श्रीलंका के नए पीएम विक्रमसिंघे से भारतीय उच्चायुक्त की मुलाकात, मौजूदा स्थिति पर हुई चर्चा

श्रीलंका के राष्ट्रपति ने देश को संकट से उबारने के लिए कई तरीके सुझाए थे। उनमें से एक नए पीएम को चुना जाना शामिल था। नए पीएम रानिल विक्रमसिंघे ने पदभार संभालने के पहले ही दिन भारतीय राजदूत गोपाल बागले से मुलाकात की।

कोलंबो : श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त गोपाल बागले ने नवनियुक्त प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे से मुलाकात की। बातचीत में आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका की मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई। विक्रमसिंघे के प्रधानमंत्री पद का कार्यभार संभालने के बाद उनसे मुलाकात करने वाले गोपाल बागले पहले विदेशी राजदूत हैं। बता दें कि देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने नई सरकार बनाने की बात कही थी। बता दें कि, श्रीलंका अब तक के सबसे खराब आर्थिक संकट की दौर से गुजर रहा है।

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भारी कर्ज में श्रीलंका
श्रीलंका भारी कर्ज में डूबा हुआ है और उसकी पूरी अर्थव्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। पूरे देश में अराजकता का माहौल है। जनता के भारी विरोध के बाद महिंद्रा राजपक्षे ने पीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद देश की डूबी अर्थव्यवस्था में जान फूंकने और राजनीतिक गतिरोध समाप्त करने के इरादे से यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के नेता विक्रमसिंघे(73) ने गुरुवार को श्रीलंका के 26वें प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली।

भारतीय उच्चायुक्त की पीएम से मुलकात
सूत्रों के मुताबिक विक्रमसिंघे के पदभार संभालने के बाद बागले पीएम कार्यालय पहुंचे और विक्रमसिंघे से मुलाकात की। इस दौरान देश की मौजूदा संकट पर गहन चर्चा हुई. जानकारी के लिए बताते चले कि श्रीलंका ब्रिटेन से1948 में आजाद हुआ था। गौर करने वाली बात है कि आजादी के बाद से अब तक के सबसे बुरे आर्थिक संकट के दौर से श्रीलंका गुजर रहा है।

भारत कर रहा सहयोग
वहीं, बात करें भारत की तो वह जनवरी से ही श्रीलंका की, आर्थिक सहायता पैकेज के जरिए मदद कर रहा है। भारत ने श्रीलंका को राहत प्रदान करते हुए ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए उसे ऋण सुविधा प्रदान किया है। भारत ने इस साल जनवरी से ऋण सुविधा और अन्य सुविधा के जरिए श्रीलंका की तीन अरब डॉलर से अधिक की मदद करने की प्रतिबद्धता जतायी है। बता दें कि, मध्य अप्रैल में श्रीलंका ने विदेशी कर्ज में पूरी तरह से डूब चुका था। अंत में उसने कह दिया कि वह ऋण नहीं चुका पाएगा और देश ने दिवालिया होने की घोषणा कर दी।

राष्ट्रपति से इस्तीफे की मांग
श्रीलंका में विदेशी मुद्रा की भारी कमी हो गई है। इस कारण वह खाद्य पदार्थ और ईंधन के आयात के लिए भुगतान नहीं कर पा रहा है। इन सब वजहों से देश में व्यापक स्तर पर सरकार विरोधी प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे से इस्तीफे की भी मांग की जा रही है।

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