Iran Israel War 2025: ईरान या इजरायल? किसके साथ हैं दुनिया के ताकतवर देश, भारत क्या भूमिका निभा रहा?
Iran Israel War 2025: ईरान और इजरायल के बीच चल रहा युद्ध अब सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं रह गई है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति का अखाड़ा बन चुका है। 13 जून 2025 से जारी ईरान-इजरायल की जंग में दुनिया का कौनसा ताकतवर देश किसके साथ है? यह सवाल अब केवल मध्य-पूर्व की राजनीति नहीं बल्कि अमेरिका, यूरोप, एशिया और दुनिया की बड़ी शक्तियों के एजेंडे का हिस्सा बन चुका है।
ईरान द्वारा परमाणु परीक्षण की कोशिश की वजह से ईरान-इजरायल के बीच शुरू यह संघर्ष सिर्फ मिसाइलों और हवाई हमलों तक सीमित नहीं है। यह दुनिया की बदलती रणनीतिक ध्रुवीकरण, कूटनीति और भविष्य की सैन्य नीतियों का भी परीक्षण है। भारत जैसे देश जहां तटस्थता के साथ सयंम दिखा रहे हैं, वहीं अमेरिका के अंदर भी नीतिगत विरोध उभर रहा है।

ट्रंप का खुला वार -'हमें खामेनेई की लोकेशन पता है'
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को खुली चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि हमें पता है कि ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई कहां छिपे हैं? वे आसान टारगेट हैं, लेकिन हम उन्हें अभी नहीं मारने जा रहे। अमेरिका की सहनशीलता खत्म हो चुकी है। ट्रंप के इस बयान को ईरान के लिए एक सख्त चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने 40 से अधिक फाइटर जेट्स यूरोप भेज दिए हैं, जिससे संभावित हमले की अटकलें तेज हो गई हैं।
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G7 समिट में मतभेद: ट्रंप ने साझा बयान पर नहीं किए हस्ताक्षर
कनाडा में चल रही G7 समिट में ज्यादातर देशों ने इजरायल का समर्थन किया और ईरान के खिलाफ बयान जारी किया, लेकिन ट्रंप ने इस साझा बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। ट्रंप का कहना था कि "हम सिर्फ संघर्षविराम नहीं, जंग का असली अंत चाहते हैं।" ट्रंप समिट को बीच में छोड़कर अमेरिका लौट गए और व्हाइट हाउस में नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के साथ आपात बैठक की।
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भारत की रणनीति: तटस्थ लेकिन सतर्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी G7 समिट में हिस्सा लेने कनाडा पहुंचे। उन्होंने दक्षिण कोरिया और मैक्सिको जैसे देशों के नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। भारत ने ईरान-इजरायल युद्ध 2025 में तटस्थ रुख अपनाया है और SCO (शंघाई सहयोग संगठन) के उस बयान से भी दूरी बनाई जिसमें इजरायल की आलोचना की गई थी।
Pro-Iran countries: ईरान समर्थक देश
सऊदी अरब: इजराइल की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।
मिस्र: 21 मुस्लिम देशों के साथ मिलकर ईरान के समर्थन में संयुक्त बयान जारी किया।
कतर और UAE: खुलकर ईरान के पक्ष में आए।
Pro-Israel countries: इजरायल समर्थक देश
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना: ईरान की आलोचना करते हुए इजरायल का समर्थन किया।
अमेरिका: ट्रंप की चेतावनी ने साफ कर दिया कि अमेरिका अभी इजरायल के साथ खड़ा है, लेकिन युद्ध के तरीके को लेकर मतभेद है।
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