अब इस्लामिक शासन से चाहिए आजादी, जानिए एक बूढ़ी महिला ने कैसे ईरान में क्रांति की आग लगाई?

ईरान की राजधानी तेहरान से करीब 300 मील यानि 500 किलोमीटर की दूरी पर सानंदाज स्थिति है, जो एक कुर्दिश शहर है, जो महसा अमीनी की मौत के बाद प्रदर्शन का केन्द्र बना हुआ है।

Iran Anti-Hijab Protests: एक इस्लामिक दमनकारी शासन में रहकर पली-बढ़ी 35 साल की यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट शारो ने कभी नहीं सोचा होगा, कि वह ईरान में रहते हुए विद्रोह की आवाज लगाएगी और अपने साथियों के मुंह से 'इस्लामिक शासन का विनाश हो' ये शब्द कभी सुनेगी। शारो बताती है, कि उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी, कि वो खुद 'तानाशाह की मौत हो' जैसे नारे कभी लगाएगी। शारो को नहीं पता था, कि उसके अंदर कितना गुस्सा भरा हुआ और उसे नहीं पता है, कि वो कैसे देश की इस्लामिक सरकार को गिराने के लिए हजारों-लाखों की भीड़ में शामिल हो गई है। ईरान टाइम बम पर खड़ा एक इस्लामिक देश है, जिसकी तरह बाकी दुनिया से ज्यादा बाकी के इस्लामिक देश देख रहे हैं, क्योंकि अगर ईरान में महिलाओं की क्रांति कामयाब होती है, तो अगला नंबर उनका होगा।

भड़कता ही जा रहा है लोगों का गुस्सा

भड़कता ही जा रहा है लोगों का गुस्सा

ईरान की मोरल पुलिस की हिरासत में महसा अमीनी की दर्दनाक मौत के अब तीन हफ्ते से ज्यादा बीत चुके हैं, लेकिन ईरानी महिलाओं के दिल में गुस्से की आग और भड़कती ही जा रही है, जिसने इस्लामिक शासन की पेशानी पर पसीने ला दिए हैं। राष्ट्रपति रईसी महिलाओं के गुस्से को अपनी सैन्य और पुलिस ताकत से कुचलना चाहते हैं, लेकिन लोगों का कहना है, कि 'अब दिल से डर खत्म हो चुका है।' ऐसे में फिर पुलिस क्या करे और कोई सरकार क्या करे? शारो बताती है, कि महसा अमीनी की मौत के तीन हफ्ते बीत जाने के बाद कई ईरानी युवितियों को अभी तक मौत के घाट उतार दिया गया है, जिसने शासन के खिलाफ गुस्से को और भड़का दिया है। स्वतंत्र रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी तक ईरान में 185 लोगों की मौत पुलिस की कार्रवाई में हो चुकी है और उत्तर पश्चिमी ईरान के कुर्दिश गृह जिले के सानंदाज शहर विरोध का केन्द्र बना हुआ है। ईरान का ये सबसे गर्म शहर है, जो इन दिनों आंदोलन की आग में दहक रहा है। टेलीग्राम के जरिए एसोसिएटेड प्रेस से बात करते हुए शारो बताती है, कि "हम टाइम-बम की तरह कुछ होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।"

प्रदर्शन के केन्द्र के बारे में जानिए

प्रदर्शन के केन्द्र के बारे में जानिए

ईरान की राजधानी तेहरान से करीब 300 मील यानि 500 किलोमीटर की दूरी पर सानंदाज स्थिति है, जो एक कुर्दिश शहर है, जो महसा अमीनी की मौत के बाद प्रदर्शन का केन्द्र बना हुआ है। इस विरोध प्रदर्शन ने पूरे ईरान को झकझोर कर रख दिया है। सानंदाज की सड़के पिछले कई दिनों से जाम हैं और यहां की महिलाओं का बस एक ही काम बचा है, सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होना। इस शहर के अलग अलग चौराहों पर अलग अलग सभाएं होती रहती हैं और इस भीड़ का नेतृत्व कोई एक शख्स नहीं, बल्कि पूरा शहर कर रहा है। हर सभा का बस एक ही मकसद है, इस्लामिक सरकार को उखाड़ फेंकना। इन सबके बीच अकसर पुलिस की भी कार्रवाई होती है, जिससे माहौल और भी ज्यादा तनावपूर्ण हो जाता है। राइट्स मॉनिटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सानंदाज में शनिवार को फिर से तनाव उस वक्त बढ़ गया, जब पुलिस ने दो प्रदर्शनकारियों की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस की गोलीबारी में कई लोग घायल भी हुए, जिसके बाद अब पूरे शहर को किला बनाकर लोगों को कैद कर लिया गया है।

प्रदर्शन को कैसे कुचल रही है सरकार?

प्रदर्शन को कैसे कुचल रही है सरकार?

