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भारत के हथियार कारखानों की बढ़ी स्पीड, एक लाख करोड़ का हुआ प्रोडक्शन, अफ्रीकी देशों पर नजर

गरीब अफ्रीकी देश सस्ते हथियारों की खोज में होते हैं, और उनकी ये कमी भारत काफी आसानी से पूरा कर सकता है। वहीं, यूक्रेन युद्ध के बाद अफ्रीका में बने खाली स्थान को भारत भर सकता है।

India Defence production

India Defence production: भारत ने शुक्रवार को घोषणा की है, कि देश में रक्षा उत्पादन का मूल्य पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है, जो कि हथियार बाजार में भारत की बनती विशालकाय क्षमता को दर्शाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार की डिफेंस कंपनियां और निजी क्षेत्रों की डिफेंस कंपनियों को मिला दें, तो पिछले 5 सालों में भारत का डिफेंस प्रोडक्शन बढ़कर दोगुना हो गया है, जिसने सरकार को सैन्य आयात पर देश की निर्भरता को कम करने और हथियारों और प्रणालियों के निर्यातक के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए कई उपाय किए हैं।

भारत अब तक सिर्फ हथियार खरीदता था और हथियार खरीदने के मामले में भारत अभी भी पहले पायदान पर है, लेकिन अब भारत ने अपने हथियार बेचने भी शुरू कर दिए हैं।

भारत सरकार के अधिकारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, कि यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2022-23 में 1,06,800 करोड़ रुपये का था, जो वित्त वर्ष 2021-22 में 95,000 करोड़ रुपये और पांच साल पहले 54,951 करोड़ रुपये का था।

भारत की इस उपलब्धि के पीछे रक्षा मंत्रालय की मेहनत है और रक्षा मंत्रालय ने कहा है, कि पिछले वर्ष की तुलना में रक्षा उत्पादन के मूल्य में 12% की वृद्धि हुई है।

कौन कौन से हथियार बना रहा है भारत

भारत इस वक्त, तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए), विभिन्न प्रकार के हेलीकाप्टर्स, युद्धपोत, टैंक, तोप, मिसाइल, रॉकेट्स और विभिन्न प्रकार के सैन्य वाहनों और हथियार प्रणालियों का उत्पादन कर रहा है।

भारत ने पिछले पांच वर्षों के दौरान रक्षा निर्माण क्षेत्र पर अपना ध्यान केंद्रित किया है और आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए कई उपाय किए हैं। इसके तहत ही भारत सरकार ने 100 से ज्यादा हथियारों, उपकरणों और प्रणालियों के खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया था और भारत के अंदर ही उन हथियारों के विकास का जुनून पैदा किया।

हथियार कंपनियों को भारत में हथियार बनाने में कोई परेशानी ना हो, इसके लिए भारत सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को 49% से बढ़ाकर 74% कर दिया है, ताकि प्रोडक्शन लगातार जारी रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि नतीजे दिखने शुरू हो गए हैं।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रक्षा उत्पादन का मूल्य 2017-18 में 54,951 करोड़ रुपये, 2018-19 में 50,499 करोड़ रुपये, 2019-20 में 63,722 करोड़ रुपये, 2020-21 में 88,631 करोड़ रुपये और 2021-22 में 95,000 करोड़ रुपये था।

अफ्रीकी देशों पर भारत की नजर

भारत अब जब अपने ही हथियार बनाने लगा है, तो फिर उन हथियरों को बेचने के लिए बाजार की भी जरूरत है, लिहाजा भारत ने अफ्रीकी देशों की तरफ नजर घुमाई है।

भारत ने इस साल मार्च महीने में 31 अफ्रीकी देशों के सेना प्रमुखों और अधिकारियों की एक सभा में भारत में बनाए गये हथियारों की प्रदर्शनी लगाई थी, जिसमें भारतीय हेलीकॉप्टर, ड्रोन और तोपखाने दिखाए गये।

भारत इस समय, अपने घरेलू रूप से उत्पादित हार्डवेयर को अन्य देशों को बेचने की कोशिश कर रहा है, विशेष रूप से गरीब राष्ट्रों पर भारत की खास नजर है, जो महंगे हथियार खरीदने में असमर्थ होते हैं। भारतीय सेना के सेवानिवृत्त जनरल वीजी पाटनकर ने कार्यक्रम में एएफपी को बताया था, कि "हम ऐसे उपकरण बना रहे हैं जो किफायती और विश्वसनीय हैं।"

भारतीय सेना ने अफ्रीकी देशों के नेताओं रो सिम्युलेटेड ऑपरेशन के साथ अपने हथियारों का प्रदर्शन किया था, जिसमें कमांडो हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद वाहनों और बम निरोधक रोबोट को दिखाया गया, जो बताता है, कि भारत कितनी तेजी से हथियार निर्माण के क्षेत्र में तरक्की कर रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने 23 अफ्रीकी देशों के साथ 9 दिनों का संयुक्त सैन्य अभ्यास भी किया था, जिसके बाद हथियारों की ये प्रदर्शनी लगाई गई थी, जिसमें इथियोपिया, मिस्र, केन्या, मोरक्को, नाइजीरिया, रवांडा और दक्षिण अफ्रीका के प्रतिनिधि शामिल थे।

भारत इससे पहले फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल बेच चुका है और पिछले दिनों एक कार्यक्रम के दौरान ब्रह्मोस के भारतीय डायरेक्टर ने कहा था, कि कुछ और देशों के साथ ब्रह्मोस मिसाइल बेचने को लेकर बातचीत चल रही है।

भारत फिलहाल 1.7 अरब डॉलर का हथियार बेच रहा है और भारत का लक्ष्य आने वाले कुछ सालों के अंदर कम से कम 5 अरब डॉलर का हथियार निर्यात करने का है, और इस दिशा में तेजी से काम किए जा रहे हैं।

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    अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, कि भारत के हथियारों का 20 प्रतिशत से कम निर्यात वर्तमान में मिस्र, इथियोपिया, मोजाम्बिक, मॉरीशस और सेशेल्स सहित ग्राहकों के साथ अफ्रीका में जाता है, जिसे बढ़ाने की दिशा में फोकस किया जा रहा है।

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