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Inhuman Step By Parents: अपने नाबालिग बच्चों को अमेरिकी बॉर्डर पर छोड़कर भाग रहे भारतीय माता-पिता

Inhuman Step By Parents: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनते ही उन्होंने गैरकानूनी ढंग से अमेरिका में रह रहे लोगों को उनके देश वापस भेजना शुरू किया था। इसमें हजारों लोग भारत के भी शामिल थे, डंकी रूट से अमेरिका पहुंचे थे। लेकिन अब एक नया और चिंताजनक पैटर्न सामने आ रहा है। जिसमें अमेरिका से ज्यादा भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं

नाबालिग बच्चों के साथ ये कैसा सलूक?

मेक्सिको और कनाडा के साथ अमेरिकी सीमाओं पर एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। जिसमें, भारतीय नाबालिग, जिनकी उम्र 12 से 17 साल के बीच के होती है, ये अमेरिकी बॉर्डर के अंदर अकेले पाए जाते हैं। कई मामलों में 6 साल के बच्चे भी ऐसे ही हालात में मिले हैं। ये बच्चे अपने माता-पिता के नाम और कॉन्टेक्ट इन्फोर्मेशन के साथ केवल एक कागज़ का टुकड़ा लेकर चलते हैं। इसके बाद उन्हें सुनसान इलाके में छोड़ दिया जाता है। ऐसे में उनके पा ना तो जरूरी कागजात होते हैं और ना ही उनके पेरेंट्स उनके साथ।

Inhuman Step By Parents

अमेरिका में एंट्री क्या जिंदगी से बड़ी?

ऐसा बताया जा रहा है कि वीजा ना मिल पाने के कारण परिवार इन नाबालिगों को सीमा पार इस उम्मीद में छोड़ रहे हैं कि वे अमेरिका में अपना भविष्य सुरक्षित कर सकेंगे। और इसीलिए इन बच्चों को अकेले बॉर्डर पार भेज दिया जा रहा है, क्योंकि उनका मानना ​​है कि इससे उनकी अमेरिका में एंट्री की संभावना बढ़ सकती है।

Inhuman Step By Parents

नाबालिगों को छोड़ने के बढ़ते मामले

पिछले कुछ सालों में यह घटना बढ़ती जा रही है। यह विदेश में बेहतर अवसरों की तलाश करने वाले परिवारों की हताशा को उजागर करता है। बच्चे अक्सर डरे हुए और भ्रमित पाए जाते हैं और अंजान जमीन पर अनिश्चित भविष्य का सामना करते देखे जा रहे हैं। यह बात इस सच को सामने लाती है कि परिवार अमेरिका में पलने-बढ़ने के अपने सपने को पूरा करने के लिए किस हद तक जा सकते हैं। इस तरह के मामले बाल कल्याण और इमीग्रेशन पॉलिसी के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा करते हैं। वहीं सीमा पर अधिकारियों को इन मामलों को संभालने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि उन्हें इमीग्रेशन कानूनों का पालन करते हुए इन लाचार नाबालिगों की सुरक्षा और देखभाल के लिए तैयारियां भी करना होती हैं।

कानून का पालन या लाचार बच्चों की देखभाल?

बॉर्डर पर तैनात अधिकारियों को इस नाजुक स्थिति को संभालने का काम सौंपा गया है। उन्हें इमीग्रेशन के नियमों को लागू करने और अकेले नाबालिगों की देखभाल करने के बीच का कोई रास्ता बनाना पड़ रहा है। सीमा पार करने वाले इन बच्चों की मौजूदगी अधिकारियों के लिए सुरक्षा और नागरिकता जैसे सवालों के बीच उनकी देखभाल के लिए मजबूर कर रही है। ऐसे में इस चुनौती से निपटना उनके लिए दिन प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है।

बच्चों के भविष्य के नाम पर ये कैसी अमानवीय जिद?

यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध घुसपैठ के तरीकों और परिवारों को ऐसे कठोर कदम उठाने के लिए प्रेरित करने वाले कारणों के बारे में कई सवाल खड़े करता है। क्या बच्चों का भविष्य इतना जरूरी हो गया है कि उन्हें बिना किसी सहारे के छोटी सी उम्र में किसी अंजान देश में अकेला छोड़ा जा सके? आखिर ये किस तरह का कॉम्प्टीशन है जो पेरेंट्स के बीच चलने लगा है? आर्थिक कठिनाइयां, राजनीतिक अस्थिरता और बेहतर जीवन की आकांक्षाएं अक्सर ऐसे जोखिम भरे फ़ैसलों को प्रेरित करती हैं, लेकिन क्या उनके लिए बच्चों की जिंदगियों को दांव पर लगाना जरूरी है?

अमेरिकी नागरिकता की लालसा

अमेरिकी सीमाओं पर अकेले नाबालिगों की बढ़ती संख्या वैश्विक स्तर पर घुसपैठ और अमेरिकी नागरिकता पाने की लालसा को दर्शाती हैं। यह उन मुद्दों की ओर इशारा करता है जिनके लिए तत्काल सीमा प्रवर्तन से अलग बड़े समाधानों को अमल में लाने की आवश्यकता दिखाई देती है। अपने मूल देशों में मूल कारणों को संबोधित करने से परिवारों द्वारा की जाने वाली ऐसी हताशापूर्ण और घटिया हरकतों को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि इस स्थिति से निपटने की कोशिशों में सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के बीच सहमति बन रही है। ये संस्थाएं प्रभावित बच्चों को सहायता देने के लिए मिलकर काम करती हैं, साथ ही इस तरह से बॉर्डर पर छोड़ने के बारे में लंबे समय तक टिक पाने वाले प्लान पर काम कर रही हैं।

कथित भविष्य के लिए असल सुरक्षा दांव पर

यह परेशान करने वाला रुझान इमीग्रेशन के आंकड़ों के पीछे मानवीय अभाव की याद दिलाता है। माता-पिता या रिश्तेदारों द्वारा इस तरह के कदम उठाना बताता है कि वे बच्चों को किस भावना से देख रहे हैं। उनकी नजर में बच्चे के साथ रहने से ज्यादा उसको किसी ऐसी जगह धकेलने पर जोर है जहां उसके कथित भविष्य की कथित सुरक्षा की कथित गारंटी है। लेकिन असल में देखा जाए तो उन बच्चों के नसीब में माता-पिता द्वारा ताउम्र का संघर्ष बांध दिया है।

आपकी इस खबर पर क्या राय है, हमें कॉमेंट में जरूर बताएं।

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