UN में बोले ईरान के विदेश मंत्री: इजरायल ने हम पर थोपा युद्ध, दुनिया चुप्पी तोड़कर इंसाफ का साथ दें
Iran Israel War 2025 News in Hindi: ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराकची ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में इजरायल द्वारा ईरानी क्षेत्र पर किए गए हालिया हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे "बिना उकसावे की आक्रामकता" और "गंभीर अन्याय" करार दिया। जिनेवा में शनिवार को परिषद को संबोधित करते हुए अराकची ने कहा, "यह मेरे लोगों पर थोपा गया एक अन्यायपूर्ण युद्ध है।"
उन्होंने कहा कि इस आक्रामकता के खिलाफ सभी सदस्य देशों की कानूनी और नैतिक ज़िम्मेदारी बनती है कि वे चुप्पी तोड़ें और इंसाफ का साथ दें। अराकची के मुताबिक, 13 जून 2025 से शुरू हुए इन हमलों में सिर्फ सैन्य ठिकानों को नहीं बल्कि शिक्षाविदों, आम नागरिकों, रिहायशी इलाकों, सार्वजनिक संरचनाओं, अस्पतालों और विदेश मंत्रालय तक को निशाना बनाया गया है।

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ईरान के अनुसार, इजरायल की इन "आश्चर्यजनक सैन्य कार्रवाइयों और आतंकवादी अभियानों" में अब तक 400 से अधिक ईरानी नागरिक मारे जा चुके हैं और 3,000 से अधिक घायल हुए हैं।
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अराकची ने खुलासा किया कि ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों को भी हमलों का निशाना बनाया गया, जबकि ये पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि "इन पर हमले युद्ध अपराध हैं, जिनसे रेडियोधर्मी रिसाव के कारण पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।"
विदेश मंत्री ने ज़ोर देते हुए कहा, "ईरान, जो कि संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का संस्थापक सदस्य है, न्याय, कानून के शासन और मानवीय मूल्यों के लिए आप सभी से खड़ा होने की उम्मीद करता है।" उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान को अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा की रक्षा का अधिकार है, जैसा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 में स्पष्ट रूप से मान्यता प्राप्त है।
अराकची ने कहा कि इजरायल के ये कृत्य न सिर्फ युद्ध अपराध हैं, बल्कि मानवता के खिलाफ भी अपराध हैं, जो अंतरराष्ट्रीय शांति और कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं।
उन्होंने कहा, "इजरायल की बर्बरताएं पहले से ही कब्जे वाले फिलिस्तीन में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून को कमजोर कर चुकी हैं, और अब ईरान के खिलाफ भी 1949 के जिनेवा समझौतों का गंभीर उल्लंघन किया जा रहा है।"
अराकची ने स्पष्ट किया कि ईरान की हर कार्रवाई अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के तहत है और इजरायल की आक्रामकता को कोई भी कानूनी या नैतिक आधार देना, अपराध में साझेदारी के बराबर होगा।












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