भारतीय सेना से आई डराने वाली कहानी, युद्ध से ज्यादा बैरेक्स में मर रहे जवान, CRPF से खौफनाक आंकड़े
Indian Army: किसी भी देश की सेना में शामिल होना सबसे मुश्किल काम है और देश की रक्षा करना कभी भी कहां आसान रहा है। लेकिन, हमारे देश के सैनिक डटे रहते हैं और किसी भी वक्त देश के लिए जरूरत पड़ने पर अपना मस्तक थाल में सजाकर सौंपने के लिए सहर्ष तैयार रहते हैं।
लेकिन, एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है, कि दुनिया भर में चल रहे संघर्ष, स्थानीय सैनिकों पर शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दोनों तरह से गहरा असर छोड़ रहे हैं। जहां शारीरिक घाव अक्सर दिखाई देते हैं, वहीं मनोवैज्ञानिक तनाव के छिपे हुए निशान कहीं ज्यादा मायावी होते हैं, जिनका पता भी नहीं चल पाता है।

भारतीय सैनिकों की क्यों जा रही सबसे ज्यादा जान? (Why are Indian soldiers losing the most lives?)
खुलासा हुआ है, कि देश के जवान हर दिन अदृश्य युद्ध में फंसे रहते हैं। पिछले महीने, भारत में लोकसभा में, केरल के इडुक्की के सांसद एडवोकेट डीन कुरियाकोस ने पूछा था, कि सैनिकों और उनके परिवारों को प्रभावित करने वाले "तनाव पैक्टर्स" के बारे में अगस्त 2023 में किए गए स्टडी के बारे में "क्या सरकार को जानकारी है"?
जिसपर 20 दिसंबर 2024 को, प्रश्न का उत्तर देते हुए, रक्षा मंत्रालय ने सैनिकों में व्यापक मानसिक तनाव की पुष्टि करने से परहेज किया था, लेकिन इस मुद्दे से निपटने के लिए लागू किए जा रहे उपायों की एक रूपरेखा तैयार करने की बात कही थी। रक्षा मंत्रालय ने कहा था, कि 'कल्याण सक्षम अभियान' के हिस्से के रूप में, अनुशासन और सतर्कता निदेशालय के सदस्यों, चिकित्सा सेवा महानिदेशालय (सेना) के विशेषज्ञों, रक्षा मनोवैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान (DIPR) के वैज्ञानिकों और मनोवैज्ञानिक एक्सपर्ट्स सहित विशेषज्ञों की एक टीम ने अगस्त और दिसंबर 2023 के बीच 12 सैन्य स्टेशनों का दौरा किया था।
इस दौरान सैनिकों की मानसिक स्थिति को लेकर रणनीतियों की सिफारिश करने के लिए अधिकारियों, जूनियर कमीशन अधिकारियों, अन्य रैंकों और उनके परिवारों के साथ बातचीत की थी। इस दौरान टीम ने अलग अलग पहलुओं को आधार बनाकर करीब 2500 सैन्य कर्मियों से डेटा जमा किए थे।
वहीं, अगस्त 2023 में सेना ने एक सलाह जारी की थी, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया था, कि यह स्टडी "तनाव और मनोवैज्ञानिक मुद्दों को संबोधित करने और सेना में आत्महत्या की प्रवृति को रोकने और भाईचारे को बढ़ाने" की दिशा में लिया गया महत्वपूर्ण कदम था।
लेकिन, सांसद धर्मबीर सिंह की तरफ से एक और महत्वपूर्ण सवाल उठाया गया था, कि "क्या सरकार, सीनियर अधिकारियों की तरफ से जूनियर अधिकारियों के खिलाफ अपमान और शारीरिक जबरदस्ती से जुड़े मामलों (2023-24 के दौरान) से अवगत है?
जिसपर रक्षा मंत्रालय ने इस मुद्दे को स्वीकार करते हुए कहा, "हां, सर। इस दौरान कुछ शिकायतें प्राप्त हुई थीं।"
सेना के अंदर की दर्दनाक कहानी
- भारत के जवानों के चेहरे भले ही मुस्कुराते हों, लेकिन वो अपने अंदर एक ऐसी छिपी हुई लड़ाई लड़ते हैं, जिसपर शायद ही कभी चर्चा होती है और वो है मानसिक स्वास्थ्य की लड़ाई।
- साल 2022 में रक्षा राज्य मंत्री ने राज्यसभा में बताया था, कि पिछले पांच वर्षों में सशस्त्र बलों में 819 आत्महत्याएं हुईं हैं, जिनमें थलसेना में 642, नौसेना में 29 और वायु सेना में 148 जवानों ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली।
- मीडिया रिपोर्ट बताती हैं, कि सेना हर साल आत्महत्या, आपस में हत्या और अन्य गैर-लड़ाकू घटनाओं में लड़ाकू अभियानों की तुलना में ज्यादा कर्मियों को खोती है।
- और इस बात को ध्यान में रखना सबसे ज्यादा जरूरी है, कि सशस्त्र बलों के भीतर आत्महत्याओं पर जो डेटा होता है, उसे अपडेट करते लगातार रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी नहीं किया जाता है।
अर्धसैनिक बलों में आत्महत्या की सबसे ज्यादा दर
अगस्त 2023 में गृह मंत्रालय ने संसद के अंदर एक आंकड़े जारी किए थे, जिससे पता चला था:-
- 2011 से अब तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के 1,532 कर्मियों की आत्महत्या से मौत हो चुकी है। इन बलों में सामूहिक रूप से लगभग 900,000 कर्मी शामिल हैं, जो अलग अलग चुनौतियों का सामना करते हैं, जिनका अकसर समाधान नहीं किया जाता।
- केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), असम राइफल्स (AR), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) शामिल हैं।
लेकिन अर्धसैनिक बलों में सबसे अधिक आत्महत्याएं CRPF में दर्ज की गई हैं।
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को अनूठी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भारतीय सेना के साथ-साथ, विशेष रूप से संघर्ष क्षेत्रों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के बावजूद, वे अक्सर सुरक्षा तंत्र में दूसरे दर्जे के नागरिक की तरह महसूस करते हैं। सरकार ने अभी भी CAPF को सशस्त्र बलों के हिस्से के रूप में आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं दी है, जिसकी वजह से वो कई तरह की सुविधाओं से वंचित रह जाते है, जिनसे स्थिति और भी खराब होती है।
सेना में हो रही सबसे ज्यादा मौतों की वजह क्या है?
- यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मनोवैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान (DIPR) की तरफ से किए गए स्टडी रिपोर्ट्स से पता चलता है, कि जवानों में तनाव की सबसे बड़ी वजह उन्हें छुट्टी देने से इनकार करना होता है।
- साल 2021 में गृह मंत्रालय की तरफ से आत्महत्या और आपस में ही जवानों की हत्या करने के पीछे की वजह की जांच करने के लिए वी.एस.के. कौमुदी की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स की स्थापना की गई थी।
- टास्क फोर्स ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के भीतर आत्महत्या या हत्या के मामलों पर ध्यान केंद्रित किया और गृह मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट पेश की थी।
टास्क फोर्स ने आत्महत्या और हत्या में योगदान देने वाले मुख्य तीन कारणों की पहचान की थी।
1- सेवा की शर्तें- समय पर छुट्टी ना मिलना, अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई का डर, कंपनी कमांडरों और जवानों के बीच खराब कम्युनिकेशन और बार-बार ट्रांसफर होना शामिल है।
2- काम करने की स्थिति- लगातार लंबे वक्त तक काम में रहना, आराम के लिए काफी कम वक्त, मनोरंजन को काई ध्यान नहीं, अकेलेपन की स्थिति, परिवार के साथ समय ना के बराबर मिलना
3- व्यक्तिगत वजहें
सेना में आत्महत्या-हत्याओं के कुछ प्रमुख उदाहरण
- नवंबर 2024: श्रीनगर के शिवपोरा में एक कैंप में सीआरपीएफ के एक जवान ने अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
- अक्टूबर 2024: सशस्त्र बलों में सेवारत एक दंपति की मौत का सनसनीखेज मामला। पति, भारतीय वायु सेना (IAF) फ्लाइट लेफ्टिनेंट था, जबकि उसकी पत्नी कैप्टन थीं। उन्होंने कथित तौर पर एक ही दिन आत्महत्या कर ली। पति आगरा में पोस्टेड था, जबकि पत्नी दिल्ली आई हुई थी। उसने अपने पति के साथ संयुक्त दाह संस्कार का अनुरोध करते हुए एक सुसाइड नोट छोड़ा था।
- जुलाई 2024: आगरा में कथित तौर पर एक 22 वर्षीय IAF अग्निवीर ने आत्महत्या कर ली। इस घटना ने 2023 से अग्निवीर की मौतों की संख्या को लगभग 20 तक बढ़ा दिया। रिपोर्ट बताती है, कि पहली अग्निवीर की मौत भी एक आत्महत्या थी, जहां प्रोटोकॉल के कारण उसे सेना की तरह अंतिम संस्कार नहीं किया गया।
- अक्टूबर 2023: जम्मू और कश्मीर के राजौरी जिले में एक मेजर रैंक के अधिकारी ने थानामंडी में सहकर्मियों और अधीनस्थों पर गोलियां चलाईं।
- अक्टूबर 2023: भारतीय सेना के अग्निवीर अमृतपाल सिंह ने संतरी ड्यूटी के दौरान खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
- जुलाई 2023: भारतीय नौसेना का 19 वर्षीय नाविक विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर लटका हुआ पाया गया।
- अप्रैल 2023: बठिंडा सैन्य स्टेशन पर एक आर्मी जवान ने आर्टिलरी यूनिट के अपने चार साथियों को गोली मार दी।
- जून 2022: कोच्चि में एक नौसेना अस्पताल के बाथरूम में 44 वर्षीय नौसेना अधिकारी को फांसी पर लटका हुआ पाया गया।
- जुलाई 2021: कटरीबर्ग में C2 वॉचटावर पर एक 19 वर्षीय नौसेना नाविक को गोली लगने निशान के साथ मृत पाया गया। गोली उसकी सर्विस राइफल से पॉइंट-ब्लैंक रेंज से चलाई गई थी।
ये मामले बताते हैं, कि सशस्त्र बलों के भीतर मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों और तनाव के कारणों को संबोधित करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है, ऐसे में उसके कर्मियों की मानसिक मजबूती सबसे प्रमुख चिंता होनी चाहिए। आखिरकार, देश की सुरक्षा सिर्फ हथियारों और प्रशिक्षण पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि उन लोगों की भलाई पर भी निर्भर करती है, जो इसकी सीमाओं की रक्षा करते हैं।












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