बाइडेन के सांसद रो खन्ना पर बंटे भारतीय-अमेरिकी, राहुल का समर्थन, खालिस्तान पर चुप्पी क्यों? उठे सवाल
रो खन्ना अमेरिकी राजनीति में तेजी से ऊपर उठ रहे हैं और डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से उन्हें जल्द ही सीनेट का उम्मीदवार बनाया जा सकता है। कई अमेरिकी रो खन्ना को भविष्य का अमेरिकी राष्ट्रपति भी मानते हैं।

Ro Khann Conflict: राहुल गांधी की संसद सदस्यता पर 'गांधीवादी दर्शन' के खिलाफ बताने वाले भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना को लेकर अमेरिका में रहने वाला भारतीय समुदाय भी बंटा नजर आ रहा है। रो खन्ना, जो राष्ट्रपति बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद हैं और उन्हें जल्द ही सीनेट में देखने की संभावना जताई जा रही है, वो अकसर भारत, चीन और पाकिस्तान को लेकर अपनी राय रखते रहते हैं, लेकिन चूंकी इस बार राहुल गांधी विवाद और खालिस्तान विवाद एक साथ चल रहा है, लिहाजा रो खन्ना को लेकर कई तरह के सवाल पूछे जा रहे हैं। लेकिन, क्या इन विवादों के बीच रो खन्ना के उस अहसान को भूल जाना चाहिए, जो उन्होंने भारत के लिए किया है? आईये जानते हैं, कि आखिर रो खन्ना पर भारतीय मूल के अमेरिकी क्यों बंटे हैं और उन्होंने भारत के लिए क्या किया है?

राहुल गांधी का दिया था साथ
अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रभावशाली सांसद रो खन्ना, जो चीन को लेकर बाइडेन प्रशासन की बनाई गई अहम कमेटी का हिस्सा भी रह चुके हैं, उन्होंने राहुल गांधी की संसद सदस्यता जाने को लेकर मोदी सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए लिखा था, ''संसद से राहुल गांधी का निष्कासन गांधीवादी दर्शन और भारत के गहरे लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ गहरा विश्वासघात है। यह वह देश नहीं है, जिसके लिए मेरे दादाजी (अमरनाथ विद्यालंकार) ने जेल में सालों बिताए और अपनी कुर्बानी दी थी। नरेंद्र मोदी, लोकतंत्र की खातिर, आपको अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए राहुल गांधी की सदस्यता जाने के फैसले को पलट देना चाहिए।"

रो खन्ना पर वार-पलटवार
रो खन्ना अपने इस ट्वीट के बाद निशाने पर आ गये और कई भारतीयों ने उनका विरोध शुरू कर दिया। जिसके बाद रो खन्ना ने एक और ट्वीट में कहा, कि "उनके दादा और भारत के स्वतंत्रता सेनानी अमरनाथ विद्यालंकार का अपमान नहीं किया जाए।" रो खन्ना ने लिखा था, कि "लाला लाजपत राय के लिए काम करने वाले मेरे दादाजी को बदनाम करते हुए लोगों को देखकर दुख होता है, उन्हें 31-32 और 41-45 में जेल हुई थी। उन्होंने इंदिरा गांधी को आपातकाल का विरोध करते हुए संसद छोड़ने के बाद दो पत्र लिखे थे। मुझ पर अटैक कीजिए। भारत के स्वतंत्रता सेनानियों पर हमला मत कीजिए। फैक्ट हमेशा मायने रखते हैं"। रो खन्ना ने अपने ट्वीट के साथ इंदिरा गांधी और अपने दादाजी की एक तस्वीर भी पोस्ट की थी। लेकिन, अब लोग पूछ रहे हैं, कि आखिर रो खन्ना, अमेरिका में खालिस्तानियों के प्रदर्शन को लेकर क्यों चुप हैं? खासकर अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के प्रभावशाली लोगों के बीच ये सवाल जोर पकड़ने लगा है।
.@RoKhanna - today on, I will ask you once every week:
— Anurag Mairal (@mairal) March 27, 2023
- do you support the violent Khalistani movement?
- Do you support their separatist demand to break up India, a country our President has called an “indispensable partner”.
Your reluctance to criticize Khalistanis by name…
खालिस्तान पर रो खन्ना से सवाल
सैन-फ्रांसिस्को में रहने वाले भारतीय मूल के अनुराग मैराल, जो स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं, उन्होंने रो खन्ना से कई तीखे सवाल पूछे हैं। उन्होंने ट्वीट करते हुए रो खन्ना से पूछा है, कि "रो खन्ना, आज और आज के बाद से मैं हर हफ्ते आपसे कुछ सवाल पुछूंगा। 1- क्या आप खालिस्तान के हिंसक आंदोलन का समर्थन करते हैं? 2- क्या आप भारत को तोड़ने की उनकी अलगाववादी मांग का समर्थन करते हैं? एक देश जिसे हमारे राष्ट्रपति जो बाइडेन ने "अपरिहार्य भागीदार" कहा है"। अनुराग मैराल ने आगे लिखा है, कि "खालिस्तानियों का नाम लेकर उनकी आलोचना करने में आपकी अनिच्छा मन-मुग्ध करने वाली है। खालिस्तान को लेकर आपकी चुप्पी शोर मचा रही है।" अनुराग मैराल ने अमेरिका में रहने वाले भारतीयों से अपील की है, कि वो रो खन्ना से ये सवाल जरूर पूछें। हालांकि, रो खन्ना ने अपने एक ट्वीट में भारतीय पत्रकार ललित के झा पर खालिस्तानियों के द्वारा किए गये हमले की निंदा की है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है, कि " ललित के झा पर किया गया हिंसक हमला पत्रकारिता पर हमला है। मैं कडे़ शब्दों में इस घटना की निंदा करता हूं। ललित, निष्पक्ष और विचारशील पत्रकारों में से एक हैं। ललित, राजनयिकों और वाणिज्य दूतावास की सुरक्षा के लिए हमारी सुरक्षा एजेंसियों को धन्यवाद।"

