों देशों के बीच सामान्य हो रहे रिश्ते की दिशा में बहुत बड़ा कदम है।
ईरान के विदेश मंत्री ने सऊदी अरब की अपनी यात्रा के दौरान शुक्रवार को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की है, जो इस बात का संकेत है, कि कैसे दोनों देश वर्षों की उथल-पुथल के बाद तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
सऊदी अरब राज्य के सरकारी टेलीविजन ने लाल सागर के बंदरगाह शहर जेद्दा में ईरानी विदेश मंत्री होसैन अमीराब्दुल्लाहियन के साथ बैठे प्रिंस मोहम्मद की तस्वीरें प्रसारित कीं है।

सऊदी-ईरान में डिप्लोमेटिक बातचीत
सऊदी अरब के सरकारी टेलीविजन ने उनके बीच हुई बातचीत के कुछ ठोस विवरण दिए हैं, जिसमें कहा गया है, कि उन्होंने संबंधों और "सहयोग के भविष्य के अवसरों" की समीक्षा की। ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी बातचीत की पुष्टि की, लेकिन बातचीत को लेकर कोई विवरण नहीं दिया।
ईरान के विदेश मंत्री अमीराब्दुल्लाहियन अपने समकक्ष प्रिंस फैसल बिन फरहान के साथ बैठक के लिए गुरुवार को सऊदी की राजधानी रियाद पहुंचे थे।
आपको बता दें, कि इसी साल मार्च में चीन की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच शांति स्थापित हुई थी।
हालांकि, चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, विशेषकर ईरान के बढ़ते परमाणु कार्यक्रम, यमन में सऊदी के नेतृत्व वाले युद्ध और क्षेत्र के जलमार्गों की सुरक्षा को लेकर अभी भी दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुए हैं, लेकिन इन मुलाकातों को देखते हुए इस बात की संभावना बनी है, कि दोनों देश रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
ईरान और सऊदी अरब मार्च में संबंधों को बहाल करने और दो महीने के भीतर राजनयिक मिशनों को फिर से खोलने के लिए सहमत हुए थे, और इसके साथ ही एक साल की लंबी दरार के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम हो गया है, जो पिछले साल यमन से सीरिया तक संघर्ष में काफी गहरा गया था।
सालों से तनावपूर्ण चल रहे थे संबंध
दोनों देशों के बीच के संबंध वैसे तो हमेशा से ही अच्छे नहीं रहे हैं, लेकिन साल 2016 में उस वक्त कड़वाहट काफी बढ़ गई थी, जब सऊदी अरब ने शिया मुस्लिम धर्मगुरु निम्र अल-निम्र को फांसी दे दी थी। इसके बाद ईरान में भारी प्रदर्शन किए गये थे और प्रदर्शनकारियों ने ईरान में स्थिति सऊदी अरब के राजनियक मिशनों पर भी हमला कर दिया था, जिसके बाद सऊदी ने ईरान के साथ अपने औपचारिक संबंध खत्म कर लिए थे।
सऊदी अरब और ईरान को फारस की खाड़ी अलग करता है और दोनों देश, दशकों से लंबे समय से चली आ रही सुरक्षा और सांप्रदायिक तनाव की वजह से विभाजित रहे हैं। इन दोनों ही देशों के बीच क्षेत्रीय प्रभुत्व के लिए भी गहरी प्रतिस्पर्धा रही है। लेकिन, इस साल मार्च में चीन ने आश्चर्यजनक भूमिका निभाते हुए, दोनों देशों को करीब ला खड़ा किया है।
चीन की इस कोशिश ने निश्चित तौर पर मध्य पूर्व में एक नई भू-राजनीति का गठन किया है, और ऐसा पहली बार हुआ है, जब अमेरिका की शक्ति को मध्य पूर्व में काफी कमजोर माना जा रहा है और चीन अब मध्य पूर्व में अमेरिका की जगह एक नई ताकत के तौर पर देखा जा रहा है।












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