अरब देशों में शुरू हुआ भारत का 'व्यापार युग', जानें PM मोदी ने UAE से कैसे पहुंचाया शिखर पर कारोबार?
India Trade Era: मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत के कारोबारी रिश्तों में तेजी से विकास हो रहा है और पिछले हफ्ते जब भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के करीबी रणनीतिक मित्र और साझेदार, संयुक्त अरब अमीरात और फ्रांस की बेहद सफल यात्रा संपन्न की, तो भारत के कारोबार सेक्टर को एक और नया उड़ान मिल गया है।
पीएम मोदी की फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा से भारत के ट्रेड सेक्टर में पंख लग गये हैं और दोनों देशों के कारोबार, जब पहले से ही आसमान छू रहे हैं, उसमें रॉकेट की रफ्तार से और इजाफा होगा। पीएम मोदी की इन एतिहासिक यात्राओं से फ्रांस और यूएई का भारत से व्यापारिक रिश्ता काफी मजबूत हो गया है।

भारत-यूएई.. अद्वितीय व्यापारिक साझेदारी
सबसे पहले, भारत-यूएई साझेदारी अद्वितीय है और यह न केवल समय की कसौटी पर खरी उतरी है, बल्कि और मजबूत होती गई है। भारतीय श्रमिकों के संयुक्त अरब अमीरात के आज के चमकदार नखलिस्तान बनाने से लेकर, दोनों देशों के बीच किए गये फ्री ट्रेड एग्रीमेंट तक... दोनों देशों ने व्यापारिक रास्ते पर काफी लंबा सफर तय किया है।
संयुक्त अरब अमीरात, वो पहला देश है, जिसके साथ भारत ने कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) साइन किया है और अब भारत, अमेरिका को पछाड़कर यूएई का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन चुका है, जबकि पहले नंबर पर चीन है, जो कुछ सालों में पीछे छूट जाएगा।
आज भारत-यूएई का व्यापार फलफूल रहा है, निवेश बढ़ रहा है और इसकी कोई सीमा नहीं है। भारत-यूएई व्यापार 2022 में 85 बिलियन अमेरिकी डॉलर का रहा है, जिससे भारत यूएई का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया, जबकि यूएई वर्ष 2022-23 के लिए भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार और भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात डेस्टिनेशन है।
भारत-यूएई व्यापार, रॉकेट की रफ्तार से विस्तार
CEPA समझौता होने के पहले वर्ष में, भारत और यूएई का आपसी व्यापार 50.5 अरब डॉलर को पार कर गया है, जबकि इसमें तेल व्यापार शामिल नहीं है, जो पिछले वर्ष से 5.8 प्रतिशत ज्यादा है।
दुबई स्थित गल्फ न्यूज़ के लिए एक लेख में, संयुक्त अरब अमीरात के विदेश व्यापार राज्य मंत्री डॉ थानी अल ज़ायौदी ने बताया, कि यह वृद्धि दर्ज की गई है "क्योंकि वैश्विक व्यापार में तीसरे और चौथे क्वार्टर- 2022 में गिरावट आई थी, जो इस तर्क का समर्थन करता है, कि सीईपीए ने हमें कड़ी आर्थिक स्थितियों से बचाने में मदद की है।"
यूएई के मंत्री का मानना है कि सीईपीए को "...संयुक्त अरब अमीरात के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाएगा।"
यह कहना गलत नहीं होगा कि आज संयुक्त अरब अमीरात को अब भारत के "विस्तारित पड़ोस" का हिस्सा नहीं, बल्कि उसके पड़ोस का हिस्सा माना जा सकता है। माइग्रेशन कॉरिडोर से लेकर फूड कॉरिडोर तक और रक्षा सेक्टर तक, भारत-यूएई एकीकरण सभी क्षेत्रों में लागू होता है।
संयुक्त अरब अमीरात में करीब 35 लाख भारतीय रहते हैं, जो संयुक्त अरब अमीरात की आबादी का लगभग 30 प्रतिशत है और ये संयुक्त अरब अमीरात में सबसे बड़ा जातीय समुदाय है।
क्यों अहम रहा मोदी का दौरा?
अपने नौ साल के कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी की शेखडोम की यह पांचवीं यात्रा है। यदि मध्य पूर्व/पश्चिम एशिया क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र है, जहां पीएम मोदी सबसे ज्यादा कामयाब रहे हैं, तो यह संयुक्त अरब अमीरात में है, जहां उनकी क्षमता का परीक्षण किया गया था और जिसमें वो सबसे ज्यादा कामय रहे हैं।

पीएम मोदी के कार्यकाल में भारत-यूएई संबंध
यह उनकी देखरेख में था कि द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक स्तर तक बढ़ाया गया और ये सहयोग, विशेष रूप से आतंकवाद विरोधी कार्यक्रम और डिफेंस सेक्टर में काफी मजबूत किया गया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संयुक्त अरब अमीरात, देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान "ऑर्डर ऑफ जायद" से पहले ही सम्मानित कर चुका है और बालाकोट हमलों से लेकर अनुच्छेद 370 को रद्द करने तक, यूएई ने मोदी सरकार को प्रमुख राजनयिक और आर्थिक समर्थन दिया है।
और अब जब भारत, धीरे-धीरे चुनावी वर्ष में प्रवेश कर रहा है, प्रधानमंत्री मोदी के लिए ये आर्थिक संबंध काफी फायदा पहुंचाने वाला हो सकता है। पीएम मोदी की इस यूएई यात्रा से ऐसे समझौते हुए हैं, जो दुनिया में मौजूदा भू-राजनीतिक और आर्थिक मंथन में प्रमुखता प्राप्त करते हैं।
भारत-यूएई स्थानीय करेंसी में कारोबार
भारतीय रिजर्व बैंक और यूएई सेंट्रल बैंक ने सीमा पार लेनदेन के लिए स्थानीय मुद्राओं, भारतीय रुपया और यूएई दिरहम के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक ढांचे की स्थापना के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
इसके बाद अब भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच स्थानीय मुद्राओं में कारोबार होगा।
भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली का विकास, द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं की मजबूती और पक्षों के बीच विश्वास के स्तर को दर्शाता है।
वहीं, संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में दिल्ली आईआईटी का परिसर खोला जाएगा, जिससे यूएई में भारत के सॉफ्ट पावर का विस्तार होता है और इसका मकसद, संयुक्त अरब अमीरात के लोगों से भारत के लोगों को जोड़ना है। इसके जरिए, यूएई में भारतीय संस्कृति का भी विस्तार होगा।
संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति और अबू धाबी के शासक शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ पीएम मोदी की बैठक के अंत में जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है, कि "नेताओं ने अपने तत्काल भुगतान प्रणालियों के बीच एकीकरण को सक्षम करके भुगतान प्रणाली क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने में अपनी रुचि व्यक्त की है।"
संयुक्त अरब अमीरात और भारत के बीच सीमा पार लेनदेन को अधिक कुशलता से संसाधित करने का फैसला लिया गया है। भारत और यूएई के इस फैसले से डॉलर पर काफी निगेटिव असर पड़ेगा, लेकिन भारत और यूएई का आपसी व्यापार, डॉलर के प्रभाव से बच जाएगा।












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