जून में भारत के व्यापार घाटे ने तोड़ डाले रिकॉर्ड, 25.63 अरब डॉलर हुआ, साल के अंत तक क्या होगा?

ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का अनुमान है कि, इन परिस्थितयों के बीच फिलहाल डॉलर के मुकाबले रुपया और गिर सकता है।

नई दिल्ली, जुलाई 05: दुनियाभर में कई देशों के आर्थिक संकट में फंसने की चेतावनी जापान की रेटिंग एजेंसी नोमुरा होल्डिंग्स की तरफ से दी गई है, जिसको लेकर भारत की भी चिंताएं हैं, लेकिन इस बीच पब्लिश किए गये ताजा रिपोर्ट भाकत के लिए बड़ा झटका देने वाला है और ताजा आंकड़ों से पता चला है कि, भारत का व्यापार घाटा सिर्फ जून महीने में बढ़कर रिकॉर्ड 25.63 अरब डॉलर हो गया है, जो भारत सरकार के लिए बड़ा टेंशन है, क्योंकि भारत सरकार की कोशिश लगातार व्यापार घाटे को पाटने की रही है, ताकि देश का निर्यात बढ़ाने के साथ साथ विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाया जाए, लेकिन इस पहल में सरकार को बड़ा झटका लगा है।

जून में भारत को रिकॉर्ड व्यापार घाटा

जून में भारत को रिकॉर्ड व्यापार घाटा

हालांकि, रिकॉर्ड व्यापार घाटे के पीछे की सबसे बड़ी वजह पेट्रोलियम, कोयले और सोने के आयात में भारी बढ़ोतरी को बताया जा रहा है, वहीं जून महीने में भारत के निर्यात में भारी गिरावट भी दर्ज की गई है, जिससे रुपये में और गिरावट आई है और बड़े करेंट अकाउंट डेफिसिट (सीएडी) के बारे में चिंता बढ़ गई है। सोमवार को जारी भारत सरकार के आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि, जून में भारत का व्यापारिक निर्यात 16.8% बढ़कर 37.9 अरब डॉलर हो गया है, जो मई के मुकाबले 20.5% से कम था, जबकि भारत के आयात में 51% का उछाल आया है और जून महीने में भारत का आयात बढ़कर 63.58 अरब डॉलर हो गया है। वहीं, पिछले साल से तुलना करें, तो साल 2021 के जून महीने में भारत का व्यापार घाटा 9.61 अरब डॉलर था।

और कमजोर होगा रुपया?

और कमजोर होगा रुपया?

ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का अनुमान है कि, इन परिस्थितयों के बीच फिलहाल डॉलर के मुकाबले रुपया और गिर सकता है। उन्होंने कहा कि, 'वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों और डॉलर की मजबूती को देखते हुए, बढ़ते व्यापार घाटे के साथ, दूसरी तिमाही में भारतीय रुपया और कमजोर हो सकता है और ये 80-81 तक जा सकता है'। आपको बता दें कि, सोमवार को भारतीय मुद्रा सोमवार को डॉलर के मुकाबले 78.95 पर बंद हुई।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों के दौरान व्यापार घाटा एक साल पहले की समान अवधि में 31.42 अरब डॉलर से बढ़कर 70.25 अरब डॉलर हो गया है। इंडियन रेटिंग्स एंड रिसर्च के चीफ इकॉनोमिस्ट डीके पंत कहते हैं कि, "जैसा कि विकसित दुनिया में मंदी वैश्विक वस्तुओं के निर्यात की मांग को कम कर रही है, विश्व व्यापार संगठन ने पहले ही अपने पूर्वानुमान को कम कर दिया है और भारतीय निर्यात पर इसका असर सीधा देखने को मिल रहा है। वहीं, तेल आयात पर भारत की उच्च निर्भरता के कारण भारत का व्यापार घाटा और भी ज्यादा बढ़ गया है'।

भुगतान संतुलन घाटा

भुगतान संतुलन घाटा

डीके पंत ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि, 'हम जीडीपी के 3% पर करेंट अकाउंट डेफिसिट की उम्मीद करते हैं, लेकिन ज्यादा चिंता की बात यह है कि पेमेंट बैलेंस 45-50 अरब डॉलर है।' आपको बता दें कि, रुपये में गिरावट से व्यापार घाटा और भी बढ़ जाता है, क्योंकि, कमजोर घरेलू मुद्रा से आयात महंगा हो जाता है, जिससे मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ जाता है। यानि, इस हिसाब से देखें, तो भारत में महंगाई बढ़ने की संभावना बनती दिख रही है। वहीं, ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि, 'निर्यात में कमी आने के पीछे कई वजहें हैं, जैसे वैश्विक विकास चिंताओं में बढ़ोतरी, बेस इफेक्ट, कमोडिटी प्राइस।' नायर ने कहा कि कच्चे तेल और कोयले के कारण हमारा आयात अपेक्षाओं के मुताबिक ज्यादा रहा है, जिसने भारत की आयात निर्भरता और ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशीलता को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि, 'सरकार द्वारा हाल ही में किए गए उपायों, विशेष रूप से सोने पर आयात शुल्क, चालू खाते के घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 3% को पार करने से रोकने में मदद करनी चाहिए"।

सरकार ने क्या-क्या उपाए किए

सरकार ने क्या-क्या उपाए किए

भारत सरकार ने करेंट अकाउंट डेफिसिट और बढ़ते आयात पर लगाम लगाने के लिए सोने पर आयात शुल्क को 10.75% से बढ़ाकर 15% कर दिया है, इसके अलावा ओएनजीसी एनएसई जैसे घरेलू कच्चे उत्पादकों पर 1.59% टैक्स लगा दिया है, जो उच्च अंतरराष्ट्रीय कीमतों से लाभान्वित हो रहे थे। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि, रूस से तेल आयात में छूट की वजह से आने वाले समय में दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, एचडीएफसी बैंक की प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट साक्षी गुप्ता ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा कि, "गैर-तेल और गैर-सोने के आयात को कम करना आदर्श नहीं है क्योंकि इससे घरेलू मांग प्रभावित होती है।" उन्होंने कहा कि, 'सस्ते दरों पर मिल रहा रूसी तेल आने वाले वक्त में राहत दे सकता है'।

रूस से भारत का तेल आयात

रूस से भारत का तेल आयात

जून में भारत का तेल का आयात 94.17 फीसदी बढ़ा है, जबकि सोने का आयात सालाना आधार पर 169.5 फीसदी बढ़ा है। वहीं, कोयला, कोक और ब्रिकेट के आयात में भी 241.81% का इजाफा देखने को मिला है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन की अध्यक्ष ए शक्तिवेल ने इकोनॉमिक कहा कि, 'वैल्यू एडेड एक्सपोर्ट को आगे बढ़ाने, कंटेनर निर्माण को बढ़ाने, वैश्विक स्तर की एक भारतीय शिपिंग लाइन विकसित करने, प्रोत्साहन योजनाओं के शेयरों की वैधता को 24 महीने तक बढ़ाने और ट्रांसफर को जोड़ने की आवश्यकता है।" इसके साथ ही उन्होंने, निर्यात उन्मुख इकाइयों (ईओयू), विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) के लिए निर्यात उत्पादों (आरओडीटीईपी) योजना पर शुल्क और करों की छूट का विस्तार करने का भी सुझाव दिया है।

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