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बेकाबू होकर फिसल गया था अंतरिक्ष स्टेशन, 45 मिनट में मचा तूफान, रूसी गलती पड़ती दुनिया पर भारी!

अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन बहुत बड़े हादसे का शिकार हो गया था और 45 मिनट तक अपनी जगह से हट गया था। रूसी मॉड्यूल में आए गड़बड़ी से बहुत बड़ा संकट पैदा हो सकता था।

नई दिल्ली, जुलाई 30: अंतरिक्ष में कई ऐसे वैज्ञानिक काम चल रहे हैं, जिससे धरती और इंसानी जीवन को हर दिन नई टेक्नोलॉजी मिलती है और इंसान विकास के रास्ते पर बढ़ता चलता है। लेकिन, गुरुवार को अंतरिक्ष में एक ऐसा हादसा होने वाला था, जिससे पल भर में पूरी दुनिया दसों से साल पीछे चली जाती। अंतरिक्ष में मौजूद इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में बड़ा हादसा हुआ है। हालांकि, हादसे के बाद भी इसका असर नहीं पड़ा और कोई नुकसान नहीं हुआ। लेकिन, हादसे के बाद पूरे 45 मिनट तक अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन से सारा संपर्क टूट गया था और उस वक्त 7 अंतरिक्ष यात्री भी वहां मौजूद थे।

स्पेस स्टेशन में क्या हुआ था ?

स्पेस स्टेशन में क्या हुआ था ?

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के मुताबिक अंतरिक्ष में मौजूद इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पूरे 45 मिनट के लिए अपने जगह से हट गया था, जिसने नासा की चैन उड़ाकर रख दी थी। इसकी वजह से नासा को बोइंग सीएसटी-100 स्टारलाइनर कैप्सूल की लॉन्चिंग को टालनी पड़ गई। रिपोर्ट के मुताबिक ये अंतरार्ष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर डॉक करने वाला था। रिपोर्ट के मुताबिक ये पूरा हादसा उस वक्त हुआ जब रूस के एक मॉड्यूल का थ्रस्टर्स अपने आप इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में शुरू हो गये थे और फिर स्पेस स्टेशन ऑउट ऑफ कंट्रोल हो गया था। रूस का ये मॉड्यूल कुछ दिन पहले ही इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर डॉक किया गया था।

'नाउका' में तकनीकी खामी

'नाउका' में तकनीकी खामी

नासा की रिपोर्ट के मुताबिक लॉन्च के लिए काउंटडाउन शुरू करने से कुछ समय पहले ही रूसी लैबोरेटरी मॉड्यूल, जिसका नाम 'नाउका' है, उसमें कुछ टेक्निकल फॉल्ट आ गया था, जिसकी वजह से जेट थ्रस्टर्स अपने आप चालू हो गया था और पूरा का पूरा स्पेस स्टेशन ही अंतरिक्ष में अपनी जगह से हट गया था। नासा की रिपोर्ट के मुताबिक अंतरिक्ष स्टेशन पूरे 45 मिनट तक अपनी जगह से हटा रहा और इस दौरान नासा का संपर्क अंतरिक्ष स्टेशन से टूट गया था और नासा के वैज्ञानिकों की सांसे हलक में अटक गई थीं। अगर ये अंतरिक्ष स्टेशन खराब हो जाता या फिर अंतरिक्ष में गुम हो जाता, तो पूरी दुनिया मुसीबत में फंस सकती थी।

अब 3 अगस्त को होगा लॉन्च

अब 3 अगस्त को होगा लॉन्च

नासा ने अपने बयान में कहा है कि उसने पूरी घटना की जांच शुरू कर दी है और इसमें रूसी स्पेस एजेंसी से भी मदद मिल रहा है और अब स्टारलाइनर को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से बोइंग लॉकहीड मार्टिन कॉर्प एटलव वी रॉकेट को 3 अगस्त को लॉन्च किया जाएगा। वहीं 4 अगस्त को बैकअप तारीख के तौर पर चुना गया है। जिसका मतलब ये हुआ कि अगर किसी वजह से 3 अगस्त को लॉन्चिंग नहीं हो पाती है या फिर कोई दिक्कत आ जाती है तो 4 अगस्त को फिर से लॉन्च किया जाएगा।

45 मिनट हलक में सांस

45 मिनट हलक में सांस

नासा के अंतरिक्ष स्टेशन के प्रबंधक जोएल मोंटालबानो के मुताबिक, ''इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन 45 मिनट के लिए अपनी जगह से हट गया था और इसमें 7 क्रू मेंबर्स सवार थे।'' उन्होंने कहा कि नासा के कंट्रोल सेंटर्स में मौजूद फ्लाइट टीम ने कंट्रोल थ्रस्टर्स की मदद से स्टेशन को उनकी जगह पर वापस पहुंचा दिया। नासा ने अपने बयान में कहा कि इस दौरान इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन प्रति सकेंड आधी डिग्री की गति के हिसाब से अपनी जगह से हट रहा था।

नहीं हुआ कोई नुकसान

नहीं हुआ कोई नुकसान

नासा के अंतरिक्ष स्टेशन के प्रबंधक जोएल मोंटालबानो ने कहा कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में उस वक्त रूस के 2, नासा के तीन, जापान और फ्रांस के एक-एक अंतरिक्षयात्री मौजूद थे और अगर कोई घटना होती तो सातों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती थी। इन 45 मिनट के दौरान अंतरिक्ष स्टेशन में मौजूद क्रू से दो बार संपर्क टूट गया था लेकिन उस दौरान भी क्रू खतरे से बाहर था। हालांकि, अभी तक साफ नहीं हो पाया है कि 'नाउका' मॉड्यूल में किस वजह से तकनीकी खराबी आई थी और थ्रस्टर अचानक क्यों चालू हो गया था।

क्या है रूस का 'नाउका' मॉड्यूल?

क्या है रूस का 'नाउका' मॉड्यूल?

आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले ही रूस ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में 'नाउका' नाम से अपनी सबसे बड़ी अंतरिक्ष प्रयोगशाला को लॉन्च किया है, जिससे रिसर्च किया जा सके। रूसी भाषा में 'नाउका' का अर्थ विज्ञान होता है और अंतरिक्ष में रूस की ये सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट माना जाता है। इस प्रयोगशाला में ऑक्सीजन जेनरेटर, रोबोट कार्गो क्रेन, एक शौचालय और रूसी अंतरिक्ष यात्रियों के लिए बिस्तर भी लगे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इसे एक प्रोटॉन रॉकेट का उपयोग कर कक्षा में भेजा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले वक्त में 'नाउका' मॉड्यूल से अंतरिक्ष संबंधित खोज में काफी ज्यादा मदद मिलने वाली है।

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