चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण से सिलकॉन वैली के भारतीयों में उत्साह का माहौल, कहा- अब भारत करेगा नेतृत्व
इसरो ने शुक्रवार को श्रीहरिकोटा स्थित प्रक्षेपण केंद्र से एलवीएम3-एम4 रॉकेट के जरिए अपने तीसरे चंद्र अभियान 'चंद्रयान-3' का सफल प्रक्षेपण किया था। इस अभियान के तहत चंद्रमा की सतह पर एक बार फिर 'सॉफ्ट लैंडिंग' का प्रयास किया जाएगा।
चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण ने देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के भारतीयों को गर्व करने का एक मौका दिया है। शुक्रवार को हुए सफल प्रक्षेपण से सिलिकॉन वैली में स्टार्टअप और बड़ी कंपनियों के भारतीय मूल के शीर्ष अधिकारियों में खुशी एवं गर्व का माहौल है।

भारतीय मूल के शीर्ष अधिकारियों का ध्यान अब इस बात पर है कि आगे भारत के लिए किस तरह की संभावनाएं हो सकती हैं। कैलिफोर्निया में स्थित सिलिकॉन वैली कई स्टार्ट-अप और वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों का ठिकाना है।
इनमें एपल, फेसबुक और गूगल सबसे प्रसिद्ध कंपनियां हैं। इन कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण ने प्रौद्योगिकी जगत के प्रमुख क्षेत्रों में भारत के वैश्विक नेता के रूप में उभरने का संकेत दिया है।
मल्टी-क्लाउड डाटा कंट्रोल कंपनी रुब्रिक के सह-संस्थापक बिपुल सिन्हा ने कहा कि चंद्रयान भारत के साथ-साथ दुनिया भर में हर भारतीय मूल के व्यक्ति के लिए एक गर्व का क्षण है।
उन्होंने कहा कि चंद्रयान का उद्देश्य सिर्फ चंद्रमा पर उतरना नहीं है, बल्कि यह वह प्रौद्योगिकी और प्रेरणा है और भारत सबको दिखा रहा है कि भविष्य क्या हो सकता है। उन्होंने कहा कि ये भारतीय अर्थव्यवस्था, भारतीय नवाचार और दुनिया भर में समग्र भारतीय प्रवासियों के लिए एक उत्प्रेरक साबित होगा।
ग्लेन AI के CEO अरविंद जैन ने कहा, भारत अब दुनिया की सभी कंपनियों के लिए मुख्य नवाचार इंजन का हिस्सा है। कई वर्षों तक भारत में बड़ी संख्या में शैक्षणिक संस्थानों में किए गए निवेश और हर साल निकलने वाले भारी संख्या में इंजीनियरों के दम पर भारत प्रौद्योगिकी और शोध एवं विकास (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) प्रतिभा का भविष्य बन चुका है।"
कन्वर्सेशनल AI कंपनी यूनिफोर के सह संस्थापक और CEO उमेश सचदेव ने कहा कि चंद्रयान-3 भारत की विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षमताओं के युग के आगमन को दर्शाता है। सचदेव ने कहा, वैश्विक और भारतीय एयरोस्पेस उद्योग के दृष्टिकोण से यह एक बड़ा मील का पत्थर है।
मुझे लगता है कि शुक्रवार को जो दिखा है वह भारतीय विज्ञान और तकनीक के युग का आगमन है। भारत केवल पश्चिम की कंपनियों और विकसित प्रौद्योगिकियों का अनुयायी नहीं बनने जा रहा। अब भारत विशिष्ट उद्योगों में नेतृत्व करना शुरू कर सकता है।
टीसेकंड (Tsecond) के संस्थापक साहिल चावला ने कहा, "परिदृश्य बदल रहे हैं। हम एक देश के रूप में चंद्रमा पर जा रहे हैं। यह दुनिया के सभी अंतरिक्ष क्षेत्रों के लिए गेम चेंजर है।इस तरह की सफलता मिलना बहुत जरूरी है।"












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