रो खन्ना कौन हैं, जानिए
रो खन्ना, भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद होने के साथ साथ बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य और सांसद भी हैं। इसके साथ ही वे चर्चित वकील और 'हाउस आर्म्ड सर्विस एक्ट' के सदस्य भी हैं। वह 2017 से कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद हैं। उनका जन्म 13 सितंबर 1976 में फिलाडेल्फिया में एक भारतीय पंजाबी हिंदू परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता पंजाब से यू.एस. में आकर बस गए। रो खन्ना के पिता एक केमिकल इंजीनियर हैं, जिन्होंने भारत में ही IIT से पढ़ाई की है और फिर मिशिगन यूनिवर्सिटी से स्नातक किया। उनकी मां एक टीचर रही हैं। रो खन्ना ने 8 अगस्त 2009 से अगस्त 2011 तक राष्ट्रपति बराक ओबामा के शासनकाल में अमेरिका के वाणिज्य विभाग में उप सहायक सचिव के रूप में भी काम किया है।

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मजबूती से रखते हैं भारत का पक्ष
रो खन्ना, अमेरिका में भारत का पक्ष मजबूती से रखने के लिए जाने जाते हैं। पिछले साल रो खन्ना ने ही अमेरिकी कांग्रेस में एक बिल पेश किया था, जिसमें रूसी हथियार खरीदने के बाद भारत के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेने, और भारत के खिलाफ काट्सा कानून लागू नहीं करने का प्रस्ताव रखा था। इस बिल को बाद में अमेरिकी कांग्रेस में पास किया गया था, जिसके बाद भारत को रूसी हथियार खरीदने पर किसी तरह के प्रतिबंध से बहुत बड़ी राहत मिल गई थी। इसके अलावा, पिछले साल जुलाई महीने में सांसद रो खन्ना ने भारत की सुरक्षा बढ़ाने की जोरदार पैरवी की थी। उन्होंने कहा था, कि अमेरिका, भारत को नाटो प्लस में जोड़ना चाहता है। उन्होंने कहा था, कि अगर भारत को नाटो प्लस में शामिल किया जाता है, तो देश को अमेरिका के साथ रक्षा-सुरक्षा से आसानी से जोड़ा जा सकेगा। इसके साथ ही रो खन्ना ने कहा था, कि 'इंडो-पैसिफिक में अमेरिका के हितों को आगे बढ़ाने के लिए, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भारत-अमेरिका साझेदारी काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है। और इंडो-पैसिफिक में बढ़ते खतरों के जवाब में भारत को मजबूत करना जारी रखना चाहिए"।












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