चाबहार पर आई भारतीय अखबार की रिपोर्ट को ईरान ने कहा- Fake news
तेहरान। ईरान ने उन सभी खबरों को सिरे से नकार दिया है जिसमें कहा जा रहा है कि अफगानिस्तान बॉर्डर से लगे चाबहार रेल प्रोजेक्ट से भारत को हटा दिया गया है। ईरान की सरकार की तरफ से भारत की मीडिया में आ रही इस तरह की खबरों को पूरी तरह से झूठा करार दे दिया गया है। मंगलवार को जो खबरें आई थीं उसके मुताबिक ईरान ने अब चाबहार में आने वाले एक बड़े रेल प्रोजेक्ट का जिम्मा चीन को सौंप दिया है। कहा गया था कि भारत, अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से अब इस रेल प्रोजेक्ट को फंड नहीं देना चाहता है।

चाबहार रेलवे के कोई डील नहीं हुई
ईरान के पोर्ट्स एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के उप-प्रमुख फरहाद मुंतसिर ने एक रिपोर्ट को पूरी तरह से झूठा करार दिया है। उनका कहना है कि ईरान ने जाहेदान-चाबहार रेलवे के लिए भारत से कोई डील ही नहीं की थी। मुंतसिर का कहना है, 'ईरान ने भारत के साथ चाबहार में सिर्फ दो तरह के निवेश के लिए ही समझौता किया। पहला समझौता पोर्ट की मशीनरी और उपकरण से जुड़ा है और दूसरा भारत की तरफ से करीब 150 मिलियन डॉलर के निवेश से जुड़ा है।' ईरान की न्यूज एजेंसी इरना की तरफ से बुधवार को यह बात कही गई है। उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार की तरफ से चाबहार पोर्ट के लिए भारतीय निवेशों की एक सूची बनाई थी जिसमें चाबहार का रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर और रेलवे भी शामिल था, लेकिन बातचीत के दौरान रजामंदी नहीं बन सकी।'

क्या लिखा था अखबार में
उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों को चाबहार में भारत और ईरान के बीच जारी सहयोग से कोई लेना-देना नहीं है। द हिंदु की तरफ से जो रिपोर्ट आई थी उसमें दावा किया गया था कि ईरान की सरकार ने भारत की हिस्सेदारी के बिना ही लंबे समय से अटके रेल प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। अखबार ने लिखा था कि चाबहार-जाहेदान रेल लाइन के लिए एक आयोजन पिछले हफ्ते हुआ था जिसमें ट्रैक बिछाया गया है है। इस रेल लाइन अफगानिस्तान की तरफ जारगंज की तरफ से जाएगी। अखबार का कहना था कि इस रेल ट्रैक की वजह से व्यापार के अलावा दोनों देशों के बीच मूवमेंट आसान हो सकेगा।

पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट का जवाब
अखबार के मुताबिक भारतीय कंपनी इरकॉन को इस प्रोजेक्ट के लिए हर संभव मुहैया करानी थी जिसकी लागत करीब 1.6 बिलियन डॉलर है। साल 2018 में अमेरिका ने चाबहार पोर्ट को छूट दी थी। यह छूट साल 2012 के ईरान फ्रीडम एंड काउंटर प्रॉलिफेरेशन एक्ट के तहत मिली थी। लेकिन अखबार ने दावा किया कि भारत में अधिकारियों को इस बात की जानकारी ही नहीं है। ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी कई बार इस बंदरगाह को ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण करार दे चुके हैं। चाबहार पोर्ट, पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को भारत का जवाब था।

क्यों भारत के लिए खास है चाबहार पोर्ट
जून 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ईरान दौरे पर पहुंचे थे। उसी समय चाबहार पोर्ट पर डील को मंजूरी मिली थी। ईरान का चाबहार बंदरगाह भारत के लिए एक ट्रंप कार्ड की तरह है। यहां से भारत अफगानिस्तान तक अपनी पकड़ आसानी से पहुंच बना सकता है। न सिर्फ अफगानिस्तान बल्कि यहां से रूस और मध्य एशिया में भी पहुंचना आसान होगा। इसके साथ ही यहां से भारत, पाकिस्तान और चीन की नेवी पर भी नजर रख सकेगा। चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट, भारत और ईरान के अलावा अफगानिस्तान के लिए भी काफी खास है। इस प्रोजेक्ट के बाद अफगानिस्तान मिडिल ईस्ट और यूरोप तक कई अहम वस्तुओं का निर्यात कर सकता है।












Click it and Unblock the Notifications