एसोसिएटेड प्रेस ने सानंदाज में प्रदर्शन में शामिल छह महिला कार्यकर्ताओं से बात की, जिन्होंने कहा कि, सरकार दमन की रणनीति अपना रही है, जिसमें प्रदर्शनकारियों को बुरी तरह से पीटा जाता है, गोला-बारूद का उपयोग किया जाता है और इंटरनेट बंद कर दिया गया है। जिससे कई बार प्रदर्शन की रफ्तार बनाए रखने में मुश्किल होती है। फिर भी विरोध प्रदर्शन जारी है, साथ ही सविनय अवज्ञा आंदोलन भी चलता रहता है। महिलाओं ने कहा कि, शहर के ज्यादातर व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने के लिए अपनी दुकानों को स्वेच्छा से बंद पर दिया है और प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए दुकानदार सामने आए हैं। इन महिला प्रदर्शनकारियों ने पुलिसिया दमन से बचने के लिए अपनी नामों का खुलासा नहीं किया।

क्या प्रदर्शन को मिल रहा मर्दों का साथ?

ईरान में महिलाओं का प्रदर्शन इसलिए भी पूरी रफ्तार से चल रहा है, क्योंकि उसे समाज के सभी वर्गों का साथ हासिल है। खासकर युवा पूरी ताकत से महिलाओं के साथ हैं। इस्लामिक सरकार के खिलाफ समाज के हर वर्ग से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आ रही है और सभी वर्ग के लोग महिलाओं के हक की आजादी मांग रहे हैं। उनकी मांग है, महिला, जिंदगी और आजादी। कपड़े डिजाइन करने वाली 38 साल की एक महिला अफसाना ने कहा कि, "प्रदर्शनकारियों के एक महत्वपूर्ण समूह के गठन से पहले अमिनी परिवार पर महसा को जल्दी से दफनाने का दबाव था। महसा अमीनी को दफन करने की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन फिर देखते ही देखते पूरा कब्रिस्तान और कब्रिस्तान वाली सड़कें भर गईं। प्रदर्शनकारियों ने एक आवाज में परिवार के साथ एकजुट होने का वादा किया। वहीं, 32 साल की एक और महिला रोजान, जो हाउस वाइफ है, उन्होंने कहा कि, वो व्यक्तिगत तौर पर महसा अमीनी को नहीं जानती है, लेकिन अब वो उसके लिए प्रदर्शन में शामिल है और अपने हक के लिए आवाज बुलंद कर रही है।

महिलाओं की अलग अलग कहानी

महिलाओं की अलग अलग कहानी

रोजान बताती हैं, कि "मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ था।" उन्होंने कहा कि, साल 2013 में महसा अमिनी की तरह वह एक दोस्त के साथ राजधानी गई थी, जब उसे मोरल पुलिस ने पकड़ लिया था, क्योंकि उसका अबाया (महिलाओं के पहनने वाला कपड़ा) जो अनिवार्य ड्रेस कोड का हिस्सा है, वह बहुत छोटा था। उसे उसी फैसिलिटी केन्द्र में ले जाया गया, जहां बाद में अमिनी की मृत्यु हो गई थी। उन्होंने कहा कि, फैसिलिटी केन्द्र के अंदर उससे कई पेपर्स पर दस्तखत करवाए गये, उंगलियों के निशान लिए गये, उसे अपराधियों की तरह सलूक किया गया और अपराध की घोषणा पर हस्ताक्षर करवाया गया। रोजान बताती हैं कि, ये सब काफी अपमानजनक था, कि आपके कपड़े के लिए आप कई घंटे तक दर्जनों पुलिसवालों के बीच घिरी रहती हैं और आप एक अपराधी की तरह उनके सामने खड़ी रहती हैं।

बूढ़ी महिला ने जलाई क्रांति की मसाल

समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में हिजाब हटाने की लड़ाई की शुरूआत एक बूढ़ी महिला के एक कदम से शुरू हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है, कि जब महसा अमीनी का अंतिम संस्कार कर दिया गया, तो वहां पर हजारों लोगों की भीड़ मौजूद थी, उस वक्त एक बूढ़ी महिला धीरे से चलकर आगे बढ़ती है और फिर एक तेज इशारा करते हुए अपने सिर से अपना हिजाब निकालकर हवा में लहराते हुए फेंक देती है। बूढ़ी महिला के ऐसा करते हुए वहां मौजूद एक के बाद एक महिलाओं ने अपने हिजाब उतारने शुरू कर दिए और फिर देखते ही देखते ईरान में हिजाब की होली जलाई जाने लगी। महसा अमीनी को दफनाने से तीन दिन पहले सानंदाज से तमाम प्रदर्शनकारियों को हटा दिया गया था, लेकिन दफनाने के दिन एक बार फिर से महसा अमीनी का शहर प्रदर्शनकारियों की भीड़ ले पट गया। वहीं, एक वकील दुन्या कहती हैं, कि "हमारे ग्रुप की लगभग सभी महिलाएं अब जेल में हैं।" उन्होंने कहा कि, इंटरनेट बंद होने से प्रदर्शनकारियों के लिए शहरों और बाहरी दुनिया में एक दूसरे के साथ संवाद करना मुश्किल हो गया है। लेकिन, महिलाएं कहती हैं, कि वो डटी रहेंगी और उस वक्त तक डटी रहेंगी, जब तक उन्हें उनका अधिकार नहीं मिल जाता है।

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