Fact Check: क्या मलबे में दबे ऐसे मिली खामेनेई की लाश? ईरानी लीडर की ‘आखिरी तस्वीर’ का सच जान चौंक जाएंगे
Ali Khamenei Fact Check: अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग के बीच सोशल मीडिया पर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की कथित "आखिरी तस्वीर" तेजी से वायरल हो रही है। इस तस्वीर में खामेनेई जैसा दिखने वाला बुजुर्ग शख्स मलबे और ईंटों के बीच दबा दिखाई दे रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह तस्वीर खामेनेई की मौत के बाद की है और इसे इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने जारी किया है।
एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर कई यूजर्स इसे "खामेनेई की अंतिम तस्वीर" बताकर शेयर कर रहे हैं। कुछ पोस्ट में लिखा गया है कि यही वह तस्वीर है जो दिखाती है कि उनकी मौत किस हालात में हुई। कुछ लोगों ने दावा किया है कि ऐसी तस्वीरें अमेरिका जारी करता है।

वनइंडिया हिंदी की पड़ताल में क्या निकला? (Fact Check Investigation)
वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए वनइंडिया हिंदी ने इसकी विस्तार से जांच की। सबसे पहले वायरल फोटो से जुड़े दावे के आधार पर गूगल ओपन सर्च टूल और रिवर्स इमेज का इस्तेमाल किया गया।
सर्च के नतीजों में कोई भी ऐसी विश्वसनीय खबर नहीं मिली, जो यह साबित करे कि यह तस्वीर खामेनेई की मौत के बाद की है या किसी आधिकारिक एजेंसी ने इसे जारी किया है।
अगर सच में ऐसी तस्वीर मौजूद होती, तो अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इसकी व्यापक चर्चा जरूर होती। लेकिन किसी भी प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में इस फोटो का जिक्र नहीं मिला। ईरान ने अभी तक खामेनेई की आखिरी तस्वीर या वीडियो जारी नहीं की है। ना ही इजरायल या अमेरिका ने अब तक खामेनेई के आखिली पलों के कोई फुटेज जारी की है।
सोशल मीडिया पोस्ट में देखें, क्या दावे कर रहे हैं लोग?

गूगल लेंस से भी नहीं मिला सबूत (Reverse Image Search)
पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए वायरल तस्वीर पर गूगल लेंस और अन्य रिवर्स इमेज सर्च टूल का इस्तेमाल किया गया। इन टूल्स से भी ऐसी कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई जिससे यह साबित हो सके कि खामेनेई के नाम पर वायरल की जा रही फोटो असली है या इसे किसी आधिकारिक स्रोत ने जारी किया है। इससे यह शक और मजबूत हुआ कि तस्वीर संदिग्ध या भ्रामक हो सकती है।

इंस्टाग्राम पर मिला AI वीडियो (Source Tracking)
खोज के दौरान एक अहम सुराग मिला। यह तस्वीर 'Pouria Zeraati' नाम के एक ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट के इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में दिखाई दी। यह वीडियो 3 जनवरी 2026 को पोस्ट किया गया था। जबकि खामेनेई की मौत की खबरें 28 फरवरी 2026 से जुड़ी बताई जा रही हैं।
वीडियो को ध्यान से देखने पर साफ लगता है कि यह किसी AI टूल की मदद से तैयार किया गया कंटेंट है। इसमें दिख रही तस्वीर भी उसी वीडियो का हिस्सा है, जिसे बाद में काटकर सोशल मीडिया पर अलग से वायरल किया जाने लगा। (नीचे वीडियो का लिंक दिया गया है, आप खुद देख सकते हैं)
AI डिटेक्शन टूल में क्या पता चला? (AI Verification)
वनइंडिया हिंदी ने इस वीडियो और तस्वीर को AI डिटेक्शन टूल्स की मदद से भी जांचा। टूल्स के विश्लेषण में संकेत मिला कि यह कंटेंट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार किया गया है। इसके अलावा अब तक अमेरिका, इजरायल या ईरान की किसी भी आधिकारिक एजेंसी ने खामेनेई की मौत के बाद की कोई तस्वीर जारी नहीं की है। इससे यह साफ हो जाता है कि वायरल तस्वीर असली नहीं है।
फोटो में दिख रहे संकेत क्या बताते हैं?
- तस्वीर को ध्यान से देखने पर कई ऐसे संकेत मिलते हैं जो बताते हैं कि यह फोटो वास्तविक नहीं है।
- चेहरे की बनावट और त्वचा का टेक्सचर असामान्य दिखता है।
- मलबे और चेहरे के बीच रोशनी का एंगल अलग है।
- फोटो में डिटेल्स असमान और डिजिटल रूप से जनरेटेड लगती हैं।
- ये सभी संकेत आमतौर पर AI जनरेटेड इमेज या फोटो एडिटिंग में दिखाई देते हैं।
निष्कर्ष (Fact Check Result)
फैक्ट चेक में सामने आया कि खामेनेई की मौत के बाद की बताई जा रही वायरल तस्वीर फर्जी और AI से तैयार की गई है। सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा कि यह उनकी "आखिरी तस्वीर" है, पूरी तरह भ्रामक है। फिलहाल किसी भी आधिकारिक स्रोत ने खामेनेई की मौत के बाद की तस्वीर सार्वजनिक नहीं की है।

Fact Check
दावा
दावा: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की आखिरी तस्वीर आई सामने।
नतीजा
फैक्ट: ये दावा फर्जी है, सोशल मीडिया पर अयातुल्ला अली खामेनेई की आखिरी तस्वीर के नाम से वायरल फोटो AI से बनाई गई है।












Click it and Unblock the Notifications