Iran Israel conflict: अब आर-पार की जंग! भारत में ईरान के राजदूत की अमेरिका को सीधी चुनौती
Iran Israel conflict: ईरान और इज़राइल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली ने एक कड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने इस सैन्य संघर्ष को केवल एक राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि 'सत्य और असत्य' के बीच का महासंग्राम बताया है।
फथली का मानना है कि अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है और यह केवल ईरान पर नहीं, बल्कि मानवता और न्याय की रक्षा करने वाले हर राष्ट्र की गरिमा पर हमला है। यह बयान वैश्विक कूटनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है।

Mohammad Fathali statement: सत्य और असत्य का संघर्ष
राजदूत फथली के अनुसार, यह युद्ध केवल सीमाओं की लड़ाई नहीं है, बल्कि नैतिक मूल्यों का टकराव है। उनके मुताबिक, एक तरफ वे राष्ट्र हैं जो मानवीय गरिमा, न्याय और स्वतंत्रता के पक्षधर हैं, जबकि दूसरी तरफ वे ताकतें हैं जो दमन और अन्याय के सहारे दुनिया पर अपना प्रभुत्व जमाना चाहती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान इस संघर्ष में 'सत्य' का प्रतिनिधित्व कर रहा है और वह किसी भी कीमत पर अन्याय के सामने नहीं झुकेगा।
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US Israel strikes on Iran: मानवीय गरिमा पर हमला
ईरानी राजदूत ने अमेरिका और इज़राइल की सैन्य गतिविधियों को सीधे तौर पर मानवीय अधिकारों और आत्मसम्मान पर प्रहार बताया है। उनका कहना है कि हर राष्ट्र को स्वतंत्र रूप से जीने और अपने भविष्य का फैसला करने का अधिकार है। जब शक्तिशाली देश अपनी सैन्य ताकत का दुरुपयोग कर छोटे या स्वतंत्र देशों को दबाने की कोशिश करते हैं, तो यह न केवल उन देशों के लिए, बल्कि पूरी मानवता की गरिमा के लिए एक बड़ा खतरा बन जाता है।
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अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन
बयान में इस बात पर जोर दिया गया है कि अमेरिका और इज़राइली शासन की सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय नियमों की धज्जियां उड़ा रही है। फथली का तर्क है कि संप्रभु देशों पर इस तरह के हमले वैश्विक शांति और सुरक्षा के सिद्धांतों के खिलाफ हैं। उन्होंने दुनिया का ध्यान इस ओर खींचा कि यदि आज इन देशों को नहीं रोका गया, तो अंतरराष्ट्रीय कानून केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे और कोई भी स्वतंत्र राष्ट्र सुरक्षित महसूस नहीं कर पाएगा।
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ईरान का कड़ा रुख
अंत में, राजदूत ने स्पष्ट संदेश दिया कि ईरान अपनी स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस सैन्य आक्रामकता को 'क्रूर' करार देते हुए कहा कि ईरान अपने भविष्य को निर्धारित करने के अधिकार से पीछे नहीं हटेगा। यह बयान दिखाता है कि ईरान इस संघर्ष को केवल एक क्षेत्रीय विवाद नहीं मानता, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर न्याय और दमन के बीच की एक निर्णायक लड़ाई के रूप में देखता है।












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