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चीनी सैनिकों को उन्हीं की भाषा में जवाब देंगे भारतीय सैनिक, जानिए इंडियन आर्मी का प्लान

Indian army learn Chinese: तेजपुर यूनिवर्सिटी की स्थापना 1994 में संसद के एक अधिनियम द्वारा केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में की गई थी। यह चीनी सहित विदेशी भाषाओं को पढ़ाने में पूर्वोत्तर का एक अग्रणी संस्‍थान है।

Indian Army personnel to learn Chinese

भारत चीन के साथ पांच राज्यों की 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। हजारों किलोमीटर लंबी इस सीमा पर अक्सर चीनी जवानों संग भारतीय जवानों की झड़प हो जाती है। ऐसे में चीनी सैनिकों को उनकी भाषा में बेहतर तरीके से जवाब देने के लिए भारतीय जवान चीनी भाषा सीखेंगे।

द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य असम के तेजपुर विश्वविद्यालय में भारतीय सेना के जवान जल्द ही चीनी भाषा सीखेंगे। इसके लिए तेजपुर यूनिवर्सिटी में एक एमओयू साइन किया गया है। रक्षा प्रवक्ता, लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने इसकी पुष्टि की है।

महेंद्र रावत ने कहा कि चीनी भाषा सीखने के बाद भारतीय सैनिक अपनी बातों को अधिक मजबूती से व्यक्त करने की बेहतर स्थिति में होंगे। लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने कहा कि चीनी भाषा पाठ्यक्रम इन-हाउस मंदारिन विशेषज्ञता में सुधार करेगा और सेना के जवानों को स्थिति की मांग के अनुसार चीनी सैन्य कर्मियों के साथ जुड़ने के लिए सशक्त करेगा।

उन्होंने कहा कि इससे सैनिक ना सिर्फ चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के नजरिए को समझेंगे, बल्कि कमांडर लेवल की बातचीत, फ्लैग मीटिंग्स, संयुक्त अभ्यास, सीमा पर तैनात जवानों के साथ बैठक आदि में रखी जाने वाली बातों को गहराई से जानने और उस पर सटीक जवाब देने में बहुत मदद मिलेगी।

लेफ्टिनेंट कर्नल रावत ने कहा कि कोर्स 16 सप्ताह की अवधि का होगा। समझौता ज्ञापन पर भारतीय सेना की ओर से मुख्यालय 4 कोर और तेजपुर विश्वविद्यालय कुलपति प्रोफेसर एसएन सिंह के हस्ताक्षर किए गए हैं। तेजपुर यूनिवर्सिटी चीनी सहित अन्य विदेशी भाषाओं की शिक्षा के लिए बेहतर जगह मानी जाती है।

सेना विशेषत्रों का कहना है कि लद्दाख में भारतीय जवानों और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बीच हुई हिंसक झड़पों के मद्देनजर आईटीबीपी ने भी अपने जवानों के लिए एडवांस मंदारिन का कोर्स तैयार किया है। यह कोर्स आईटीबीपी के सभी 90 हजार जवानों को कराए जाने की योजना है।

आपको बता दें कि सैनिकों की चाइनीज सिखाने का ये फैसला गृह मंत्री अमित शाह के अरुणाचल दौरे के बाद लिया गया है। इस दौरे को से पहले चीन ने अरुणाचल के 11 स्थानों का नाम बदल दिया। अरुणाचल प्रदेश पहुंचने के बाद अमित शाह ने कहा था कि भारत की जमीन को हथियाने का जमाना अब चला गया है। अब कोई सुई की नोक जितनी जमीन भी हमसे नहीं ले सकता।

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