भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए पिता तुर्की में, घर में हुआ बेटा, जवानों ने कहा- 'तुर्की चौधरी' रखना नाम

ऑपरेशन दोस्त के तहत भारत ने भूकंप प्रभावित सीरिया और तुर्की को 7 करोड़ की जीवन रक्षक दवाएं और महत्वपूर्ण देखभाल चिकित्सा उपकरण भेजे हैं।

Havildar Rahul Chaudhary

भारत की ओर से तुर्की में ऑपरेशन दोस्त का हिस्सा बनकर गए हवलदार राहुल चौधरी (Havildar Rahul Chaudhar) के घर नन्हा मेहमान आया है। हवलदार राहुल चौधरी के घर बेटा पैदा हुआ है। अब आर्मी के उनके दोस्तों ने हवलदार राहुल चौधरी बेटे का नाम ''तुर्की चौधरी'' रखने को कहा है। उत्तर प्रदेश के हापुड़ के रहने वाले राहुल चौधरी अपने बच्चे का दुनिया में स्वागत करने की तैयारी कर रहे थे, जब उन्हें ऑपरेशन दोस्त का हिस्सा बनने के लिए बुलाया गया था। हालांकि, वह अपने देश और परिवार के प्रति अपने कर्तव्य के बीच उस वक्त बंटा हुआ महसूस कर रहे थे लेकिन उनके पासपोर्ट पर पहले ही मुहर लग चुकी थी।

बीवी ने कहा- मुझे पहले देश की सेवा करनी चाहिए

बीवी ने कहा- मुझे पहले देश की सेवा करनी चाहिए

हवलदार राहुल चौधरी ने इंडिया टुडे टीवी को बताया, ''जब मुझे ये पता लगा कि मेरा नाम 99 सदस्यीय टीम का हिस्सा बनने के लिए गया है तो मैं सीधे अपने सीनियर्स के पास गया और उन्हें 8 फरवरी को होने वाली अपनी पत्नी की सिजेरियन सर्जरी के बारे में बताया। उन्होंने मुझे अपनी पत्नी से बात करने के लिए कहा और जब मैंने उन्हें बताया, तो उन्होंने मुझे अपनी टीम के साथ जाने के लिए कहा। उसने मुझसे कहा कि मुझे पहले अपने देश की सेवा करनी चाहिए।''

फ्लाइट से उतरते ही मिली खुशखबरी

फ्लाइट से उतरते ही मिली खुशखबरी

हवलदार राहुल चौधरी ने कहा, ''मैंने जल्दी से अपना बैग पैक किया और अपनी टीम में शामिल होने के लिए निकल गया।'' हवलदार राहुल चौधरी के मुताबिक जैसे ही वह फ्लाइट में चढ़ा, उसे पता चला कि उसकी पत्नी को ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया है। उतरते ही उन्हें अपने नवजात बेटे की खबर मिली। सेना के अस्पताल में उनके सहयोगी और दोस्त चाहते हैं कि वह अपने बच्चे का नाम 'तुर्की चौधरी' रखें।

गोरखपुर के सिपाही को भी हुआ बेटा

गोरखपुर के सिपाही को भी हुआ बेटा

सेना के एक अन्य जवान, यूपी के गोरखपुर से सिपाही कमलेश कुमार चौहान को भी तुर्की में उतरने के बाद ही पिता बनने की खुशखबरी मिली। तुर्की और सीरिया में 6 फरवरी को आए भूकंप से मरने वालों की संख्या 34,000 को पार कर गई है। दुनिया के कई देशों ने तुर्की और सीरिया में खोज और बचाव कार्यों में मदद के लिए टीमें भेजी हैं, जो भूकंप की एक श्रृंखला के बाद मलबे में तब्दील हो गए हैं। भारत ने भी 'ऑपरेशन दोस्त' के तहत सैनिकों को भेजा।

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