कोको आइलैंड पर चीन ने तैयार किया जासूसी अड्डा, भारत की नाराजगी के बाद भी क्यों एक्शन नहीं ले रहा म्यांमार?
रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल सिक्योरिटी प्लैनर्स और उपलब्ध सैटेलाइट तस्वीरें यह दिखाती हैं कि कोको द्वीप पर रनवे का विस्तार किया गया है, साथ ही लगभग 1500 सैन्य कर्मियों के साथ नए शेड/बैरक का निर्माण किया गया है।
भारत-चीन सीमा विवाद के बीच एक बार फिर से कोको आइलैंड चर्चा में है। म्यांमार ने चीन को कोको द्वीप समूह में मॉनिटरिंग एंड सर्विलांस फैसिलिटी स्थापित करने की अनुमति दी है। भारत सरकार ने इसे लेकर गंभीर चिंता जताई है।
भारत ने म्यांमार सरकार से कहा है कि वह भारत से महज 60 किमी की दूर पर स्थित कोको द्वीप पर चीनी गतिविधियों पर रोक लगाए। कोको द्वीप पर अब तक एयर स्ट्रिप और कुछ अन्य निर्माण कार्य भी हो चुके हैं। यहां चीनी जहाज कई बार देखे गए हैं।

आपको बता दें कि कोको द्वीप से भारत के पूर्वी तट पर किसी भी वक्त नजर रखी जा सकती है। चीन इस इलाके में स्थित ओडिशा में बालासोर परीक्षण रेंज से भारत के मिसाइल लॉन्च के साथ-साथ विशाखापत्तनम शहर के दक्षिण में पूर्वी समुद्र तट पर स्थित सामरिक संपत्ति को ट्रैक कर सकता है।
2 महीने पहले भारत ने म्यांमार को कई सैटेलाइट तस्वीरें भी साझा की थीं, जिसमें कोको पर जारी गतिविधियां नजर आ रही हैं। जिसके बाद म्यांमार की सैन्य तानाशाह सरकार ने कोको द्वीप समूह पर किसी भी तरह की चीनी गतिविधियों से इनकार किया था। हालांकि भारत सरकार, नैप्यीडॉ से मिले जवाबों से संतुष्ट नहीं है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पहली नजर में म्यांमार के सैन्य शासकों ने इस बात से इनकार किया है कि कोको द्वीप समूह में रनवे का विस्तार, शेल्टर का निर्माण, निगरानी स्टेशनों की स्थापना या बुनियादी ढांचे के विकास में चीन की कोई भूमिका है।
ऐसा माना जा रहा है कि म्यांमार की सैन्य सरकार चीन से सतर्क तो है मगर उसे नाराज करने के पक्ष में नहीं है। जुंटा के पास बीजिंग के साथ जाने के अलावा कोई भी विकल्प नहीं है। फरवरी 2021 में म्यांमार की सेना ने देश की सर्वोच्च नेता आंग सान सू ची को गिरफ्तार कर तख्तापलट कर दिया था।
सेना के जनरल मिन ऑन्ग ह्लाइंग ने 2020 में हुए चुनाव को अवैध बताकर इसमें धांधली का आरोप लगाया और आंग सान सू ची को हिरासत में ले लिया था। इसके बाद पश्चिम ने सैन्य शासन को अछूत घोषित कर दिया तो वहीं चीन ने इसका समर्थन किया।
ऐसे वक्त में चीन ही म्यांमार की मदद कर रहा है। चीन ने म्यांमार को लगभग 4 अरब अमेरिकी डॉलर की सहायता दी है। इसके साथ ही चीन बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर में प्रभुत्व स्थापित करने के लिए चीन-म्यांमार-बांग्लादेश गलियारा बनाने के लिए बांग्लादेश के साथ-साथ बेल्ट रोड पहल में नैप्यीडॉ को शामिल करने की कोशिश कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल सिक्योरिटी प्लैनर्स और उपलब्ध सैटेलाइट तस्वीरें यह दिखाती हैं कि कोको द्वीप पर रनवे का विस्तार किया गया है, साथ ही लगभग 1500 सैन्य कर्मियों के साथ नए शेड/बैरक का निर्माण किया गया है।
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस ने सबसे पहले कोको में चीनी जासूसी की मौजूदी पर प्रकाश डाला था। भारत विशाखापट्टनम से महज 50 किमी की दूरी पर स्थित रामबिल्ली में अपने नवनिर्मित नौसैनिक अड्डे पर अपनी परमाणु पनडुब्बियों की आवाजाही की जासूसी को लेकर चिंतित है। भारत की बैलिस्टिक मिसाइल दागने वाली पनडुब्बियां इसके पूर्वी बोर्ड पर मौजूद हैं।












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